मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में बुधवार शाम उस समय अफरातफरी मच गई जब देवी अहिल्याबाई होल्कर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के पीछे खेतों में सूखी झाड़ियों में भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और धुएं का घना गुबार आसमान में छा गया। आग की लपटें इतनी ऊंची उठ रही थीं कि करीब आधा किलोमीटर दूर से साफ दिखाई दे रही थीं। घटना ने स्थानीय लोगों और एयरपोर्ट प्रशासन दोनों की चिंता बढ़ा दी

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग शाम करीब सात बजे के आसपास लगी। एयरपोर्ट परिसर के पीछे बड़ी मात्रा में सूखी घास और झाड़ियां जमा थीं। गर्म मौसम और सूखे हालात के कारण आग ने कुछ ही मिनटों में तेजी पकड़ ली। तेज हवा के झोंकों ने लपटों को और भड़का दिया, जिससे आसपास के क्षेत्र में दहशत फैल गई।
आग लगने की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड को खबर दी गई। दमकल विभाग की दो गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। चूंकि आग एयरपोर्ट की सीमा से ज्यादा दूर नहीं थी, इसलिए प्रशासन ने एहतियातन सतर्कता बढ़ा दी। दमकलकर्मियों ने समय रहते आग पर काबू पा लिया, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका टल गई।
घटना स्थल से कुछ दूरी पर विमानतल का मुख्य परिसर स्थित है। हालांकि आग सीधे रनवे या टर्मिनल क्षेत्र तक नहीं पहुंची, लेकिन धुएं का असर आसपास के इलाके में साफ देखा गया। अधिकारियों के अनुसार, हवाई सेवाओं पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ा। फिर भी सुरक्षा के मद्देनजर पूरे क्षेत्र की निगरानी की गई।
स्थानीय मजदूरों और ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें शुरुआत में समझ ही नहीं आया कि आग कैसे लगी। एक मजदूर ने कहा कि उन्होंने अचानक धुआं उठते देखा और फिर देखते ही देखते आग फैलती चली गई। लोगों ने तुरंत आसपास के लोगों को फोन कर सूचना दी। कुछ ही देर में आग की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, जिससे शहर में चर्चा तेज हो गई।
यह पहली बार नहीं है जब एयरपोर्ट रोड के आसपास आग की घटना हुई हो। पिछले महीने भी इसी क्षेत्र में वन विभाग की जमीन पर सूखी घास में आग लगी थी। उस घटना में हजारों पौधे जलकर खाक हो गए थे। ये पौधे पिछले वर्ष हरियाली महोत्सव के तहत लगाए गए थे। उस आग ने पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचाया था और वन विभाग को दोबारा पौधारोपण की योजना बनानी पड़ी थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि सूखी झाड़ियों और घास वाले इलाकों में गर्मी के मौसम में आग लगने का खतरा अधिक रहता है। जरा-सी चिंगारी या लापरवाही बड़ी आग का रूप ले सकती है। कई बार खेतों में कचरा जलाने या फेंकी गई सिगरेट की वजह से भी आग भड़क जाती है। फिलहाल इस घटना के पीछे की असली वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।
एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील क्षेत्र के पास आग लगना सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर मामला माना जाता है। हालांकि इस बार कोई जनहानि नहीं हुई और आग समय रहते बुझा दी गई, लेकिन यह घटना भविष्य के लिए चेतावनी जरूर है। यदि हवा की दिशा अलग होती या दमकल देर से पहुंचती, तो हालात और बिगड़ सकते थे।
स्थानीय प्रशासन ने अब इस क्षेत्र में सूखी झाड़ियों की सफाई और नियमित निगरानी की योजना पर विचार शुरू किया है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि एयरपोर्ट के आसपास बफर जोन में ज्वलनशील सामग्री को हटाया जाए और फायर सेफ्टी के अतिरिक्त इंतजाम किए जाएं। इससे भविष्य में ऐसे जोखिमों को कम किया जा सकता है।
घटना के दौरान आसपास के लोगों में घबराहट का माहौल रहा। कई लोग अपने घरों की छतों पर चढ़कर आग का दृश्य देख रहे थे। कुछ लोगों ने चिंता जताई कि यदि आग और फैलती तो पास के खेत और आवासीय क्षेत्र भी इसकी चपेट में आ सकते थे। हालांकि दमकलकर्मियों की तत्परता ने स्थिति को नियंत्रण में रखा।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सूखे मौसम में आग से संबंधित सावधानियां बरतें। खेतों में कचरा या घास न जलाएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस या फायर ब्रिगेड को दें। साथ ही सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने से बचने की भी सलाह दी गई है।
इंदौर में तेजी से हो रहे शहरी विस्तार के बीच ऐसे खुले और सूखे क्षेत्र जोखिम का कारण बन सकते हैं। एयरपोर्ट रोड पर बढ़ती आवाजाही और आसपास विकसित हो रहे इलाकों को देखते हुए अग्नि सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है।
कुल मिलाकर, देवी अहिल्याबाई होल्कर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास लगी यह आग एक बड़ी दुर्घटना में बदल सकती थी, लेकिन समय पर कार्रवाई से नुकसान सीमित रहा। जांच पूरी होने के बाद ही आग लगने के असली कारण सामने आएंगे। फिलहाल शहर ने राहत की सांस ली है कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई और विमान सेवाएं सुरक्षित रहीं।
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