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खुलासा :: सीबीएसइ स्कूलों में भ्रष्टाचार चरम पर , बोर्ड परीक्षा के लिए एक लाख तक का सौदा

डेस्क : स्कूल में 9वीं में स्टूडेंट फेल हो गये हैं, लेकिन परेशान होने की कोई बात नहीं है. सीबीएसइ से परीक्षा दिलवा देंगे. बस इसके लिए आपको कुछ पैसे खर्च करने पड़ेंगे. 9वीं का फाइनल रिजल्ट मिलने के बाद बोर्ड परीक्षा तक पहुंचाने का खेल शुरू होता है.

सीबीएसइ का रजिस्ट्रेशन शुरू होने से पहले स्टूडेंट को किसी स्कूल तक पहुंचाया जाता है. इसके बाद उस स्कूल के माध्यम से स्टूडेंट्स का 9वीं में रजिस्ट्रेशन करवाया जाता है. परीक्षा फाॅर्म भरवाया जाता है. एडमिट कार्ड मिला, परीक्षा दी और हो गये सीबीएसइ से 10वीं पास. इस खेल में एक नहीं बल्कि के कई स्कूल शामिल हैं. इसके लिए एक अभिभावक को 25 हजार से लेकर एक लाख तक की रकम देनी होती है. यह खुलासा एक अखबार रिपोर्टर की स्टिंग के दौरान हुआ है.

आइसीएसइ स्कूल की 9वीं में फेल स्टूडेंट्स को सीबीएसइ स्कूलों से दिलवाया जाता है 10वीं का बोर्ड

-रिपोर्टर : बाहर के स्टूडेंट को स्कूल तक कैसे पहुंचाया जाता है. इसके लिए पैसे भी लेते हैं आप लोग?

सेटर : जो छात्र 9वीं क्लास में फेल हो जाते हैं. वो हमसे संपर्क करते हैं. खासकर इसमें आइसीएसइ बोर्ड के स्टूडेंट्स अधिक हाेते हैं. रजिस्ट्रेशन से लेकर परीक्षा दिलवाने तक 25 हजार से एक लाख तक का डील होता है. यह डील कई बार बढ़ भी जाता है. नामांकन के लिए प्रति स्टूडेंट्स 25 हजार लिये जाते हैं. इसके बाद जैसे-जैसे आगे बढ़ता है. पैसे का लेने-देन उसी तरह से होता है.

– रिपोर्टर : सीबीएसइ से 10वीं करवाने के लिए कब से खेल शुरू होता है. कैसे अंजाम तक पहुंचाते हैं?

सेटर : इसमें दो तरह के स्टूडेंट संपर्क में आते हैं. एक वो जो 9वीं में फेल कर जाते हैं और दूसरे ऐसे स्टूडेंट्स जो सीबीएसइ नॉन एफिलिएटेड स्कूल के होते हैं. इन स्टूडेंट के अभिभावक से संपर्क करते हैं. रजिस्ट्रेशन के पहले स्टूडेंट को किसी न किसी स्कूल में डालवा दिया जाता है. इसके लिए संबंधित स्कूल के प्राचार्य से संपर्क करते हैं. इसके लिए प्राचार्य को 40 से 45 हजार प्रति छात्र दिये जाते हैं. स्टूडेंट के नामांकन होने के बाद एलओसी (लिस्ट ऑफ कैंडिटेट्स) में स्टूडेंट का नाम डलवाने के लिए सीबीएसइ रीजनल ऑफिस से मदद ली जाती है. एक बार रीजनल आॅफिस से मदद मिलने के बाद फिर कोई आगे कोई दिक्कत नहीं होती है.

– रिपोर्टर : बाहर के स्टूडेंट को स्कूल तक कैसे पहुंचाते हैं. किन स्कूलों से परीक्षा दिलवायी जाती है?

