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मां चंद्रिका :: यहां चन्द्रमा को भी श्रापमुक्ति के लिए आना पड़ा था – पुजारी नरेश सैनी

बीकेटी/लखनऊ (राज प्रताप सिंह) : राजधानी लखनऊ के बख्शी का तालाब से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर गोमती नदी के तट पर स्थित चन्द्रिका देवी मंदिर की महिमा अपरम्पार है। कहा जाता है कि गोमती नदी के समीप स्थित महीसागरसंगम तीर्थ के तट पर एक पुरातननीम के वृक्ष के कोटर में नौ दुर्गाओं के साथ उनकी वेदियां चिरकाल से सुरक्षित रखी हुई हैं। यहां शंकर जी की विशाल कायप्रतिमा आकर्षण का केंद्र है पुराणों के अनुसार इस धाम में श्राप मुक्ति के लिए चन्द्रमा को भी स्नान करने के लिए आना पड़ा था।
तीन दिशाओं में प्रवाहित होती है गोमती नदी की जलधारा
मां चन्द्रिका के भव्य मंदिर के पास से निकली गोमती नदी की जल धारा चन्द्रिका देवी धाम की तीन दिशाओं उत्तर,पश्चिम और दक्षिण में प्रवाहित होती है तथा पूर्व दिशा में महीसागर संगम तीर्थ स्थित है।जिसमें शिव जी की विशाल मूर्ति स्थापित है। बुजुर्ग कहते हैं स्कन्दपुराण के अनुसार द्वापर युग में घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक ने मां चन्द्रिका देवी धाम स्थित महीसागर संगम में तप किया था। बताया जाता है महीसागर संगम तीर्थ में कभी भी जल काअभाव नहीं होता और इसका सीधा संबंध पाताल से है। आज भी करोड़ोंभक्त यहां महारथी वीर बर्बरीककी पूजा आराधना करते हैं और कुण्ड में स्नान करके खुद को पवित्र करते है जिसके बाद मंदिर में प्रसाद चढ़ाते हैं।

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