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बिहार :: नकली डीएसपी बन सिपाही ने की लाखों की ठगी, पुलिस महकमा में मचा हड़कंप

दरभंगा : निगरानी विभाग की ओर से गठित टीम दरभंगा पुलिस के एक नटवरलाल सिपाही की गिरफ्तारी के लिए कभी भी दरभंगा पहुंच सकती है। मामला प्रकाश में आने के बाद पुलिस महकमा में हड़कंप मचा है। चारों ओर इस नटवर लाल की चर्चा है। हालांकि, उनके निशाने पर आम लोग नहीं बल्कि, राज्य के कई अधिकारी व पुलिस वाले ही रहे हैं। लाखों का चूना लगाने वाले सहायक अवर निरीक्षक की तलाश अब पुलिस वाले ही कर रहे हैं। पूलिस सूत्रों के अनुसार उसकी गिरफ्तारी किसी भी दिन हो सकती है। फिलहाल ये अपने आप को पाक-साफ कहकर छुपते चल रहे हैं। मालूम हो कि दरभंगा पुलिस लाइन में पदस्थापित एएसआई हंस पासवान पर ठगी व गुमराह करने के कई आरोप हैँ। जिस विभाग के बल पर उन्होंने सरकारी मुलाजिमों को चूना लगाया उसी विभाग के अधिकारी उसे खोजने में लगे हैं। दरअसल, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो पटना में हंस पासवान लंबे दिनों तक सिपाही पद पर पदास्थापित रहा है। इसके बाद उसका तबादला एटीएस व बाद में अरवल जिला पुलिस में किया गया। प्रमोशन पाकर उसने दरभंगा में योगदान दिया। लेकिन, निगरानी से हटने के बावजूद उसका मोह भंग नहीं हुआ। सिपाही के पद पर काम करने वाले हंस पासवान ने निगरानी विभाग को अपनी आमदनी का आधार बना दिया। आरोप है कि तबादला होने के बाद फर्जी ही सही लेकिन, वह खुद को निगरानी विभाग का डीएसपी बताने लगा। आते-जाते लोगों के बीच अपना रौब जताकर अवैध वसूली करने लगा। निगरानी विभाग में उनके उपर 50 लाख रुपये से अधिक की वसूली का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। उसकी करतूत से विभाग भी हैरान है। बताया जाता है कि दानापुर के अवर निरीक्षक धनंजय कुमार, नालंदा डीटीओ शैलेंद्र नाथ, नालांदा के प्रवर्तन अवर निरीक्षक अनीष कुमार, नवादा डीटीओ ब्रजेश कुमार सहित दर्जनों अधिकाररियों को उसने चूना लगाया है। इसमें कई पुलिस पदाधिकारी भी शामिल हैं। इन लोगों के पास हंस पासवान पहुंचकर उनके खिलाफ निगरानी में केस दर्ज होने की जानकारी देता था। स्वयं को विभाग का डीएसपी बताकर मामले को रफा-दफा करने के नाम पर बड़ी रकम की वसूली कर लेता था।

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