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दिल्ली–अंबाला रेल कॉरिडोर पर तकनीकी उन्नयन: सिग्नलिंग सिस्टम मजबूत करने के लिए 421.41 करोड़ रुपये स्वीकृत

भारतीय रेल ने व्यस्त रेल मार्गों पर सुरक्षा और परिचालन क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रेल मंत्रालय ने उत्तर रेलवे के अंतर्गत आने वाले दिल्ली और अंबाला रेल मंडलों में सिग्नलिंग प्रणाली के आधुनिकीकरण के लिए 421.41 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। इस परियोजना का उद्देश्य हाई डेंसिटी और अत्यधिक उपयोग वाले रेल नेटवर्क पर सुरक्षा मानकों को और सुदृढ़ करना है।

इस स्वीकृति के तहत पारंपरिक मैकेनिकल इंटरलॉकिंग सिस्टम को हटाकर आधुनिक कंप्यूटर आधारित इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) प्रणाली स्थापित की जाएगी। यह तकनीक सिग्नल और ट्रैक पॉइंट्स को डिजिटल माध्यम से नियंत्रित करेगी, जिससे मानवीय त्रुटियों की संभावना में उल्लेखनीय कमी आएगी।

किन स्टेशनों पर होगा बदलाव

योजना के अनुसार, दिल्ली रेल मंडल के अधीन उच्च घनत्व वाले मार्ग पर स्थित 21 स्टेशनों को इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली से लैस किया जाएगा। इसके लिए 292.24 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

वहीं, अंबाला रेल मंडल के 13 स्टेशनों पर भी यही प्रणाली लागू की जाएगी, जिस पर 129.17 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस प्रकार कुल 34 स्टेशनों पर सिग्नलिंग ढांचे को आधुनिक तकनीक से अपग्रेड किया जाएगा।

कवच प्रणाली के साथ समन्वय

महत्वपूर्ण बात यह है कि जिन स्टेशनों पर यह उन्नयन किया जा रहा है, वहां स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ पहले से स्वीकृत है। इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और कवच का संयोजन ट्रेनों की टक्कर रोकने, सिग्नल पासिंग एट डेंजर (एसपीएडी) जैसी घटनाओं को कम करने और आपात स्थितियों में स्वचालित हस्तक्षेप सुनिश्चित करने में मदद करेगा।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह तकनीकी तालमेल व्यस्त रूटों पर परिचालन को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाएगा।

पिंक बुक परियोजना का हिस्सा

यह पहल वर्ष 2024-25 के लिए उत्तर रेलवे की पिंक बुक में शामिल व्यापक 1,547 करोड़ रुपये की परियोजना का हिस्सा है। पिंक बुक में रेलवे के कार्य, मशीनरी और रोलिंग स्टॉक से संबंधित विकास योजनाएं दर्ज होती हैं।

अंबाला रेल मंडल के प्रबंधक विनोद भाटिया ने बताया कि नई प्रणाली पूरी तरह कंप्यूटर आधारित होगी, जिससे सिग्नल और ट्रैक पॉइंट्स का नियंत्रण केंद्रीकृत और अधिक सटीक होगा।

यात्रियों को क्या होगा लाभ

इस उन्नयन से केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि परिचालन दक्षता में भी सुधार होने की उम्मीद है। डिजिटल नियंत्रण प्रणाली के कारण ट्रेनों की आवाजाही बेहतर ढंग से प्रबंधित की जा सकेगी। इससे व्यस्त मार्गों पर ट्रेनों की संख्या बढ़ाने और समयपालन में सुधार की संभावना है।

मानवीय त्रुटि में कमी, तेज प्रतिक्रिया क्षमता और उन्नत निगरानी तंत्र से दुर्घटनाओं के जोखिम को घटाया जा सकेगा। इसके साथ ही, यात्री अधिक सुरक्षित और समयबद्ध यात्रा का अनुभव कर सकेंगे।

भविष्य की दिशा

भारतीय रेल पिछले कुछ वर्षों से नेटवर्क के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दे रही है। स्वदेशी तकनीक के उपयोग, डिजिटल प्रणालियों के विस्तार और सुरक्षा उन्नयन के माध्यम से रेलवे अपनी सेवाओं को अधिक विश्वसनीय बनाने की दिशा में काम कर रही है।

दिल्ली–अंबाला रेल मार्ग पर सिग्नलिंग सिस्टम का यह उन्नयन उसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य है—सुरक्षित, तेज और कुशल रेल परिवहन। आने वाले समय में ऐसे और तकनीकी सुधार देश के अन्य व्यस्त मार्गों पर भी लागू किए जाने की संभावना है।

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