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बिहार :: अधिकारियों की उपेक्षा का शिकार सरकारी घाट

तेघड़ा /बेगूसराय (शषिभूषण भारद्वाज : प्रखंड का सरकारी घाट विसौआ अधिकारियों की उपेक्षा का दंश झेल रहा है। लोक आस्था के महापर्व छठ के अवसर पर घाटों तक जाने वाली सड़कों एवं घाटों का समतलीकरण और साफ-सफाई के निर्देश अधिकारियों को दिये गये थे किन्तु पर्व शुरू हो जाने के बावजूद अब तक किसी भी अधिकारी ने इस घाट की सुधि लेना भी मुनासिब नहीं समझा है। स्थिति यह है कि सरकारी घाट विसौआ सहित दुलारपुर, रातगांव, पिढ़ौली आदि घाटों पर गंदगियों का अंबार है वहीं इन घाटों तक जाने वाले रास्तों में जगह-जगह गड्ढे और घास मौजूद है। सरकारी उपेक्षा के चलते इन घाटों पर छठ व्रतियों के लिये घाट पर पहुंच कर भगवान भास्कर को अघ्र्य देने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। लोगों का कहना है कि इन घाटों पर आस पास के करीब दर्जन भर गांवों के हजारों छठ व्रती सहित बूढ़े बच्चों का जमावड़ा होता है फिर भी सरकारी स्तर से अब तक कोई व्यवस्था नहीं की गयी है। लोगों ने कहा कि अधिकारियों की उपेक्षा के कारण ग्रामीणों द्वारा जन सहयोग से रास्तों एवं घाटों की साफ-सफाई का कार्य किया जा रहा है। इस बावत पूछने पर अनुमंडल पदाधिकारी निशांत ने बताया कि छठ घाटों पर विधि व्यवस्था एवं साफ-सफाई के लिये अधिकारियों को निर्देश दिये गये हैं।
छौड़ाही प्रतिनिधि के अनुसार लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा में इस बार श्रद्धालुओं को छठ घाट पर अघ्र्य देने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। जिस कारण छठ घाटों में जलाशयों में अधिक फैली गंदगी का अंबार अभी भी है जो अब तक प्रशासन व प्रतिनिधियों के द्वारा पहल नहीं हो पाया। जिस कारण ग्रामीणों द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था के तहत घर पर ही छोटे-छोटे तालाब के निर्माण में ज्यादा जोर दिया जा रहा है। घाटों पर गंदगी के कारण लोगों के सामने समस्या खड़ी हो गई है वहीं छठ पर्व के मुख्य उद्देश्य सामूहिक अघ्र्यदान की भी परंपरा टूट रही है। प्राचीन शिव मंदिर छौड़ाही में तालाब के निकट सैकड़ों परिवार भगवान को अघ्र्य देते हैं। अन्य महत्वपूर्ण आस्था अमारी, एकंबा नारायण पीपर पंचायत का दुर्गा स्थान,सार्वजनिक पोखर परोड़ा इन स्थलों के साथ प्रखंड के अनेक 46 घाटों में अगल-बगल कूड़ा कचरा पड़ा हुआ है। वहीं खुले में शौच की बदबू से लोग परेशान हैं। इस संबंध में मुखिया, कर्मचारियों के साथ सीओ से सफाई करने की गुहार ग्रामीणों द्वारा कई बार लगाई जा चुकी है। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि इस गंदगी में 10 मिनट भी घाटों पर रहना बहुत ही मुश्किल हो रहा है इस स्थिति में अघ्र्यदान कैसे हो पाएगा। इस संबंध में सीओ बीरबल वरुण का कहना है कि जल्द ही सभी घाटों की साफ-सफाई कर अन्य व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
मंसूरचक प्रतिनिधि के अनुसार छठ व्रतियों को बलान नदी घाट पर भारी मशक्कत का सामना करना पर सकता है। प्रखंड क्षेत्र के साठा, गोविंदपुर एक, दो, भवानीपुर, अहियापुर, समसा, महेन्द्रगंज, कस्टोली, आगापुर, नयाटोल सहित अन्य बलान नदी घाट के किनारे इतनी अधिक जलकुंभी लगी हुई है जिस घाट पर छठ व्रतियों को जाना इस बार महंगा पर सकता हैं। समय करीब आते हुए भी अब तक प्रशासन घाट सफाई या जलकुंभी हटाने की ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाई है। जिसके कारण लोगों का आक्रोश प्रशासन के प्रति बढ़ता जा रहा है। इतना ही नहीं बल्कि सरायनूरनगर, समसा, भवानीपुर, कस्टोली जैसी घाट के किनारे इतनी गहरी पानी है का अनुमान लगाना मुश्किल है। समय रहते अगर प्रशासन खतरनाक घाटों को चिन्हित कर बेरिकेटिंग नहीं किया गया तो पिछले वर्ष की तरह अनहोनी दुर्घटना का शिकार लोग घाटों पर हो सकते हैं। समाजवादी चिंतक संजय कुमार ईश्वर, प्रो. डा कृष्णमोहन ईश्वर, मो. कासीम उद्दीन ने जिला प्रशासन को विशेष रूप से बलान नदी घाटो की सफाई एवं छठ व्रतियों के सुविधा हेतु सभी घाटो पर रोशनी की ब्यवस्था करवाने साथ ही सभी घाटो पर बांस बल्ला लगा कर बेरिकेटिंग करने की मांग किया है। उन्होंने कहा छठ पर्व के समय जब कोई हादसा होती है तो प्रशासन काफी सजगता से निपटने को जनता से तैयार हो जाती है लेकिन समय रहते अगर हादसा को सावधानी से रोक लिया जाए तो क्या परेशानी है। कुछ घाटो पर जनसहयोग के सहारे साफ-सफाई अभियान चलाया जा रहा है। वहीं समाजवादी चिंतक संजय कुमार ईश्वर ने प्रशासन के प्रति गहरी आक्रोश ब्यक्त किया।

 

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