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जल-जीवन-हरियाली अभियान की हुई समीक्षा

दरभंगा, सुरेन्द्र चौपाल :- दरभंगा, समाहरणालय अवस्थित बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेदकर सभागार में जिलाधिकारी राजीव रौशन की अध्यक्षता में जल-जीवन-हरियाली अभियान की प्रगति की समीक्षा की गयी।
  समीक्षा के दौरान बताया गया कि कुल 11 तालाब ऐभी भी अतिक्रमित हैं, जिनमें सिंहवाड़ा प्रखण्ड के 03, मनीगाछी प्रखण्ड के 02, सदर प्रखण्ड के 03, बहादुरपुर प्रखण्ड के 02 एवं कुशेश्वरस्थान प्रखण्ड का 01 तालाब शामिल है।
  सिंहवाड़ा के अंचलाधिकरी ने बताया कि एक तालाब में जमीन का किस्म खास अंकित है तथा दो तालाब के भिंड पर कुछ लोग बसे हुए हैं। मनीगाछी के अंचलाधिकारी ने बताया कि एक तालाब में भिंड है,जिसपर लोग बसे हुए हैं, 60 प्रतिशत् अतिक्रमण हटा दिया गया है, शेष अतिक्रमण नगर निकाय चुनाव के उपरान्त हटा दिया जाएगा। एक तालाब को अतिक्रमण मुक्त करवा दिया गया है।
  बहादुरपुर के अंचलाधिकारी ने बताया कि उनके यहाँ दो तालाब है, एक आर.एस. टैंक और दूसरा बलुआही पोखर। उन्होंने बताया कि आर.एस. टैंक की जमीन पर करायी गयी गलत जमाबंदी को रद्द करने हेतु अपर समाहर्त्ता को प्रस्ताव दिया गया है।
  इसके अतिरिक्त कुछ तालाब सत्यापन के लिए लंबित बताया गया। सभी पोखरों का जल्द से जल्द सत्यापन कर लेने का निर्देश दिया गया।
  बैठक में बताया गया कि जिले के सभी कुँओं को अतिक्रमण मुक्त करा दिया गया है, लेकिन 28 कुँआ का सत्यापन किया जाना शेष है, जिनमें बेनीपुर प्रखण्ड के तीन, बिरौल प्रखण्ड के छः, घनश्यामपुर प्रखण्ड के तीन, कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखण्ड के दस, सिंहवाड़ा प्रखण्ड के छः, हायाघाट प्रखण्ड के एक कुँआ शामिल है।
  जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार की समीक्षा में बताया गया कि आठ पोखर का जीर्णोद्धार कार्य पूर्ण हो चुका है। आहर एवं पइन के जीर्णोद्धार कार्य भी प्रगति में पायी गयी। अलीनगर, बहादुरपुर एवं बहेड़ी में एक-एक पइन का जीर्णोद्धार कार्य लंबित पाया गया। इस पर शीघ्र प्रारंभ करने का निर्देश दिया गया।
  बैठक में बताया गया कि 15वीं वित्त की राशि से तालाब के भिंड पर पाथ वे का निर्माण एवं पौधारोपण का कार्य करवाया जा सकता है। इसके लिए पंचायती राज विभाग से समन्वय स्थापित कर कार्य करवाया जाए।
      लघू सिंचाई विभाग के द्वारा चैकडेम व तालाब निर्माण कार्य की प्रगति धीमी पायी गयी। बैठक में बताया गया कि उनके द्वारा एक तालाब के जीर्णोद्धार कार्य हेतु निविदा करवाया गया है।
     कुँओं का जीर्णोद्धार की समीक्षा में बताया गया कि कुँओ की संख्या घट गई है, अब यह 1,695 हो गया है।
