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बिहार :: उर्दू को रोज़गार से जोड़ना समय की मांग – फातिमी

दरभंगा : साहित्यिक दृष्टिकोण से दरभंगा की धरती पटना से किसी भी प्रकार से पीछे नहीं है। उर्दू ज़बान को रोज़गार से जोड़ना समय की मांग है। इस सम्बन्ध में यूपीए के कार्यकाल में उर्दू को रोज़गार से जोड़ने के लिए मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी की दरभंगा में शाखा खोली गई थी। यह बातें पूर्व केन्द्रीय मंत्री अली अशरफ फातिमी ने दरभंगा में अलमंसूर एजुकेशनल एंड वेलफेयर ट्रस्ट द्वारा आयोजित महफिले मुशायरा और पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर कहीं। श्री फातमी ने कहा कि अलमंसूर ट्रस्ट काफी सक्रीय है। विगत कुछ वर्षों में ट्रस्ट की ओर से कई बड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया जा चुका है। इस अवसर पर दैनिक कौमी तंजीम के मुख्य सम्पादक एस एम अशरफ फरीद ने लोगों से उर्दू के फ़रोग के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने लोगों से उर्दू अख़बार खरीद कर पढ़ने और अपने बच्चों में उर्दू की बुनियादी शिक्षा दिलाने की अपील की। मुशायरा से पहले क़तर से तशरीफ़ लाये अमजद अली सरवर की किताब नेदा.ए.हरमैन का विमोचन बुज़ुर्ग शायर प्रो अब्दुल मन्नान तरज़ी और कौमी तंजीम के मुख्य संपादक एस एम अशरफ फरीद के हाथों हुआ। प्रो.अब्दुल मन्नान तरज़ी ने अमजद अली सरवर को मुबारकबाद पेश करते हुए कहा कि सरवर एक कामयाब शायर हैं। ट्रस्ट के सेक्रेटरी डा मंसूर खुश्तर ने भी अमजद अली सरवर को मुबारकबाद पेश की। उन्होंने कहा कि देश से बाहर जो शायर, कवि और साहित्यकार ज़बानो अदब की सेवा कर रहे हैं उनमे अधिकतर का सम्बन्ध बिहार से है। इस अवसर पर फोन द्वारा मुश्ताक अहमद नूरी, प्रो मनाज़िर आशिक हरगानवी, मो शहाबुद्दीन, डा शहाब ज़फर आज़मी, प्रो इसराइल राजा और कामरान गनी सबा ने भी अपने विचार रखे। डा. मंसूर खुश्तर के धन्यवाद ज्ञापन के बाद पुस्तक विमोचन कार्यक्रम समाप्त हुआ। कार्यक्रम में डा एहसान आलम, डा मुजीर अहमद आज़ाद, डा इंतखाब हाश्मी, मंज़रुल हक मंज़र, नेयाज अहमद, मुम्ताज अहमद, इस्माई बाटलीवाला मुम्बई, रिजवान खान हैदराबाद, जुनैद आलम आरवी, खुर्शीद आलम, मानव्वर आलम राही, एकबाल मुश्ताक, फिरदौस अली एडवोकेट, मुस्ताफिज़ अहद आरफी, इनामूल हक़ बेदार, मो0 शमशाद, मो0 जावेद, मो0 वसीम सहित अधिक संख्या में कला प्रेमी मौजुद थे।

शानदार मुशायरा का भी हुआ आयोजन

पुस्तक विमोचन के बाद एक शानदार मुशायरा का भी आयोजन किया गया। मुशायरा की अध्यक्षता प्रो अब्दुल मन्नान तरज़ी ने की जबकि संचालन मोजीर अहमद आज़ाद ने किया। मुशायरा में सुनील कुमार तंग सीवान, मन्नान तर्जी, अमजद अली सरवर कतर, मंसूर खुश्तर, अशरफ याकूबी, अहमद मेराज कोलकाता आदि कवि ने अपनी रचनाएँ प्रस्तुत की।

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