​(उ०प्र०) – भाजपा भी मान रही है कि अभी तक नहीं आये अच्छे दिन!

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download (1)लखनऊ  राज प्रताप सिंह (उ०प्र०) – अच्छे दिन के सपनो की आस दिखा कर केंद्र की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जुमला कहने से बाज़ नहीं आ रहे हैं या ये कहा जाए की उन्होंने ये मान लिया है कि जनता को बरगला कर ही सत्ता पाई जा सकती है ये बात इस लिए जहन में आ रही है क्योंकि भाजपा के राष्ट्रीय अध्य्क्ष अमित शाह का मिशन यू पी अच्छे दिन की आस के साथ मैदान में उतरा है जो उन्हीने खुद ये कहकर स्वीकार किया है कि 11 मार्च के बाद आएंगे उत्तर प्रदेश के अच्छे दिन यानी भाजपा प्रदेश की सत्ता में आई तब होगा प्रदेश का कल्याण।
यहां एक बात पल्ले नहीं पड़ रही की इसी भाजपा ने भारत में अच्छे दिन लाने के वादे के साथ पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई साथ ही ये भी कहा कि सौ दिन में अच्छे दिन आने लगेंगे जो अभी ढाई साल तक शायद ही किसी को दिखे हो।
अब बात करिये उत्तर प्रदेश में चुनाव बाद अच्छे दिन लाने की तो अब सवाल ये नहीं उठता की क्या यूपी भारत का हिस्सा नहीं है या उन अच्छे दिनों की बात कहने वाली पार्टी का कोई ऐसा तर्क भी था कि जहाँ भाजपा की सरकार होगी वही अच्छे दिन आएंगे।
क्या हो रहा है राजनीती में आजकल ये किसी के पल्ले नहीं पद रहा ख़ास तौर पर अमित शाह की बात की जाए तो वो खुद क्या बोल जाते हैं ये उन्हें भी शायद एहसास नहीं होता। अगर होता तो 11 मार्च के बाद यूपी में अच्छे दिन लाने की बात ना करते हैं ये कहते की उनके हिसाब से यूपी के जो हालात हैं उसकी काया कल्प हो जायेगी पर ये क्या की यूपी के अच्छे दिन आएंगे।
अच्छे दिन के वादे के साथ ही तो बीजेपी ने सरकार बनाई थी और पीएम साहब उसी पर काम भी कर रहे है तो जिन राज्यों में चुनाव होंगे क्या उनके लिए अलग से अच्छे दिन का पैकेज दिया जायेगा ये बात कोई आम जनता को स्पष्ट कर दे तब इस तरह की बातों पर कोई अमित जी से सवाल नहीं करेगा।
यहाँ देखने वाली बात ये भी है कि क्या जिन राज्यों में भाजपा की सत्ता है वहां क्या वाकई अच्छे दिन चल भी रहे हैं या नहीं।
 भाजपा की नीयत भले साफ हो पर इस तरह के बयानों से संदेह ज़रूर उत्पन्न हो जाता है कि वाकई भजपा देश हित में काम करने की मंशा से राजनीति कर रही है या वो भी सिर्फ सत्ता के सुख में विलीन रहने का विकल्प तलाश रही है।