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बिहार :: पति की दीघार्यु के लिये सुहागन मनाती है ये महापर्व

लखीसराय(रजनिश कुमार) : जिले के विभिन्न स्थानों पर हजारों सुहागन हर्षौल्लास के साथ वटसावित्री महापर्व मनाती हैं। इस व्रत में वट वृक्ष की पूजा के साथ अपनी पति की दीर्घायु की कामना करती हैं और अखंड सौभाग्यवती की प्रार्थना करती हैं ।इस पर्व मे महिलाएँ सोलह शृंगार के साथ इस व्रत को श्रध्दा पूर्वक करती हैं । इस पर्व मे मुख्य रूप से आम और लीचीयों का भोग लगाना अति लाभदायक माना गया है । जिले के सभी प्रखंडों से लेकर अन्य सभी धर्म स्थलों के मंदिरों के नजदीक वटवृक्ष को लाल पीली कच्चा धागों से
दुल्हन की तरह सजा दिया गया है , जहाँ महिलाएँ सुबह से ही अपने – अपने धर्म स्थल की और पूजा के लिये प्रस्थान कर रहे है । इस पर्व से जहाँ महिलाएँ ही नही पुरुष भी अति उत्साहित नज़र आ रहे हैं । वट्सावित्री आमावस्या के नाम से भी जाना जाता है । इस उपलक्ष्य में खासकर बाज़ारों की रौनक बढ़ जाती है । बाज़ारों मे कपड़े दुकानों से लेकर लहठठी – सिंदूर -बिंदी , महिलायें की जितनी सोलह श्रृंगार की सामग्रियां हैं सभी दुकानों पर सुहागिनो की भीड़ देखी जा सकती है । इस दिन महिलाएँ पूरे दिन का उपवास रखती हैं और शाम को पति के चरण स्पर्श कर , फलाहारी भोजन कर अपने व्रत को विराम देतीं हैं ।

मान्यता है कि सावित्री इसी दिन अपने मृत पति सत्यवान के आत्मा को , यमराज से वापस मांग ली थी । अपने सूझ बुझ से सावित्री अपने पति को जिंदा करने में सफल रही थी । बट सावित्री की पूजा दिन के मध्य में की जाती है । क्योंकि सती सावित्री अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस लाकर पति को पुनर्जीवित किया था , उस समय दिन के मध्य था एवं ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष अमावस्या होने के कारण तेज धूप भी था । उसी समय यमराज ने सावित्री को सती सावित्री नाम से सुशोभित किया था ॥ तभी से यह परंपरा जारी है।

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