बिहार :: सूबे के आठ होमियोपैथी काॅलेजों की होगी जांच, स्वास्थ्य विभाग ने की तीन सदस्यीय कमिटी गठित

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picsart_11-01-08-51-54-320x187दरभंगा : सिन्हा होमियोपैथी काॅलेज सहित राज्य के आठ निजी होमियोपैथी मेडिकल काॅलेजों की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है. कमेटी को 15 दिनों के अंदर ऑन स्पाॅट जांच कर विभाग को रिपोर्ट देनी है.इसके बाद इन काॅलेजों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जायेगी.जाँच के लिए अन्य सात काॅलेजों में पटना होमियोपैथी काॅलेज,मोतिहारी के आरडी केडिया होमियोपैथी कालेज,कटिहार के महर्षि मेही होमियोपैथी काॅलेज, हाजीपुर के केंट होमियोपैथी काॅलेज, मुजफ्फरपुर होमियोपैथी कालेज,सीवान के मंगला कमला होमियोपैथी काॅलेज, सहरसा के बीएन मंडल होमियोपैथी काॅलेज शामिल हैं.

जांच रिपोर्ट के आधार पर काॅलेजों पर प्राथमिकी भी दर्ज हो सकती है. सीबीआइ द्वारा केंद्रीय होमियोपैथी परिषद के अध्यक्ष व बिहार के होमियोपैथी चिकित्सक डाॅ रामजी सिंह को रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इन कॉलेजों की जांच के लिए यह कदम उठाया है.

जांच कमेटी के अध्यक्ष है आयुष के उपनिदेशक डाॅ झूलन प्रसाद सिंह, जबकि राजकीय आयुर्वेदिक काॅलेज, बेगूसराय के प्राचार्य डाॅ दिनेश्वर प्रसाद और स्वास्थ्य विभाग के प्रशाखा पदाधिकारी प्रशांत कुमार सदस्य हैं. इन मेडिकल कालेजों की जांच में यह देखा जायेगा कि ये संस्थान वास्तव में कहीं स्थापित हैं या सिर्फ कागजों पर चलाये जा रहे हैं.

इसके अलावा इन काॅलेजों में पठन-पाठन के लिए संसाधनों की उपलब्धता कितनी है. शिक्षक मानकों के अनुसार हैं या नहीं. अगर इन संस्थानों को केंद्रीय होमियोपैथी परिषद से मान्यता दी गयी, तो बिना राज्य सरकार से अनापत्ति प्रमाणपत्र लिये के कैसे चलाये जा रहे हैं. विद्यार्थियों के  ‌भविष्य क्या है. केंद्रीय परिषद का मानकों के अनुसार शिक्षक, स्टाफ, लैब, सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध है या नहीं. जांच कमेटी के अध्यक्ष डाॅ झूलन सिंह ने बताया कि छठ पूजा बाद इन निजी होमियोपैथी काॅलेजों का निरीक्षण किया जायेगा. जल्द ही रिपोर्ट सरकार को सौंप दी जायेगी. अगर संस्थानों ने मानकों का पालन नहीं करनेवाले संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई करने की अनुशंसा की जायेगी.

img-20161101-wa0006मालूम हो कि राज्य में 1995 के बाद से निजी क्षेत्र के होमियोपैथी काॅलेजों में नामांकन के लिए सरकार की ओर से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) नहीं दिया गया है. 1999 में राज्य के साथ निजी होमियोपैथी  काॅलेजों ने एनओसी के लिए आवेदन दिया था. हाइकोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय होमियोपैथी परिषद के साथ सहयोग कर राज्य के सभी निजी होमियोपैथी काॅलेजों को न्यूनतम मापदंड के आलोक में जांच की गयी.

उस जांच के आधार पर वर्ष 2000 में राज्य के चार होमियोपैथी कालेजों- बिहार होमियोपैथी काॅलेज पटना, गया होमियोपैथी काॅलेज,गया, मगध होमियोपैथिक काॅलेज, बिहारशरीफ और द टेंपल आॅफ हेनिमन होमियोपैथी कालेज, मुंगेर को 50-50 विद्यार्थियों का नामांकन बीएचएमएस प्रथम वर्ष में करने की अनुमति दी गयी. राज्य सरकार ने पुन: वर्ष 2002 में राज्य के दो होमियोपैथी कालेजों के न्यूनतम मापदंडों की जांच की गयी. इसके आधार पर जीडी मेमोरियल होमियोपैथी काॅलेज, पूर्वी रामकृष्ण नगर,पटना और डाॅ हालिम होमियोपैथी मेडिकल काॅलेज, लहेरियासराय  को नामांकन को लेकर अनापत्ति प्रमाणपत्र दिया गया.