        कुँआ के समीप सोख्ता निर्माण के लिए मनरेगा द्वारा 43 सोख्ता का निर्माण पूर्ण कराया गया है, जबकि 88 कुआँ चिन्ह्ति है। सबसे ज्यादा मनीगाछी प्रखण्ड में 39 कुँआ के समीप सोख्ता बनाया जाना शेष है। इसके लिए मनीगाछी के पी.ओ. एवं कनीय अभियंता से कारण पृच्छा की गई है।
  चापाकल के किनारे सोख्ता निर्माण की समीक्षा में पाया गया कि प्रखण्डों में काफी कार्य शेष बचे हुए है। जिसमें सबसे अधिक बहादुरपुर में ही 120 चापाकल के किनारे सोख्ता बनाया गया है। इस संबंध में कार्यक्रम पदाधिकारी (मनरेगा) द्वारा मास्टररोल नहीं बनने की जानकारी दी गयी है।
  सभी संबंधित प्रखण्डों को जल-जीवन-हरियाली के अन्तर्गत लंबित सोख्ता निर्माण का कार्य मनरेगा से कराने की अनुमति जिला से प्राप्त करने का निर्देश दिया गया।
  बताया गया कि प्रत्येक पंचायत में 10 सोख्ता बनाने का निर्देश सरकार द्वारा दिया गया है। इस संबंध में उप विकास आयुक्त अमृषा बैंस ने आदेश प्राप्त कर शीघ्र सोख्ता निर्माण कार्य कराने का निर्देश दिया।
   खेत पोखर के निर्माण की समीक्षा में पाया गया कि मनरेगा की प्रगति धीमी है, जितने खेत पोखर चिन्ह्ति किये गये हैं, उस अनुपात में कार्य नहीं हो पा रहा है।
  उल्लेखनीय है कि खेत पोखर का निर्माण रैयत अपनी जमीन में करा सकते हैं। कार्य कराने की राशि का भुगतान सरकार द्वारा किया जाता है। इस प्रकार किसानों के पास अपनी जमीन में सिंचाई के लिए खेत पोखर निर्माण कराने का सुनहारा अवसर उपलब्ध है।
  जिलाधिकारी द्वारा सभी कार्यक्रम पदाधिकारी (मनरेगा) को इसका प्रचार-प्रसार करवाने का निर्देश दिया गया।
  छत वर्षा जल संचयन के कार्य की प्रगति की समीक्षा में पाया गया कि भवन एवं शिक्षा विभाग ने अच्छी प्रगति की है। जाले के कार्यक्रम पदाधिकारी ने बताया कि उनके यहाँ 33 में से 32 योजनाएं पूर्ण की गयी हैं।
  अन्य प्रखण्डों में शिक्षा विभाग एवं स्वास्थ्य विभाग के भवनों पर छत वर्षा जल संचयन का कार्य पूर्ण कराने का निर्देश दिया गया। बताया गया कि 3000 वर्ग फीट वाले छत पर मनरेगा से छत वर्षा जल संचयन का कार्य कराया जा सकता है।
     पौधशाला निर्माण की समीक्षा में बताया गया कि जीविका द्वारा जिले में 14 प्रखंडों में दीदी की नर्सरी बनवाया गया है, शेष प्रखण्डों में भी पौधशाला का निर्माण कराने का निर्देश दिया गया।
  टपकन सिंचाई एवं जैविक खेती की समीक्षा में बताया गया कि 623 एकड़ में जैविक खेती करायी गयी है।
  जिलाधिकारी ने सभी कार्यक्रम पदाधिकारी को चिन्ह्ति खेत पोखर एवं सोख्ता का निर्माण तेजी से कराने का निर्देश दिया।
  बैठक में उप विकास आयुक्त अमृषा बैंस, अपर समाहर्त्ता-सह-अपर जिला दण्डाधिकारी राजेश झा ‘‘राजा’’, उप निदेशक, जन सम्पर्क नागेन्द्र कुमार गुप्ता के साथ-साथ सभी अंचलों के अंचलाधिकारी, राजस्व अधिकारी, कार्यक्रम पदाधिकारी (मनरेगा) एवं अन्य संबंधित पदाधिकारीगण उपस्थित थे। 

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