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नवरात्रि :: उपवास के साथ अपनी सेहत का भी ऐसे रखें ख्याल

राज प्रताप सिंह : नवरात्र के दौरान एक बड़ी संख्या में लोग आमतौर पर नौ दिनों तक उपवास रखते हैं। यह सच है कि श्रद्धालुओं के लिए उपवास का अपना एक विशेष महत्व है, लेकिन इस तथ्य से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि उपवास के दौरान शरीर के आंतरिक अंगों पर भी असर पड़ता है। जाहिर है, उपवास के दौरान शरीर की अनदेखी करना सेहत के साथ अन्याय करना है।
डॉक्टर की सलाह
उपवास का निर्णय व्यक्तिगत है, परंतु अगर आप डायबिटीज अर्थात मधुमेह से ग्रस्त हैं तो आपको डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। उपवास के दौरान आपके आहार व जीवन-शैली में बदलाव आता है, जिस पर अगर ध्यान न दिया जाए तो यह स्थिति कभी-कभी हानिकारक साबित हो सकती है। उपवास से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधित जटिलताओं के बारे में विचार करने के बाद ही व्रत रखने का निर्णय लें, जो लोग डायबिटीज और हाई ब्लडप्रेशर को नियंत्रित रखने के लिए दवाई का सेवन करते हैं, उन्हें उपवास रखने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। 
ये लोग न रखें व्रत
-टाइप-1 डायबिटीज से ग्रस्त लोगों को उपवास नहीं रखना चाहिए।
-जिन लोगों का ब्लड शुगर अनियंत्रित है, उन्हें भी उपवासनहीं रखना चाहिए।
उपयुक्त हैं ऐसे लोग
-जिन लोगों का ब्लड प्रेशर और डायबिटीज नियंत्रित है, वे उपवास रख सकते हैं।
-जिन लोगों ने दवाओं, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वास्थ्यकर जीवनशैली के जरिए डायबिटीज और हाई ब्लडप्रेशर को नियंत्रण में कर रखा है, वे लोग उपवास रख सकते हैं।
दवा की मात्रा में बदलाव
उपवास के दौरान आपकी जीवनशैली में जो बदलाव आता है, डॉक्टर उसके अनुसार आपकी दवा की खुराक (डोज) में परिवर्तन कर सकते हैं। आमतौर पर लोग उपवास के दिनों में इंसुलिन लगाना और दवा लेना बंद कर देते हैं, जो उनकी सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।
ऐसा न हो खानपान
नवरात्र के दिनों में उपवास के दौरान लिया जाने वाला भोजन अधिकतर चिकनाईयुक्त होता है। चिकनाईयुक्त खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। अनेक लोग नवरात्र में उपवास के दौरान तला हुआ खाना जैसे कूटू की पूड़ी, पकौड़ी, साबूदाना के बड़े, तली हुई मूंगफली, चिप्स, पापड़, आलू, अरबी जैसी सब्जियां आदि खाया करते हैं। यह सेहत के लिए नुकसानदेह है। ऐसा इसलिए, क्योंकि इन खाद्य पदार्र्थों में वसा, नमक और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है, जो डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के रोगियों की सेहत के लिए हानिकर साबित हो सकती है।
महत्व दें इन खाद्य पदार्थों को
-ऐसे खाद्य पदार्थ खाएं, जो रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) को ज्यादा न बढ़ाएं, जैसे लौकी व कद्दू की भरवां कूटू की रोटी और कूटू के चीले।
-खीरे व लौकी का रायता।
-ताजा पनीर और सावां के चावल।
-सिंघाड़े के आटे की कढ़ी।
-डायबिटीज वालों को एक नियमित अंतराल पर डॉक्टर की सलाह के अनुसार फल, बादाम, अखरोट, भुने हुए मखाने खाते रहना चाहिए।
-कम से कम तेल का प्रयोग करें और एक बार इस्तेमाल किए गए तेल को दोबारा इस्तेमाल में न लाएं। तेल को बार-बार गर्म करने से उसमें ट्रांस फैट की मात्रा बढ़ जाती है, जो हृदय के लिए हानिकारक साबित हो सकती है।
इनके लिए सेंधा नमक ठीक नहीं
बहुत से लोग नवरात्र के उपवास के दौरान सेंधा नमक का प्रयोग करते हैं। याद रखें, जो लोग क्रॉनिक किडनी डिजीज से ग्रस्त हैं और जिन लोगों के रक्त में पोटेशियम की मात्रा अधिक हो, उनके लिए सेंधा नमक नुकसानदेह होता है।
फलाहार का प्रभाव
-अनेक लोग नवरात्र के उपवास में पूरे दिन कुछ न खाकर सिर्फ एक बार ही फलाहार लेते हैं, उन्हें हाइपोग्लाइसीमिया (शुगर का लो होना) और लो ब्लड प्रेशर की परेशानी हो सकती है।
लो शुगर के लक्षण: पसीना आना, घबराहट होना, हाथ-पैर कांपना और कमजोरी महसूस होना लो शुगर के लक्षण हैं। इन लक्षणों को चीनी, शहद और ग्लूकोज का सेवन करके दूर किया जा सकता है।
लो ब्लड प्रेशर से राहत: अगर शरीर में नमक की कमी से लो ब्लड प्रेशर की समस्या है तो एक नियमित अंतराल पर नमक के साथ फल खाए जा सकते हैं।
डिहाइड्रेशन का समाधान: डायबिटीज वालों को ब्लड शुगर के उतार-चढ़ाव की जटिलताओं के अलावा डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) का खतरा अधिक रहता है। अधिक थकान महसूस होना, जरूरत से ज्यादा प्यास लगना और सांस लेने में तकलीफ होना आदि डिहाइड्रेशन के कुछ प्रमुख लक्षण हैं। डिहाइड्रेशन से बचने के लिए उपवास के दौरान नारियल पानी, नींबू पानी, लस्सी का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए। ध्यान रहे कि उपवास के दौरान नियमित रूप से शुगर की जांच करके और अपने खानपान का ध्यान रखकर आप स्वस्थ रहकर श्रद्धापूर्वक नवरात्र का आनंद उठा सकते हैं।

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