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बिहार :: अंधरठाढ़ी रेफरल अस्पताल जर्जर भवन के कारण नन फंगसिग घोषित

मधुबनी,अंधराठाढ़ी(रमेश कर्ण) : 1980 के दशक में अस्थापित 36 बेड का रेफरल अस्पताल विभागीय उदासीनता के कारण भूत बंगला में तब्दील हो गया है .भवन निर्माण के महज 35 वर्षो बाद ही इस अनोखा और बिशाल भवन को परित्यक्त घोषित कर दिया गया . निर्माण बिभाग काश भवन निर्माण में गुणबत्ता का खयाल रखता तो सायद यह नौबत नही आती . उस समय इसके निर्माण पर करोड़ो रूपये खर्च आये थे . फ़िलहाल भवन के आभाव में इस रेफरल अस्पताल को ननफंगसिग घोषित कर दिया गया है . तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री दिनेश कुमार सिंह ने इसका उद्घाटन किया था .प्रारंभिक अवस्था में एस अस्पताल में दूर दराज से रोगी आते और अपना इलाज कराते थे .यह अस्पताल इलाज और सुबिधाओ के कारण काफी प्रसिद्ध था . कालान्तर में इसका भवन छिजने लगा .रखरखाव और मरम्मत के आभाव में अस्पताल भवन जर्जर हो गया है .ओपरेशन थियेटर प्रसव कक्ष और रोगियों के वार्ड मानक स्तर के नही रह गये .भवन की जर्जरता के करण तत्कालीन प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ ए के झा ने रेफरल अस्पताल भवन से सभी सामान को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सिफ्ट कर दिए .36 बेड बाला अनोखा रेफरल अस्पताल मात्र 9 बेड में स्थानांतरित हो कर चल रहा है . अस्पताल का पुराना भवन परित्यक्त घोषित कर दिया गया . रेफरल अस्पताल परित्यक्त घोषित होने के बाद इसे नन फंगसिग घोषित कर दिए गये .

महिला चिकित्सकका के पांच माह बाद तबादला का मामला चर्चा का विषय बना .
महिला चिकित्सक डॉ बंदना कुमारी का योगदान के पांच माह बाद तबादला का मामला यहाँ चर्चा का विषय बना हुआ है . महज 21 साल बाद अंधराठाढ़ी रेफरल अस्पताल में एक महिला चिकित्सक पदस्थापित हुयी थी .योगदान के पांच माह बाद ही स्वास्थ्य सचिव स्तर से इनकी तबादला अंधराठाढ़ी से बनीपुर दरभंगा कर दिया गया .यहाँ वर्षो से महिला चिकित्सक की मांग थी . महिला चिकित्सक के स्थानातरण को लेकर यहाँ तरह तरह के कायाश लगाये जा रहे है . लोगो को मने तो उनका आरोप है की अंधराठाढ़ी प्रखंड हमेशा से राजद का गट्स रहा है . तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री ने अंधराठाढ़ी रेफरल अस्पताल में महिला चिकित्सक को पोस्टिग कराया था . सरकार बदलते ही यहाँ से उन्हें तबादला कर दिया . दिगर बात है कि मधुबनी जिला के पूर्वी भाग में यह एक एकलौता अस्पताल है जहाँ सबसे अधिक रोगी पहुचते है .यहाँ की स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से ही काफी मजबूत रही है . फ़िलहाल रेफरल अस्पताल में कुल ग्यारह पुरुष चिकित्सक कार्यरत है .महिला चिकित्सक का तबादला होना चर्चा का विषय बना हुआ है

बायोमेट्रिक पद्धति से उपस्थिति के आधार पर ही बेतन भुगतान दे होगी – प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी 
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ राकेश ठाकुर के मुताविक फ़िलहाल 11 चिकित्सक कार्यरत है . डॉ पी एस झा , डॉ उमेश राय ,डॉ अबेदुल्लाह , डॉ रामगोबिंद झा , डॉ डी एन ठाकुर ,डॉ कृष्णा कुमार दास ,डॉ मिथिलेश झा , दन्त चिकित्सक डॉ बिरेन्द्र मिश्र ,आयुष चिकित्सक डॉ मनोज कुमार और संजीव कुमार तैनात हैं . डॉ सुनील कुमार अनुमंडल अस्पताल झंझारपुर में प्रतिन्योजित है . पिछली माह महिला चिकित्सक डॉ बंदना कुमारी का तबादला बेनीपुर दरभंगा हो गया है . सभी चिकित्सको की प्रतिदिन उपस्थिति अनिवार्य कर दी गयी है . बायोमेट्रिक पद्धति से उपस्थिति बनानी होती है . अगले माह से बायो मेट्रिक पद्धति के उपस्थिति के आधार पर ही बेतन भुगतान की गाएगी .

धीरे धीरे अस्पताल में रौनक लौटने लगा है .
14 सितम्बर को प्रसव करने आयी महिला की अस्पताल में मौत के बाद आक्रोशित लोगो ने अस्पताल में तोड़ फोर मचाया था .सिविल सर्जन के पहल पर छ दिनों बाद अस्पताल अस्पताल कर्मी काम पर लौटा था . अब तक क्षति के कारण पूर्णतया व्यवस्था सुदृढ़ नही हुआ है . रोगी के बैठने , ओपीडी कक्ष , समेत फर्नीचर आदि दुरुस्त नही हो पाया है . अस्पताल में तोड़ फोर करने बालो के खिलाफ स्थानीय थाना में दो सौ अज्ञात लोगो के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज कराया गया था . पुलिस भिडियो फुटेज के आधार और आरोपी के तलाश में जुट गयी है . बैसे अस्पताल में पहले ही तरह रोगी भी पहुचने लगा है . अब अस्पताल की व्यवस्था भी पहले से बदलने लगा है . फरार रहने बाले चिकित्सक कर्मी भी नियमित पहुचने लगे है

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