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उ.प्र. :: 1840 ई. में बना बख्शी का तालाब, अब खत्म हो रहा अस्तित्व

लखनऊ ब्यूरो (राज प्रताप सिंह ) : बादशाह अमजद अली शाह की फौज के इंतजामकार कन्नौज के कायस्थ राजा त्रिपुर चंद्र बख्शी थे। उन्होंने ही इस तालाब का निर्माण कराया था।
लखनऊ का बक्शी का तालाब एक ऐतिहासिक तालाब है। इस तालाब के निर्माण की कहानी भी काफी दिलचस्प है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बादशाह अमजद अली शाह की फौज के इंतजामकार कन्नौज के कायस्थ राजा त्रिपुर चंद्र बख्शी थे। उन्होंने ही इस तालाब का निर्माण कराया था।
यात्रा के दौरान हुआ था तालाब का निर्माण
एक बार नवाब साहब ने राजा बख्शी से फौज के लिए कुछ हाथी खरीदने के लिए नेपाल जाने को कहा। यात्रा के दौरान राजा बख्शी ने खैराबाद की तरफ जाते हुए पहला पड़ाव इसी स्थान पर किया, जहां पर आज यह तालाब है। रात में उन्हें एक सपना आया और उन्होंने वहां एक मंदिर बनवाने का निश्चय लिया। इसके बाद वे वापस लखनऊ आ गए और सारी बात नवाब को बता दी। इसके बाद इस तालाब का निर्माण कराया गया। ये तालाब उस समय का शाही तालाब था। इस तालाब की इस तरह से बनाया गया था कि इस तालाब में हर महीने पानी मौजूद रहता था। समय के साथ-साथ व उचित देख-रेख के अभाव में इस तालाब का पानी खत्म हो गया।
तालाब के निर्माण में लगे कई साल
कई किताबों में जिक्र है कि इस तालाब को बनाने में कई साल लग गए और यह सन् 1840 में पूरी तरह तैयार हो गया। इस तालाब में चार घाट और आठ बुर्ज बने हैं। पूर्व की ओर हवेलीनुमा पुराना घाट बना हुआ है। इसमें पानी की धारा जाने और नहाने की अच्छी व्यवस्था है।
राजा त्रिपुर ने बनवाया था बाग
राजा ‌त्रिपुर ने यहां एक बाग भी बनवाया। इसे शाही बाग या भीतरी बाग भी कहते हैं। हालांकि आज यह अपने मूल स्वरूप में नहीं है लेकिन एक दौर था जब वाजिद अली शाह की बेगमें सावन के महीने में इस तालाब के किनारे झूला झूलने और सैर-सपाटे के लिए आया करती थीं।

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