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बिहार-दरभंगा DMCH के ब्लड बैंक की लापरवाही से गयी 8 मरीजों की जान, जूनियर डॉक्टर का आरोप।

बिहार/दरभंगा सबसे बड़े अस्पताल DMCH के ब्लड बैंक पर मरीजों के जान के साथ न सिर्फ खिलवाड़ कर रहा है बल्कि इसकी लापरवाही के कारण मात्र दो सप्ताह के भीतर आठ वैसे मरीजों की मौत हुई जो अस्पताल के ब्लड बैंक से ब्लड लेकर मरीज़ो को चढ़ाया गया। यह बात हम नहीं कह रहे बल्कि खुद अस्पताल में मरीज़ो का इलाज़ कर रहे डाक्टर ब्लड बैंक पर आरोप लगा रहे है , मामला सामने आते ही अस्पताल प्रशासन पुरे मामले की जांच करने के आदेश भी दे दिए है अब देखना है इन मौत के सौदागरों के खिलाफ क्या कारवाही होती है। ,

यह मामला उजागर भी नहीं होता अगर एक जूनियर डाक्टर अपनी जिम्मेदारी सही तौर पर नहीं निभाता तो , लेकिन जूनियर डाक्टर की सूझ बुझ से न सिर्फ आज गलत खून के कारण एक मरीज़ की जान जाते जाते बची बल्कि ब्लड बैंक की घोर लापरवाही की भी कलई खोल कर रख दी। दरअसल दरभंगा अस्पताल के ब्लड बैंक से खून लेकर जैसे ही एक मरीज़ को चढ़ाया गया मरीज़ की हालत बिगड़ गयी और जबतक डाक्टर कुछ समझ पाते उससे पहले ही मरीज की मौत हो गयी इसके बाद फिर दूसरे मरीज़ के लिए एक बार फिर ब्लड बैंक से खून आया डाक्टर ने जैसे ही मरीज़ को खून चढ़ाना सुरु किया मरीज की हालत सुधरने के बदले बिगड़ने लगी वहा मौजूद जूनियर डाक्टर को कुछ शक हुआ और चढ़ रहे खून के पैकेट को गौर से देखा तो साफ़ पता चला की खून के पैकेट पर लिखे तारीख से छेड़छाड़ की गयी है डाक्टर ने तुरंत मरीज को खून चढ़ाना बंद किया और मरीज की हालत को सुधारने में लग गया मरीज़ की हालत अभी स्थिर है लेकिन इलाज़ कर रहे डाक्टर अब गुस्से में है उनकी माने तो मरीज़ो की मौत का कारण कुछ और होता है और जिम्मेवार इलाज़ कर रहे जूनियर डाक्टर को बना दिया जाता है, जबकि गलती कोइ और करता है कुछ देर के लिए अस्पताल में हो हंगामा भी होने लगा गुस्साए कुछ डाक्टर मरीज़ को चढ़ रहे ब्लड को अपने साथ लेकर ब्लड बैंक भी पहुंच गए और खुद वहा की स्थिति का ज्याजा लिया स्थिति देख डाक्टर काफी असंतोस जाहिर करते हुए कहा की यहाँ कुछ भी सही नहीं सभी मशीने खडाब या गंदे परे है , ब्लड मैच कराने के भी तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा की ब्लड को सुरक्षित रखने का जो सही तापमान मिलना चाहिए वह भी नहीं पूरा हो पा रहा है ऐसे में ठीक ठाक खून मिलना बेमानी ही है।

जूनियर डाक्टर से साफ़ शब्दों में यह आरोप लगाया की आज भी एक मरीज़ की मौत गड़बड़ खून चढाने के कारण हो गयी जबकि दूसरे मरीज़ की हालत खून चढाने के बाद बिगड़ते ही उसे रिकवर कर लिया गया डाक्टर की माने तो महज़ दो सप्ताह के अंदर आठ लोगो की मौत गलत खून या एक्सपाइरी खून चढाने से हुई है। इधर अस्पताल प्रशासन मामला सामने आते ही जांच के आदेश भी दे दिए और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ टिपण्णी करने की बात कही। उधर ब्लड बैंक के स्टोर इंचार्ज डाक्टर ॐ प्रकाश चौरसिया ने डाक्टरों के आरोप को ख़ारिज करते हुए यह माना की ब्लड रखने का जो तापमान है उसमे थोड़ी बहुत कमी जरूर थी।

लेकिन सूत्रों की माने तो लाल खुन का काला खेल दरभंगा अस्पताल में काफी लम्बे समय से खेला जाता रहा है  जिसमे सरकारी अस्पताल के  ब्लड बैंक के कुछ लोग बिचौलियों की मदद से निजी अस्पताल के साथ मिलकर यह खेल खेलते जिसमे निजी अस्पताल के ब्लड बैंक में बचे खून को ठीक एस्पाइर होने से ठीक पहले कुछ पैसो का लोभ देकर दरभंगा अस्पताल के ब्लड बैंक से बदल कर ले जाते है और ऐसे हालात में लिए गए पुराने खून पर नए तारिक लिख अस्पताल के जरुरत मंद मरीज़ो को दे दिया जाता है जो मरीज के लिए जानलेवा साबित होता है।

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