बिहार :: पुरानी एवं दुर्लभ पुस्तकें केन्द्रीय पुस्तकालय में दें दान – कुलपति

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दरभंगा : ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्राे० सुरेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि पुस्तकालय हमारी पीढ़ी दर पीढ़ी के लिए उपयाेगी होता है। पुस्तकाें का दान सबसे बड़ा दान है। कुलपति प्राे. सिंह की उपस्थिति में उनके कार्यालय कक्ष में स्व० (डॉ०) मथुरा
नंदन झा, सेवानिवृत प्राचार्य, स्नातकोत्तर गणित विभाग की स्मृति में उनके सुपुत्र ई० अनिल कुमार, सीनेट सदस्य सह इनटैक के आजीवन सदस्य ने केन्द्रीय पुस्तकालय को
उनकी महत्वपूर्ण पुरानी दुर्लभ पुस्तकें दान दी। उन पुस्तकों में अधिकांश पुस्तकें कानून से संबंधित है, इन पुस्तकों के दान करने में विश्वविद्यालय के लाेक सूचना सह जन सूचना पदाधिकारी प्रो० एन०के० अग्रवाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।पुस्तक प्रदान करने के क्रम में संबंधित अभिलेख के साथ उपस्थित लोगाें के
समक्ष कुलपति ने कहा कि पुस्तकालय में हर पुस्तक एक मशाल होता है। महाराजा द्वारा दी गयी दुर्लभ पुस्तकें राज पुस्तकालय में पहले से उपलब्ध है, इसी क्रम को आगे
बढ़ाते हुए ई० अनिल कुमार ने अपने पिता के स्मृति में केन्द्रीय पुस्तकालय को दान देकर एक महान कार्य किया है। मौके पर प्राध्यापक प्रभारी डॉ० राम भरत ठाकुर काे निदेशित करते हुए कहा कि उनकी पुस्तकों की पूर्ण सुरक्षा होनी चाहिए। पुस्तक दान एक अनुकरणीय कार्य है, ऐसे कार्यो से लाेगाें काे दान करने की प्रेरणा मिलेगी।
प्राध्यापक प्रभारी डॉ० राम भरत ठाकुर ने कहा कि पुस्तक दान से छात्रों काे बहुत अधिक लाभ मिलेगा। उन्होंने अपील किया कि जिन लाेगाें के पास पुरानी एवं दुर्लभ
पुस्तकें हैं वो सहर्ष केन्द्रीय पुस्तकालय में दान दे सकते है।
इस मौके पर लाेक सूचना पदाधिकारी प्रो० एन०के० अग्रवाल, पुस्तक दानदाता ई० अनिल कुमार, कुलानुशासक प्रो० अजयनाथ झा, कुलपति के विशेष पदाधिकारी प्राे० एस०के० राय, केन्द्रीय पुस्तकालय के प्राध्यापक प्रभारी डॉ० राम भरत ठाकुर एवं केन्द्रीय पुस्तकालय कर्मी रूपकांत झा, शम्भू नाथ झा आदि उपस्थित थे।