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चित्रगुप्त पूजा :: कलम के आराध्य देव की धूमधाम से हुई पूजा, कण-कण में समाहित हैं ब्रह्मा से उत्पन्न चित्रांश

विजय सिन्हा : आज भाई दूज के साथ चित्रगुप्त भगवान की भी पूजा की गई. चित्रांशों ने भक्तिभाव से लेखनी पुस्तकें कलम व दवात के साथ प्रतिमा की विधिवत पूजा अर्चना की.दरभंगा के पूजा पंडालों में दिनभर भीड़ मूर्ति के दर्शन के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए. आकर्षक सजे पंडालों में रौशनी की विशेष व्यवस्था की गयी थी. चार दिवसीय महोत्सव के दूसरे दिन चित्रगुप्त भवन यानी क्रेज डाल्वी में भगवान चित्रगुप्त की विशेष पूजा अर्चना हुई. वहीं केएम टैंक, सुंदरपुर वीरा स्थित गणपति पुस्तकालय में दिनभर चहल पहल के बीच पंडालों में स्थापित मूर्ति की दर्शन को उमड़ते भक्तों ने पूजा में हिस्सा लिया. कुशेश्वरस्थान के बेरि व औराही में विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम में युवकों का उत्साह चरम पर था। वहीं भदहार, हरोली, सुल्तानपुर में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच भगवान चित्रगुप्त की पूजा अर्चना की गयी. 

पटना से संजय कुमार मुनचुन की रिपोर्ट : चित्रगुप्त पूजा के मौके पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ठाकुरबाड़ी स्थित चित्रगुप्त भगवान का दर्शन किया. साथ ही, पूजा अर्चना कर उन्होंने प्रसाद भी ग्रहण किया. केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कायस्थ समुदाय के लोगों के साथ खाना भी खाया.

जाति के बजाय कर्म, धर्म और समर्पण ही कायस्थों का मूल मंत्र है. पौराणिक मान्यता और परंपरा की बात करें तो कायस्थ एक उच्च श्रेणी की जाति है. हिंदुस्तान में रहनेवाले सवर्ण हिंदू चित्रगुप्तवंशी क्षत्रियों को ही कायस्थ कहा जाता है. 

गौरतलब है कि चित्रगुप्त हिंदुओं के प्रमुख देवता माने जाते हैं. पुराणों के मुताबिक, वो अपने दरबार में मनुष्यों के पाप-पुण्य का लेखा-जोखा कर न्याय करते थे.
व्यापारियों के लिए यह नए साल की शुरुआत मानी जाती है. इस दिन नए बहियों पर ‘श्री’ लिखकर कार्य प्रारंभ किया जाता है. इस दिन अगर चचेरी, ममेरी, फुफेरी या कोई भी बहन अपने हाथ से भाई को खाना खिलाए तो उसकी उम्र बढ़ जाती है. साथ ही जिंदगी के कष्ट भी दूर होते हैं.

कहा जाता है कि ब्रह्मा ने चार वर्ण बनाये (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र). तब यमराज ने उनसे मानवों का विवरण रखने में सहायता मांगी. फिर ब्रह्मा 11,000 वर्षों के लिए ध्यान साधना में लीन हो गये और जब उन्होंने आंखें खोलीं, तो एक पुरुष को अपने सामने कलम, दवात, स्याही, पुस्तक तथा कमर में तलवार बांधे पाया. तब ब्रह्मा जी ने कहा ‘हे पुरुष! क्योंकि तुम मेरी पूरी काया से उत्पन्न हुए हो. इसलिए तुम्हारी संतानों को कायस्थ कहा जायेगा. जैसा कि तुम मेरे चित (शरीर) में गुप्त रूप से (विलीन) आये, इसलिए तुम्हें चित्र श्री चित्रगुप्तजी को महाशक्तिमान क्षत्रिय के नाम पर संबोधित किया गया है.’ 

पद्म पुराण के अनुसार, श्री चित्रगुप्तजी महाराज का परिवार इस तरह उल्लेखित है. श्री चित्रगुप्त जी के दो विवाह हुए, पहली पत्नी सूर्यदक्षिणा/नंदिनी जो सूर्य के पुत्र श्राद्धदेव की कन्या थी, इनसे चार पुत्र हुए. दूसरी पत्नी ऐरावती/शोभावति धर्मशर्मा (नागवंशी क्षत्रिय) की कन्या थी, इनसे आठ पुत्र हुए. अत: कायस्थ की 12 शाखाएं हैं – श्रीवास्तव, सूर्यध्वज, वाल्मीकि, अस्थाना, माथुर, गौड़, भटनागर, सक्सेना, अंबष्ठ, निगम, कर्ण व कुलश्रेष्ठ. श्री चित्रगुप्तजी महाराज के बारह पुत्रों का विवाह नागराज बासुकी की बारह कन्याओं से हुआ. वर्तमान में कायस्थ राजनीति और कला के साथ विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों में सफलतापूर्वक विद्यमान हैं.

कौन हैं चित्रगुप्त महाराज और क्या है इनकी महिमा?
– चित्रगुप्त जी का जन्म ब्रह्मा जी के चित्त से हुआ था.
– इनका कार्य प्राणियों के कर्मों के हिसाब किताब रखना है.
– मुख्य रूप से इनकी पूजा भाई दूज के दिन होती है.
– इनकी पूजा से लेखनी, वाणी और विद्या का वरदान मिलता है.

इस दिन चित्रगुप्त जी की उपासना कैसे करें ?
– प्रातः काल पूर्व दिशा में चौक बनाएं.
– इस पर चित्रगुप्त भगवान के विग्रह की स्थापना करें.
– उनके समक्ष घी का दीपक जलाएं, पुष्प और मिष्ठान्न अर्पित करें.
– उन्हें एक कलम भी अर्पित करें.
– इसके बाद एक सफ़ेद कागज पर हल्दी लगाकर उस पर “श्री गणेशाय नमः” लिखें.
– फिर “ॐ चित्रगुप्ताय नमः” 11 बार लिखें.
– भगवान चित्रगुप्त से विद्या,बुद्धि और लेखन का वरदान मांगें.
– अर्पित की हुई कलम को सुरक्षित रखें और वर्ष भर प्रयोग करें.

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