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LNMU :: “वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण” विषयक विचारगोष्ठी आयोजित, परिसर में भी किया वृक्षारोपण

सौरभ शेखर श्रीवास्तव की ब्यूरो रिपोर्ट दरभंगा : ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के स्नातकोत्तर संस्कृत विभाग तथा सामाजिक संस्था माय होम इंडिया के संयुक्त तत्त्वावधान में विश्वविद्यालय परिसर में वृक्षारोपण सह “वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण” विषयक विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया।

विभागाध्यक्ष डा घनश्याम महतो की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय वाणिज्य एवं व्यवसाय प्रशासन के अध्यक्ष सह निदेशक प्रो अजीत कुमार सिंह, सम्मानित अतिथि के रूप में मैथिली विभागाध्यक्ष प्रो रमेश झा, मुख्य वक्ता के रूप में मारवाड़ी महाविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष डा विकास सिंह, विषय प्रवेशक के रूप में विभागीय प्राध्यापक डा आरएन चौरसिया, स्वागत कर्ता के रूप में विभागीय प्राध्यापिका डा ममता स्नेही, संचालन कर्ता के रूप में कार्यक्रम के संयोजक सुधांशु शेखर तथा धन्यवाद कर्ता के रूप में माय होम इंडिया, दरभंगा के संयोजक ज्ञान रंजन चौधरी सहित बी एड रेगुलर के शिक्षक गोविंद कुमार, बालकृष्ण प्रसाद सिंह, गोविंद कुमार झा, राखी कुमारी, सुभाष कुमार, राम लखन झा, सदानंद विश्वास, अनिमेष मंडल, विद्यासागर भारती, योगेन्द्र पासवान, सोनाली मंडल, गुंजन कुमारी, रौशनी आमिर जोया व संजय कुमार महतो आदि उपस्थित थे।

अपने संबोधन में प्रो अजीत कुमार सिंह ने कहा कि वृक्षारोपण हमारा परम धर्म है, क्योंकि इससे पर्यावरण संतुलित होता है। वर्तमान पर्यावरण प्रदूषण को रोकने का सबसे बेहतरीन एवं सरल माध्यम वृक्षारोपण ही है। हम सब पर्यावरण के अभिन्न अंग हैं। वृक्षारोपण से ही पर्यावरणीय चक्र निर्बाध गति से चलता है तथा पृथ्वीवासी समस्त प्राणियों का जीवन भी सुरक्षित रहता है। भारतीय संस्कृति में पीपल, बरगद, तुलसी, आमंला, केला, आम व कटहल आदि को देव तुल्य माने जाने के पीछे विज्ञान और दर्शन दोनों है। वृक्षों द्वारा ही हमें प्राणवायु ऑक्सीजन, भोजन, वस्त्र व औषधि आदि प्राप्त होते हैं। हमारे जीवन की सुरक्षा, वस्त्र, भोजन व स्वास्थ्य आदि आवश्यकताओं की पूर्ति में वृक्षों की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि वृक्ष हैं, तभी हम हैं। हमें मिलकर वृक्षारोपण एवं उसके संरक्षण का एक निरंतर अभियान चलाना चाहिए।


मैथिली विभागाध्यक्ष प्रो रमेश झा ने कहा कि हमारे सभी साहित्य में वृक्षों का विस्तृत महत्व वर्णित है। वृक्षारोपण एक महत्वपूर्ण सामाजिक एवं पर्यावरणीय कार्य है, जिसे हम सबको हमेशा करते रहना चाहिए। हमारे शास्त्रों में वृक्षारोपण के महत्व को बताते हुए कहा गया है कि 1 वृक्ष लगाने से पूर्ण यज्ञ तथा 10 पुत्रों के समान लाभप्रद होता है।


अध्यक्षीय संबोधन में संस्कृत विभागाध्यक्ष डा घनश्याम महतो ने कहा कि वर्तमान आरामदायक जीवन शैली एवं मानवीय लोभों के कारण पर्यावरण को अत्यधिक हानि हो रही है, जिसका कुप्रभाव हमारे जीवन पर पड़ रहा है। हमारे जीवन को सुरक्षात्मक व्यतीत करने के लिए वृक्षारोपण परम आवश्यक है। वृक्ष मातृवत् हमारा जीवन प्रदाता भी है। अधिक से अधिक पेड़ लगाकर ही हम प्राणी जगत की रक्षा कर सकते हैं।


मुख्य प्रवक्ता डा विकास सिंह ने कहा कि प्रकृति हर रूप में सुंदर है। बस एक संवेदनशील हृदय चाहिए जो उसके गीतों को सुन सके, उनसे बात कर सके, उन्हें अपना बना सके और सबसे बढ़कर जो आज है, उसे आने वाली अगली पीढ़ियों को छोड़कर जाने की इच्छा हो, न कि उसकी सुंदरता को नष्ट करने का राग। पर्यावरण को सहेजने के लिए आज हमें सतत विकास की ओर बढ़ना चाहिए। वृक्षारोपण सतत विकास में अत्यावश्यक कड़ी है। वराहपुराण में वृक्ष लगाने के संदर्भ में कहा गया है –
अश्वत्थमेकं पिचुमन्दमेकं न्यग्रोधमेकं दश पुष्पजातीः।
द्वे द्वे तथा दाडिममातुलिंगे पंचाम्ररोपी नरकं न याति।।
अर्थात् वृक्षारोपण हमें नर्क गमन से भी बचाता है।
विषय प्रवेश कराते हुए डा आर एन चौरसिया ने कहा कि वृक्ष धरती के श्रृंगार हैं, जितने अधिक वृक्ष होंगे, धरती उतनी ही सुंदर व समृद्ध होगी। हमें अपने जन्मदिनों, शादी- विवाह, पर्व- त्योहारों सहित अन्य उत्सवों के अवसर पर अधिक से अधिक वृक्ष लगाना चाहिए, क्योंकि वृक्षारोपण करके ही हम अपनी सृष्टि को बचा सकते हैं।
कार्यक्रम के संयोजक एवं माय होम इंडिया के सक्रिय सदस्य सुधांशु शेखर ने कहा कि हमारा संगठन राष्ट्रव्यापी सामाजिक संस्था है जो विशेषकर पूर्वोत्तर क्षेत्र में राष्ट्रीय एकीकरण पर कार्य करता है। यह भूले- भटके बच्चों को भी घर तक पहुंचाने का काम करता है। मलिन बस्तियों में बाल संवर्धन तथा जगह- जगह पर वृक्षारोपण जैसे सामाजिक कार्यों को भी करता है।
माय होम इंडिया, दरभंगा के संयोजक ज्ञान रंजन चौधरी ने बताया कि आज संस्था के संस्थापक सुनील देवधर के जन्म दिवस के सुअवसर पर पूरे राष्ट्र में वृक्षारोपण किया जा रहा है।

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