सेटर : इसमें पटना के भी स्कूल शामिल होते हैं. इसके अलावा छोटे शहरों के वो स्कूल जो सीबीएसइ से मान्यता प्राप्त हैं, लेकिन इन स्कूलों में पढ़ाई नाम मात्र की होती है. इसमें पटना और पटना के बाहर छोटे शहरों के सीबीएसइ स्कूल को चुना जाता है. इन स्कूलों से छात्र को परीक्षा फाॅर्म भरवाया जाता है. किड्डी काॅन्वेंट हाइस्कूल, बेरिया, गुलजारबाग, पैरा माउंट हाइस्कूल, मुजफ्फरपुर, ट्रीटैंट पब्लिक स्कूल, मुजफ्फरपुर, ट्रांसिसडेंस इंटरनेशनल स्कूल, साहेबगंज रोड, चकिया, मोतीहारी, जीबी विद्यायन मां दुर्गा नगर, हाजीपुर, वैशाली, होली एंजल हाइस्कूल, छपरा आदि ऐसे स्कूल हैं जिनके प्राचार्य या निदेशक से संपर्क करते हैं.

– रिपोर्टर : स्कूल में छात्र नामांकित नहीं होते हैं. ऐसे में एलओसी में उन्हें कैसे शामिल किया जाता है?

सेटर : इस काम में हमारी मदद सीबीएसइ रीजनल ऑफिस करता है. स्कूल प्रशासन से सेटिंग होने के बाद ऐसे छात्रों के नाम को एलओसी में शामिल कर दिया जाता है. इसे एप्रूवल आसानी से सीबीएसइ से मिल जाता है.

– रिपोर्टर : शहर के बाहर के स्कूलों को क्यों चुनते हैं आप लोग?

सेटर : शहर के बाहर के स्कूल पर नजर कम जाती है. इसके साथ ही पैसे के लेन-देन में भी आसानी होती है. अभिभावक से हम तक और सीबीएसइ तक कई लोग का चेन बना हुआ है.

हर किसी की ड्यूटी बंटी हुई है. शहर के अंदर भी एक दो स्कूल हैं, जहां से संपर्क किया जाता है. कृष्णा पब्लिक स्कूल, नेउरा, दानापुर, सेंट जोसफ पब्लिक स्कूल, एसकेपुरी शामिल हैं. सेंट जोसफ पब्लिक स्कूल का मेन ब्रांच दलसिंहसराय, समस्तीपुर है. लेकिन स्कूल ने पटना में भी ब्रांच खोल रखा है. इसकी जानकारी सीबीएसइ को भी नहीं है.

– रिपोर्टर : जिन स्कूलों से फाॅर्म भरवाया जाता है वहां पर पहले से भी तो स्टूडेंट्स होंगे. फिर कैसे एडजस्ट करते हैं?

सेटर : नहीं, इन स्कूलों में मामूली स्टूडेंट होते है. बाहर के स्टूडेंट्स से पैसे के लेन-देन करने के बाद ये स्कूल स्टूडेंट की सूची तैयार करते हैं. चुकी सारा कुछ स्कूल द्वारा किया जाता है, तो कोई दिक्कत नहीं होती है.

– रिपोर्टर : इस तरह के काम करनेवाले स्कूलों का इंफ्रास्ट्रक्चर कैसा है?

सेटर : जो भी स्कूल इसमें शामिल हैं उनके पास कुछ नहीं है. दो कमरे में स्कूल चल रहा है. सीबीएसइ काे धोखे में रख कर इन स्कूलों ने मान्यता ली है. किड्डी काॅन्वेंट हाइस्कूल की बात करें तो इस स्कूल तक साइकिल जाने का भी रास्ता नहीं है. वहीं ट्रांसिसेडेंस इंटरनेशनल स्कूल को देखें तो यह स्कूल दो कमरे में चलता है. स्कूल से तीन किलाेमीटर दूर जमीन दिखा कर सीबीएसइ से मान्यता ले ली गयी है.

– रिपोर्टर : ये सेटर कौन होते हैं. स्कूल से इनका क्या संबंध है?

सेटर : सेटर स्कूल के प्राचार्य या डायरेक्टर होते हैं. ये प्राचार्य और डायरेक्टर मार्केट में कुछ दलाल को रखते हैं क्यूंकि इन्हीं के माध्यम से परीक्षा दिलवाने की सेटिंग की जाती है.

साभार- प्रभात खबर

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