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बिहार :: एलएनएमयू में ‘‘जी०एस०टी० एवं किसान‘‘ विषय पर परिचर्चा का आयोजन

दरभंगा : ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के स्नातकाेत्तर अर्थशास्त्र विभाग में दिनांक 30-31 अगस्त को ‘‘जी०एस०टी० एवं भारतीय अर्थव्यवस्था‘‘ पर हाेने वाली यू०जी०सी० सम्पाेषित अन्तर्राष्ट्रीय संगाेष्ठी का आयोजन की तैयारी तथा जी०एस०टी० साक्षरता अभियान के तहत विभागाध्यक्ष डा० राम भरत ठाकुर की अध्यक्षता में ‘‘जी०एस०टी० एवं किसान‘‘ विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा प्रारंभ करते हुए डा० ठाकुर ने कहा कि जी.एस.टी. से खेती महंगी हाे जायेगी। हालांकि जी.एस.टी. लागू हाेने से दाे दिन पहले 28 जून 2017 को जी.एस.टी.काउंसिल द्वारा किसानों काे राहत देते हुए जी.एस.टी. घटाकर उर्वरक पर 5 फीसदी, ट्रैक्टर पर 12 फीसदी, कीटनाशक एवं ट्रैक्टर पार्टस पर 18 फीसदी जी.एस.टी. कर के दायरे में रखा गया हैं परन्तु इसके बावजूद अकेले पंजाब के किसानों पर ही 750 कराेड़ रूपये का अधिक आर्थिक बोझ पड़ेगा जिससें खेती महंगी हाे जायेगी।

ल०ना० मिथिला विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्राे० राज किशाेर झा ने कहा कि 15 जुलाई 2017 को जालंधर में भारतीय किसान माेर्चा द्वारा घेरने पर वित्त मंत्री ने आश्वासन दिया था कि कृषि से जुड़ी चीजाें से जी०एस०टी० हटाने पर विचार किया जायेगा परन्तु 17 जुलाई 2017 काे 19वीं जी.एस.टी काउंसिल की बैठक में कृषि से जुड़ी चीजाें से जी.एस.टी. हटाने पर काेई चर्चा नही हुई। वित्त मंत्री को अपने आश्वासन पर अमल करते हुए कृषि काे जी.एस.टी. से अलग रखना चाहिए। पूर्व विभागाध्यक्ष डा० बनारसी यादव ने कहा कि खेती पर जी.एस.टी. कृषि आय कर वसूलने समान है। नीति आयोग ने खेती पर आय कर लगाने का सुझाव दिया था जिसे वित्त मंत्री ने स्थगित कर दिया था। किसानों काे कृषि कर के दायरें में न रख कर उनके प्रयाेग में आनेवाले समानाें पर जी.एस.टी. लगा दिया गया है। विभागीय प्राध्यापक डा० हिमांशु शेखर ने कहा कि जी.एस.टी. से कर्ज में डूबें किसानों काे दाेहरी मार सहनी पड़ेगी। प्रति एकड़ खेती की लागत करीब 2000 रूपये तक बढ़ जायेगी। इससे 2022 तक किसानों की आय दुगुनी करने की योजना प्रभावित हाेगी।
विभागीय प्राध्यापक डा० विजय कुमार यादव ने कहा कि खेती की लागत बढ़ने से किसानों की आत्महत्याएँ बढ़ जायेगी। 1995 से 2015 के बीच देश भर में 3,18,528 किसानाें ने आत्महत्याएँ की है। जनवरी 2017 में किसानों की आत्महत्याएँ में 42 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
परिचर्चा में अन्य लोगाें के अतिरिक्त शाेधार्थी सुजीत कुमार साफी, रजनीगंधा, काैशल किशाेर झा एवं द्वितीय सेमेस्टर के छात्र/छात्राआें में रौशनी, प्रतिभा कुमारी, प्रीति प्रिया, मुकेश कुमार, अजित कुमार, मिथुन आदि ने भी भाग लिया।

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