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उ.प्र. :: योगी सरकार का फैसला, जहरीली शराब से हुई मौत तो दोषियों को उम्रकैद या फांसी की सजा

लखनऊ (राज प्रताप सिंह) : उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में प्रदेश में अवैध शराब से होने वाली मौतों पर रोक के लिए बड़ा फैसला लिया है. योगी सरकार ने इस पर रोक लगाने के लिए आबकारी कानून में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. प्रस्ताव में जहरीली शराब पीने से मौत होने पर दोषी को उम्रकैद से लेकर सजा-ए-मौत तक की सजा का प्रावधान किया गया है. साथ ही आबकारी कानून के तहत लगने वाले जुर्माने की रकम भी बढ़ा दी गयी है.
प्रदेश के एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी अादित्यनाथ की अध्यक्षता में शाम हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में अवैध रूप से बनायी गयी शराब के कारोबार में लिप्त लोगों के खिलाफ सख्ती बरतने के प्रयास के तहत ऐसे लोगों को मौत की सजा देने के प्रावधान को मंजूरी दी गयी है. उन्होंने बताया कि अवैध शराब बनाने और इसे बेचने के कारोबार पर सख्ती से रोक लगाने के लिए मंत्रिमंडल की बैठक में इस कानून में आजीवन कारावास और मौत की सजा के प्रावधानों को जोड़ने को मंजूरी दे दी गयी.
मंत्री ने बताया कि आबकारी कानून 1910 के मौजूदा विभिन्न प्रावधानों को और मजबूत किया गया है. साथ ही मौजूदा परिस्थितियों के हिसाब से उनमें कुछ नयी चीजें जोड़ी गयी हैं. उन्होंने बताया कि अवैध रूप से बनायी गयी शराब पीने से हुई मौतों के मामले की गंभीरता को देखते हुए ऐसे मामलों में मौत की सजा का प्रावधान किया गया है. बताया जाता है कि प्रदेश सरकार जहरीली शराब से होने वाली मौतों को लेकर काफी सख्त कानून बनाने पर विचार कर रही थी. जिसको लेकर प्रस्ताव भी तैयार कर लिया गया था. हालांकि कोई कानूनी अड़चन नहीं आये, इसको लेकर इस पर कानून के जानकारों की भी राय ली गयी थी.
क्या हैं नये प्रावधान
सामान्य मामलों में अगर कोई व्यक्ति जहरीली शराब बनाते हुए पाया जाता है और उसे पीने से किसी की मौत हो जाती है तो उम्रकैद तक की सजा दी जायेगी.
जहरीली शराब से अगर एक साथ बड़ी तादाद में मौत हो जाती हैं तो इसे असाधारण मामला मानते हुए सजा-ए-मौत का प्रावधान किया गया है. प्रस्ताव के अनुसार एक्ट की धारा तीन, 50 से 55, 60 से 69ए सहित 71 तक, 74 और 74ए में संशोधन के साथ ही नयी धाराएं जोड़ी गयी हैं.
अफसरों के अधिकार भी बढ़ेंगे
कैबिनेट ने गिरफ्तारी, जब्ती, सर्च वारंट और जमानती/गैर जमानती धाराओं में संशोधन कर विभागीय अफसरों के अधिकारों को बढ़ाने को भी मंजूरी दी है. शराब तस्करी के मामलों में कारावास की सजा बढ़ा कर एक वर्ष, दो वर्ष, तीन वर्ष करने का प्रस्ताव है. जुर्माने की रकम को 200 से बढ़ा कर 500 और पांच सौ से बढ़ा कर दो हजार किये जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी है. हालांकि, पहले जुर्माने की रकम न्यूनतम पांच हजार करते हुए 10 हजार, 25 हजार या उससे भी अधिक किये जाने पर विचार किया गया था.

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