शहर की ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन ने अब सख्ती बढ़ा दी है। स्ट्रक्चरल ऑडिट के बाद भी कई जगहों पर मरम्मत और सुधार कार्य लंबित पाए जाने पर जिला उपायुक्त Ajay Kumar ने बिल्डर्स और संबंधित एजेंसियों को कड़ी फटकार लगाई है। उन्होंने साफ कहा है कि अब लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मंगलवार को लघु सचिवालय के सभागार में एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें स्ट्रक्चरल ऑडिट के पहले चरण में शामिल 15 सोसायटियों के बिल्डर प्रतिनिधि और आरडब्ल्यूए सदस्य मौजूद रहे। इस दौरान डीटीपी (ई) Amit Madholia भी बैठक में शामिल हुए। बैठक का उद्देश्य ऑडिट के बाद की स्थिति की समीक्षा करना और यह सुनिश्चित करना था कि जहां भी खामियां सामने आई हैं, उन्हें जल्द से जल्द दूर किया जाए।
ऑडिट रिपोर्ट के बावजूद नहीं हुए सुधार
समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि कई सोसायटियों में स्ट्रक्चरल ऑडिट की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार जरूरी मरम्मत कार्य समय पर शुरू नहीं किए गए। कुछ जगहों पर काम शुरू हुआ, लेकिन उसकी रफ्तार बेहद धीमी पाई गई।
इस स्थिति पर Ajay Kumar ने नाराजगी जताते हुए कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है, क्योंकि यह सीधे तौर पर लोगों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि भवनों की खामियों को समय रहते ठीक नहीं किया गया, तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।
15 दिन में काम शुरू करने का अल्टीमेटम
डीसी ने सभी बिल्डर्स को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे अगले 15 दिनों के भीतर लंबित कार्यों को शुरू करें। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हर बिल्डर को अपने प्रोजेक्ट की अपडेटेड स्टेटस रिपोर्ट प्रशासन को देनी होगी, जिसमें सभी कार्यों की स्थिति और समयसीमा का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तय समयसीमा के भीतर काम शुरू नहीं किया गया, तो संबंधित बिल्डर्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन इस मामले में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतेगा।
डीटीपी और एजेंसियों को भी जिम्मेदारी
बैठक में डीटीपी (ई) Amit Madholia को भी निर्देश दिए गए कि वे ऐसे मामलों की लगातार निगरानी करें और जहां भी लापरवाही मिले, वहां तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करें।
इसके अलावा, स्ट्रक्चरल ऑडिट करने वाली एजेंसियों को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करें। डीसी ने कहा कि केवल रिपोर्ट तैयार करना ही काफी नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि रिपोर्ट के आधार पर किए जा रहे कार्यों की गुणवत्ता और समयसीमा पर नजर रखी जाए।
तकनीकी रिपोर्ट के बाद भी देरी पर नाराजगी
बैठक में यह भी सामने आया कि कई सोसायटियों में विजुअल इंस्पेक्शन और एनडीटी (नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्ट) की रिपोर्ट पहले ही मिल चुकी है, लेकिन इसके बावजूद काम शुरू नहीं किया गया।
इस पर Ajay Kumar ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यह पूरी तरह अस्वीकार्य है। उन्होंने निर्देश दिए कि जहां भी तकनीकी रिपोर्ट आ चुकी है, वहां तुरंत मरम्मत कार्य शुरू किया जाए।
आरडब्ल्यूए को दी गई अनुमति
बैठक के दौरान कुछ आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों ने यह मांग रखी कि यदि बिल्डर्स काम में देरी कर रहे हैं, तो उन्हें खुद मरम्मत कार्य कराने की अनुमति दी जाए। इस पर डीसी ने सहमति जताई।
हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि आरडब्ल्यूए द्वारा किए जाने वाले सभी कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार ही होंगे और उनकी निगरानी संबंधित एजेंसियों द्वारा की जाएगी, ताकि गुणवत्ता बनी रहे।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश
इस बैठक के जरिए प्रशासन ने यह साफ कर दिया है कि अब सोसायटियों की सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सभी संबंधित पक्षों—बिल्डर्स, आरडब्ल्यूए और ऑडिट एजेंसियों—को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
Ajay Kumar ने कहा कि स्ट्रक्चरल ऑडिट एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का एक अहम जरिया है। इसलिए इसमें किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर परिणाम ला सकती है।
आगे क्या होगा?
प्रशासन आने वाले दिनों में इन सभी सोसायटियों की प्रगति पर नजर रखेगा। समय-समय पर समीक्षा की जाएगी और जिन जगहों पर निर्देशों का पालन नहीं होगा, वहां सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस सख्ती के बाद उम्मीद की जा रही है कि बिल्डर्स और संबंधित एजेंसियां अब ज्यादा जिम्मेदारी के साथ काम करेंगी और सोसायटियों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित माहौल मिल सकेगा।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, जिला प्रशासन का यह कदम शहर की ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। अब देखना यह होगा कि बिल्डर्स इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या निर्धारित समयसीमा में सभी जरूरी सुधार कार्य पूरे कर पाते हैं या नहीं।
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