लखनऊ शूटआउट: सोशल मीडिया पर धमकियों से दहशत में विवेक तिवारी का परिवार, पत्नी कल्पना को अनहोनी का डर

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लखनऊ शूटआउट: सोशल मीडिया पर धमकियों से दहशत में विवेक तिवारी का परिवार, पत्नी कल्पना को अनहोनी का डर

राज प्रताप सिंह,ब्यूरो लखनऊ

लखनऊ।पुलिस क्रूरता का प्रतीक बन चुके विवेक तिवारी का परिवार सोशल मीडिया पर मिल रही धमकियों से सहमा हुआ है। सिपाहियों के पैरोकार पुलिसकर्मी पीड़ित परिवार को ही कठघरे में खड़ा कर घिनौने आरोप मढ़ रहे हैं। टिप्पणियों से विवेक की पत्नी कल्पना सहमी हुई हैं। डर है कि परिवार के साथ कोई अनहोनी न हो जाए। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से सोशल मीडिया पर धमकी देने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।

ये कैसा अनुशासन

मेरे पति को बिना खता के मार दिया। इंसाफ की लड़ाई लड़ने पर डराया जा रहा है। कुछ सिरफिरे सिपाहियों की कायराना हरकत को बहादुरी की संज्ञा दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर कातिलों के पक्ष में चल रही मुहिम के बारे में पता चला है। कल्पना ने कहा कि परिवार को अभी तक सीधे तौर धमकी नहीं दी गई है। पर, जिस तरह के पोस्ट सोशल मीडिया पर वयरल हो रहे हैं। उनके बारे में सुन सिहर उठती हूं।

डर लगता है। कल्पना ने सवाल किया कि पुलिस के अनुशासित फोर्स होने का दावा करने वाले अधिकारी आखिर कहां हैं। क्या उन्हें मातहतों का गैर जिम्मेदाराना रवैया नजर नहीं आता। कल्पना ने कहा कि ऐसे तो सोशल मीडिया पर यूपी पुलिस काफी सक्रिय रहती है।

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बहादुरी के किस्से बयां करती है। फिर विवेक के परिवार को धमकाने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? यह जवाब कल्पना ने पुलिस अधिकारियों से मांगा।

सुरक्षा करने वाले भी पुलिसकर्मी!

विष्णु कहते हैं कि उनके बहनोई विवेक की हत्या से शहरवासी डरे हुए हैं। सोशल मीडिया पर पुलिस के प्रति गुस्से का इजहार कर रहे हैं। वहीं सिपाहियों के पक्ष में भी लोग सामने आए हैं। ऐसे में परिवार की चिंता बढ़ गई है। हमारा घर तो पुलिस लाइन के पास हैं। जिसमें सैकड़ों पुलिस कर्मी रहते हैं। ऐसे में कब क्या हो जाए। कुछ पता नहीं। मगर हर किसी पर शक नहीं किया जा सकता। आखिर हमारी सुरक्षा करने वाले भी पुलिस कर्मी हैं। हमें उन पर विश्वास है। मगर सोशल मीडिया पर चल रही मुहिम के बारे में सुन कर डर लगता है।

कौन कर रहा अपराधियों की फंडिंग

विवेक के ससुर रमेश चन्द्र शुक्ला कहते हैं कि प्रशांत व संदीप कुमार के साथी शुरू से ही उसके पक्ष में है। बेगुनाह का कत्ल करने वाले सिपाहियों के लिए तर्क गढ़ रहे हैं। वह सिपाहियों के लिए फंड जुटाए जाने की बात से काफी आहत हैं। कहते हैं कि आखिर अपराधी की मदद के लिए रुपए जुटाने वाले लोगों को चिन्हित कर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।

 

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