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बिहार :: कम्युनिस्ट विचारधारा राष्ट्रहित में नहीं : संजय      

बेगूसराय, आरिफ हुसैन संवाददाता: भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सह प्रदेश कार्य समिति सदस्य संजय सिंह ने कम्युनिस्ट पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कम्युनिस्टों का विचार कभी भी राष्ट्रहित में नहीं रहा है बल्कि चीन, मास्को के हित में रहा है। कम्युनिस्टों का चरित्र हमेशा राष्ट्र विरोधी रहा है, भला कौन भूल सकता है जब 1942 में भारत के नौनीहाल अंग्रेजों भारत छोड़ो के नारे के साथ लाठियां एवं गोलियां खा रहे थे, उस समय कम्युनिस्ट अंग्रेजों के साथ गलबटियां कर रहे थे। ठीक इसी प्रकार आपातकाल के समय इंदिरा गांधी के तानाशाही के खिलाफ सारे लोग सड़क पर थे तो कम्युनिस्ट गांधी के साथ बंद कोठरी में गुफ्तगू कर रहे थे। जब भारत पर चीन का आक्रमण हुआ उस समय भी वामपंथी नेता साम्यवाद रहा है, यह कहकर भारत माता के पीठ में खंजर चला रहे थे, वहीं चीन का हौसला आफजाई कर रहे थे। यह रहा है कम्युनिस्टों का देश विरोधी चरित्र। संजय सिंह ने कहा ताजा उदाहरण है अभी जो कम्युनिस्ट के भविष्य का चेहरा बने हुए हैं, वह भूल गए कभी उनके ही मित्र कामरेड चन्द्रशेखर की हत्या सड़कों पर एक दल विशेष लोगों के द्वारा की गई थी। आज वह इसी दल विशेष के सुप्रिमों के पांव पर एक सांसद के टिकट के लिए गिड़गिड़ा रहा है। यह कम्युनिस्ट के आधुनिक महानायक का चरित्र है। राष्ट्रहित एवं देश भक्ति क्या है? यह कोई वामपंथी उस निर्बोध बच्चे से भी सीख सकता है जो बच्चा सात समुंदर पार विराटकोटली के सिक्स पर भारत जीतने की खबर सुन अपने जगह से खड़ा होकर ताली बजाने लगता है। अपनी सीमा की रक्षा पर हुए किसी सैनिक की शहादत पर गुमशुम होकर भूख रहने पर भी अपनी मां को कहता है भूख नहीं है। लेकिन कम्युनिस्टों की इनसे क्या लेनादेना। सच तो यह है कि इनका विचारधारा ही अपनी माटी का नहीं है, अपने संस्कारों का नहीं है तो उन्हें भारत से क्या दर्द होगा। इनकी विचारधारा रूस और चीन से आई है, इसीलिए देश से ज्यादा दर्द इन्हें रूस और चीन के प्रति रहता है। यह इनका देश, समाज और राष्ट्र के प्रति नकारात्मक सोच को दर्शाता है।

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