पंजाब के शिक्षा केंद्रों में शुमार फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) परिसर में सोमवार को एक दुखद घटना सामने आई, जिसने छात्रों और प्रशासन दोनों को स्तब्ध कर दिया। यहां पढ़ाई कर रहे एक छात्र ने यूनिवर्सिटी की बहुमंजिला इमारत से छलांग लगाकर कथित रूप से आत्महत्या कर ली। घटना इतनी अचानक हुई कि मौके पर मौजूद लोग कुछ समझ ही नहीं पाए और छात्र की गिरते ही मौत हो गई।

मृतक छात्र की पहचान 22 वर्षीय निखिल सिमक के रूप में हुई है, जो जालंधर जिले के फिल्लौर क्षेत्र के गांव सुनड़ खुर्द का निवासी बताया गया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, छात्र ने विश्वविद्यालय परिसर में स्थित लाइब्रेरी भवन की नौवीं मंजिल से छलांग लगाई। गिरने के बाद उसे गंभीर चोटें आईं और घटनास्थल पर ही उसकी मृत्यु हो गई।
घटना की जानकारी मिलते ही विश्वविद्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद स्थानीय पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया, सबूत जुटाए और आसपास मौजूद छात्रों व कर्मचारियों से पूछताछ की।
जांच के दौरान पुलिस ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है। डीएसपी भारत भूषण के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि छात्र कुछ समय से मानसिक तनाव में था, हालांकि इसके पीछे के सटीक कारणों की पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस छात्र के मोबाइल, निजी सामान और संपर्कों की भी जांच कर रही है ताकि घटना से पहले की परिस्थितियों को समझा जा सके।
मृतक का शव पोस्टमार्टम के लिए फगवाड़ा के सरकारी अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है। पुलिस ने परिजनों को घटना की सूचना दे दी है, जिसके बाद परिवार के सदस्य विश्वविद्यालय पहुंच रहे हैं। परिजनों के बयान दर्ज करने और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में गहरा शोक और चिंता का माहौल है। कई छात्रों ने बताया कि उच्च शिक्षा संस्थानों में पढ़ाई का दबाव, करियर को लेकर चिंता और निजी परेशानियां अक्सर छात्रों को मानसिक तनाव में डाल देती हैं। उनका मानना है कि विश्वविद्यालयों में काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाने की जरूरत है, ताकि छात्र समय रहते अपनी समस्याएं साझा कर सकें।
शिक्षा विशेषज्ञ भी मानते हैं कि आज के प्रतिस्पर्धी माहौल में छात्रों को सिर्फ शैक्षणिक मार्गदर्शन ही नहीं, बल्कि भावनात्मक सहयोग की भी आवश्यकता होती है। ऐसे मामलों में समय पर संवाद, मित्रों का सहयोग और संस्थान की काउंसलिंग सेवाएं अहम भूमिका निभा सकती हैं।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि छात्र ने यह कदम किन परिस्थितियों में उठाया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी छात्रों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की मानसिक परेशानी या दबाव महसूस होने पर तुरंत अपने शिक्षकों, मित्रों या काउंसलर से संपर्क करें।
यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना उतना ही जरूरी है जितना शैक्षणिक उत्कृष्टता को।
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