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बिहार :: भैया दूज पर बहनों ने की भाईयों के लंबी उम्र की कामना।

गया। भाई बहन के प्यार का पर्व भैया दूज जिले में परम्परागत तरीके के साथ मनाया गया। बहनों ने भाई की लंबी उम्र के लिए उपवास रखा।बहनों ने इस अवसर पर पूजा अर्चना की। भैया दूज को लेकर जिले के शहरी तथा ग्रामीण इलाकों में सुबह से ही काफी चहल-पहल देखा जा रहा था।बहने अपने भाई की पुजा करने हेतू तैयारी में मग्न नजर आ रही थी। ग्रामीण इलाकों में पुजा की तैयारी को लेकर घर-आंगन के गोवर से लिपा गया था वही शहरी इलाकों में भी गोधन के लिए किसी खास जगह पर साफ-सफाई कर लिपा गया।शुभ मुर्हूत में मुहल्ले की सभी बहने एक जगह इक्ठा होकर अपने अपने भाइयों के लम्बी उम्र के लिए पूजा अर्चना किया।गोधन पूजा के दौरान अक्षत, रोरी, सिंदूर व हल्दी चढ़ाकर पूजा की। फिर रेंगनी के कांटे से भैया को शापित करने के साथ ही पुन उसी कांटे से उन्हें जिंदा भी की।फिर घर के आंगन या अहाते में जुटी सभी महिलाएं व लड़कियां गोधन का पारंपरिक गीत गाते हुए मुसल से गोबर से बने गोधन-गोधनी के आकृति को कूट कर अपना व्रत समाप्त किया।इस मौके पर गोधन की पारंपरिक कहानी भी सुनी व सुनाई गयी।इसके बाद बहनों ने गोधन कुटा तथा बाजरा के साथ प्रसाद अपने भाई को खिलाया।भैया दुज को लेकर कई भाई अपनी बहन के घर आये हुए थे।इस दिन से ही शुभ मुहूर्त की शुरूआत होता है।भाई दूज के मौके पर बहन अपने भाई की आरती उतार भाई-बहन के प्रेम को और प्रगाढ करती है।वही भाई भी अपनीबहन के प्रति उतरदायित्व को पुरा करने का संकल्प दोहराता है।पौराणिक कथा के अनुसार भगवान यमराज आज ही के दिन अपनी बहन यमुना से मिलने रवाना होते हैं. उन्हीं का अनुसरण करते हुए भाई परंपरागत रूप से अपने बहनों से मिलते हैं और उनका यथेष्ठ सम्मान कर पूजा के पश्चात आशीर्वाद के रूप में बहनों से तिलक लेते हैं।भाईदूज के साथ दीपोत्सव का समापन हो जाता है।शस्त्रों के मुताबिक भाईदूज या भैया दूज को यम द्वितीया भी कहते हैं और इस दिन मृत्यु के देवता यमराज का पूजन होता है।बहनें भाई को तिलक लगाकर लंबी उम्र का आशीष देती हैं।

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