जीएसटी :: आधी रात से लागू होने पर सबसे पहले इन लोगों पर होगा असर

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 डेस्क : शुक्रवार की रात घड़ी का कांटा जैसे ही 12 बजाएगा, पूरे देश में नए टैक्स सिस्टम गुड्स ऐंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) का आगाज हो जाएगा। कुछ ऐसी जगहें हैं जहां आजादी के बाद सबसे बड़े कर सुधार के लागू होने के तुरंत बाद इसका असर भी हो जाएगा। मसलन, अगर कोई देर रात रेस्तरां में खाना खाने गया और बिल 1 जुलाई की तारीख में तैयार हुआ तो उसे सर्विस टैक्स नहीं बल्कि जीएसटी देना होगा। आगे देखते हैं, वैसे कुछ मामले जहां जीएसटी का सबसे पहले असर होगा।

रेस्तरां 
जो लोग आज रात 11 बजे के आसपास रेस्तरां जाएंगे और खाना खाने के बाद उनका बिल बनते-बनते 12 बज गया तो उसमें सर्विस टैक्स की जगह जीएसटी जुट जाएगा। यानी, उन्हें खाने के लिए पहले से ज्यादा चुकाना होगा क्योंकि मौजूदा 6 प्रतिशत (भोजन पर टैक्स छूट मिलने के बाद) सर्विस टैक्स और वैट की जगह जीएसटी लागू हो जाएगा। हालांकि, सरकार का कहना है कि वास्तव में खाने पर खर्च नहीं बढ़ेगा। बहरहाल, होटल जो सर्विस चार्ज वसूला करते हैं, वह आगे भी जारी रहेगा। 

 टैक्सी
अगर आप शुक्रवार की देर शाम या रात को टैक्सी बुक करते हैं और पेमेंट आधी रात 12 बजे या उसके बाद करते हैं तो आपको वैट की जगह जीएसटी देना होगा क्योंकि रात 12 बजे से जीएसटी लागू हो चुका होगा।

होटल स्टे
होटल में भले ही आप कुछ दिन पहले से ही रह रहे हों, लेकिन अगर छोड़ने के बाद बिल बनते-बनते रात 12 बज गए तो आपको जीएसटी चुकाना होगा। आधी रात से बने बिल पर सर्विस टैक्स और लग्जरी टैक्स जैसे स्थानीय करों की जगह जीएसटी ही लगेगा। लेकिन, अगर आपने होटल बुक करते ही अडवांस पेमेंट कर दिया है तो आपको जीएसटी देने की जरूरत नहीं होगा, भले ही बिल 30 जून के बाद की तारीख में ही क्यों न बने। हालांकि, जीएसटी काउंसिल ने तय किया है कि 1,000 रुपये प्रतिदिन तक के किराए वाले होटलों से टैक्स न लिया जाए। 20 लाख रुपये टर्नओवर लिमिट से नीचे वालों को भी जीएसटी के तहत छूट दी गई है। उन्हें बाद में टैक्स डिपार्टमेंट से रिफंड क्लेम करना होगा।  

ऑनलाइन शॉपिंग
सस्ते की तलाश में रहनेवालों को वैसे सामानों का ऑर्डर आधी रात से पहले ही कर देना चाहिए, जिनके दाम जीएसटी लागू होने के बाद बढ़ने जा रहे हैं। इससे उनको फायदा होगा क्योंकि 30 जून के बाद बिल जेनरेट होने पर जीएसटी लग जाएगा। सरकार ने ऐमजॉन और फ्लिपकार्ट पर वेंडर्स को पेमेंट करते वक्त टैक्स की रकम काटने का दबाव नहीं डालने का फैसला किया है। इससे मामला थोड़ा पेचीदा हो जा रहा है।
दरअसल, जीएसटी काउंसिल ने जीएसटी के तहत ई-कॉमर्स कंपनियों के वेंडर्स से 1% टीसीएस (टैक्स कलेक्टेड ऐट सोर्स) वसूला जाएगा। ईकॉमर्स साइट्स पर एक पर्सेंट टैक्स लगाने के पीछे जीएसटी काउंसिल का मकसद ई-कॉमर्स सेगमेंट में होने वाले सभी ट्रांजैक्शंस को इस व्यवस्था के तहत लाना है। सभी ईकॉमर्स कंपनियों का यह कानूनी दायित्व है कि जब भी सेल हो तो वे रजिस्टर्ड वेंडर्स से टैक्स डिडक्ट करें, भले ही सेलर पर टैक्स देनदारी बनती हो या न बनती हो। ऐसे में जब भी सेलर को पेमेंट होगा, वे कंपनियां एक पर्सेंट विदहोल्ड करेंगी।