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बिहार :: ‘झोलाछाप’ कोचिंग सेंटरों की अब खैर नहीं, कोचिंग नियमावली पर शिक्षा विभाग सख्त

पटना : कोचिंग नियमावली की धज्जियां उड़ाने वालों की अब खैर नहीं। बुधवार को शिक्षक व स्नातक क्षेत्र के विधान पार्षदों की मौजूदगी में रूसा कार्यालय में शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा की अध्यक्षता में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में कोचिंग संस्थानों पर नकेल कसने के लिए अहम फैसले लिए गए। कोचिंग नियमावली का पूरी तरह पालन करते हुए इसे प्रभावी बनाया जाए और नियमावली का पालन नहीं करने वाले कोचिंग संस्थानों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करने का निर्देश जारी किया गया। विधान पार्षद केदारनाथ पांडेय, संजीव श्याम सिंह, संजय कुमार सिंह, संजीव कुमार, वीरेन्द्र नारायण यादव और नीरज कुमार के अलावा विभाग के सचिव, विशेष सचिव समेत सभी निदेशालयों के निदेशक की मौजूदगी में शिक्षा मंत्री के साथ हुई इस बैठक में सूबे में कोचिंग नियमावली को प्रभावी बनाने का यह निर्णय लिया गया। 

गौरतलब है कि बिहार कोचिंग नियमावली 2010 के अनुसार तीन वर्ष के लिए शिक्षण संस्थानों का निबंधन होता है। कोचिंग संस्थानों को अधिक फीस लेने से रोकना और छात्रों को अधिक फीस देने से रोकना और बेहतर पढ़ाई उपलब्ध करवाना इस नियमावली का उद्देश्य था। हालांकि नियमावली के पालन नहीं होने की लगातार विभाग को शिकायत मिल रही थी। शिकायत मिलने के बाद सभी कोचिंग संस्थानों पर नकेल कसने की प्रक्रिया तेज हो गई है। राज्यभर में लगभग 25 हजार कोचिंग संस्थान हैं। केवल पटना में 5 हजार से अधिक कोचिंग संस्थान हैं।

नियमावली का उल्लंघन करने पर पहली बार पकड़े जाने पर 25 हजार रुपए हर्जाना देना होगा। वहीं दूसरी बार दोषी पाए जाने पर एक लाख रुपये जुर्माना देना होगा। तीसरी बार भी लगातार दोषी पाए जाने पर कोचिंग संस्थान को बंद कर दिया जाएगा।

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