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उ० प्र० :: खाऊ कमाऊ नीति के चलते नही रुक रही मिटटी के तेल की कालाबाजारी

 उ० प्र०: लखनऊ राज प्रताप सिंह – बख्शी का तालाब बिकासखंड व तीनों नगर पंचायतों के इटौंजा एवं सरैया स्थित किरोसिन आपूर्ति डिपो व रैथा रोड स्थित महेश्वरी किरोसिन आपूर्ति डिपो पर आपूर्ति निरीक्षक की खाऊ कमाऊ नीति के चलते मिटटी के तेल की कालाबाजारी रुक नही रही है।आलम यह है कि डिपो प्राभारी व आपूर्ति निरीक्षक की सांठ गांठ से यहां दलालों की चांदी है।अधिकतर कोटेदार भी इन दलालो के हांथो यही पर ऊँचे दामो में मिटटी का तेल बेंच देते है।क्षेत्र के गांवो के गरीबो के दीयों में जलने वाला केरोसिन तेल इस समय क्षेत्र के डीजल इंजनों एवं ट्रैक्टरों में धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है।इसी वजह से बिकास खंड के गांवों में बांटने वाला यह तेल इस समय आम जनता को निर्धारित मात्रा में नही मिल पा रहा है।मालूम हो की    नगर पंचायत बीकेटी,महोना व इटौंजा के सभी वार्डो सहित बिकास खंड के गांवों में    बितरित होने वाले किरोसिन का आपूर्ति डिपो इटौंजा,सरैया एवं रैथा रोड पर स्थित है।यहीँ से सभी कोटेदारो की तेल की उठान होती है।बताते है कि तेल के उठान के समय डिपो प्रभारी व आपूर्ति बिभाग का एक कर्मचारी अवश्य उपस्थित रहता है।सूत्रों की माने इन सभी बिभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में प्रत्येक कोटेदार के प्रत्येक ड्रम’200लीटर’से दस लीटर मिटटी का तेल डिपो पर ही वही के कर्मचारी जबरन निकाल लेते है।यही नही कई ऐसे कोटेदार भी है जो डिपो पर मौजूद दलालों के हांथो उंचे दामो पर बेंच देते है।यहाँ पर लगा दलालों का जमावड़ा यह तेल कोटेदारों से बीस या पच्चीस रूपये प्रति लीटर खरीदकर राजधानी से लगे बाराबंकी,हरदोई व सीतापुर जनपद की सीमाओं के गावो में खुलेआम मंहगे दामो में बेंच रहे है।जबकि डिपो कर्मचारियों द्वारा कोटेदारों के प्रति ड्रम से निकाला गया दस-दस लीटर तेल भी इन्ही दलालों को बेंच दिया जाता है।सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि अधिकाँश सरकारी राशन की दुकान महिलाओं के नाम पर आवंटित है।मगर तेल उठान के समय शायद ही कोई महिला दुकानदार डिपो पर पहुंचती हो।जबकि बिभागीय सूत्रों के मुताबिक तेल उठान के समय उठान रजिस्टर पर दुकानदार के हस्ताक्षर होना आवश्यक होता है।फिलहाल विभागीय कर्मियों एवं डिपो प्रभारी व दलालों की आपसी साठगांठ के चलते बीकेटी तहसील क्षेत्र की तीनों नगर पंचायतों एवं बिकासखंड क्षेत्र के 103 गावों के दीयो में जलने वाला तेल उपभोक्ताओं को उपलब्ध होने के बजाय राजधानी लखनऊ की सीमा से लगे सीतापुर,हरदोई व बाराबंकी जिले के गावों में किराने की दुकानों पर खुलेआम चालीस से पचास रूपये प्रति लीटर की दर से बेंचा जा रहा है।लोग इस किरोसिन तेल से डीजल इंजन और ट्रैक्टर चला रहे है।डीजल से किरोसिन तेल सस्ता पड़ता है ।इसी वजह से किरोसिन तेल की मांग ट्रैक्टर और डीजल इंजन के संचालन के लिए बढ़ रही है।

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