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बिहार :: डीजी गुप्तेश्वर पांडेय ने महाआरती में लिया भाग

बीहट (बेगूसराय)/संवाददाता : पाताल एवं आसमान दो अनन्त के बीच रहने वाले अभिमान करते हो जबकि बड़े भाग्य से पाये मनुष्य तन में स्वांस भी अपना नहीं है। उक्त सारगर्भित बातें गंगा महाआरती के पांचवे दिन मंगलवार को तपोभूमि, सांस्कृतिक व आध्यात्मिकता की राजधानी, त्रीजनपद देश मिथिलांचल, अंग एवं मगध देश के संगम स्थली व ऐतिहासिक कल्पवास एवं कुम्भ स्थली उत्तर वाहिनी, पाप नाशिनी, गंगा एवं आस्था की भावना की बह रही निर्मल धारा, मां गंगा के आंचल गंगातट सिमरिया धाम में गंगा आरती कुम्भ सेवा समिति के तत्वाधान में संचालित गंगा महाआरती के उपरान्त उद्गार एवं उपदेश के दो आशीर्वचन बतौर मुख्यजमान पधारे बिहार सैन्य पुलिस के पुलिस महानिदेशक सह बेगूसराय के तत्कालीन चर्चित पुलिस कप्तान रहे गुप्तेश्वर पांडेय ने व्यक्त किये। श्री पांडेय ने कहा की जबतक अहंकार रहेगा तबतक सत्य की दीप जीव के अंतरात्मा में जल नहीं सकती। कहा की जबतक तर्क रूपी बुद्धि का नाश ना होगा तबतक हम मंजिल नहीं पा सकते हैं। हे आत्मा वहां निवास कर जहां आत्मा रूपी नदी हो, जिसके सत्य रूपी लहर हो, जिसमें चरित्र रूपी किनारे हो और शील रूपी धारा हो। आगे कहा की कथा, पूजन, सेवन आदि यह धर्म का वाह्य स्वरूप है, धर्म के अलावा सत्य को आत्मसात करने की भी आवश्यकता है। मौके पर बतौर मुख्य यजमान पधारे जिला एवं सत्र न्यायाधीश बेगूसराय गंगोत्री राम त्रिपाठी, समादेष्टा बिहार सैन्य पुलिस वाहिनी-08 बेगूसराय सुधीर कुमार सिंह, वायू सेना में बतौर चिकित्सक पदस्थापित डा. एस समदर्शी सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किये। सभा में उद्घोषक की भूमिका उमेश मिश्र ने निभाया। वहीं इससे पूर्व डीजी बीएमपी गुप्तेश्वर पांडेय ने डीजे गंगोत्री राम त्रिपाठी, डा. एस समदर्शी, बीएमपी-8 कमांडेन्ट सुधीर कुमार सिंह को चादर एवं पाग देकर उन्हें गौरवान्वित किया। इससे पूर्व सर्व मंगला परिवार एवं कुम्भ सेवा समिति द्वारा डीजी बीएमपी गुप्तेश्वर पांडेय को अंग वस्त्रम्, पुष्प गुच्छ एवं मिथिलांचल पाग देकर सम्मानित किया।

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