हरियाणा के अंबाला जिले में विदेश भेजने के नाम पर बड़ी धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। यहां एक परिवार ने अपने बेटे को बेहतर भविष्य के लिए अमेरिका भेजने की उम्मीद में अपनी जमीन और मकान तक बेच दिए, लेकिन एजेंटों ने युवक को अमेरिका पहुंचाने के बजाय महीनों तक अलग-अलग देशों में भटकाया और आखिर में मैक्सिको पहुंचाकर छोड़ दिया।

इस पूरे घटनाक्रम में परिवार से करीब 57 लाख रुपये ऐंठ लिए गए। अंत में युवक अमेरिका पहुंचने की कोशिश में पकड़ा गया और अगस्त 2025 में उसे भारत वापस डिपोर्ट कर दिया गया।
पीड़ित परिवार की शिकायत पर नग्गल थाना पुलिस ने दो एजेंटों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बेहतर भविष्य की उम्मीद में लिया बड़ा फैसला
जानकारी के अनुसार पंजाब के पटियाला जिले के मोलगढ़ गांव निवासी जगीर सिंह अपने बेटे गुरजिंद्र सिंह को विदेश भेजना चाहते थे। परिवार का सपना था कि बेटा विदेश जाकर अच्छी नौकरी करेगा और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरेगी।
इसी दौरान उनकी मुलाकात जनसूआ गांव निवासी अजीत सिंह से हुई। अजीत सिंह ने उन्हें कुछ एजेंटों के बारे में बताया, जो युवाओं को विदेश भेजने का काम करते थे।
अजीत सिंह के माध्यम से जगीर सिंह का संपर्क पिहोवा निवासी जसविंदर सिंह और जनसूआ निवासी मनदीप सिंह से हुआ।
एजेंटों ने मांगे थे 45 लाख रुपये
जगीर सिंह के अनुसार एजेंटों ने उनके बेटे को अमेरिका भेजने के लिए 45 लाख रुपये की मांग की। जब जगीर सिंह ने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई तो आरोपियों ने उन्हें अपनी जमीन बेचने की सलाह दी।
परिवार के पास करीब एक किला, छह कनाल और 12 मरले जमीन थी। एजेंटों ने कहा कि अगर वे जमीन बेच दें तो बेटे को आसानी से अमेरिका पहुंचाया जा सकता है।
परिवार ने बेटे के भविष्य को देखते हुए जमीन बेचने का फैसला कर लिया।
जमीन बेचने के बाद भी नहीं रुकी मांग
शिकायत के अनुसार जमीन बेचने की प्रक्रिया शुरू होने के बाद एजेंटों ने लगातार पैसे मांगने शुरू कर दिए।
बताया गया कि पहले जमीन का बयाना कराया गया और बाद में जमीन किसी दूसरी महिला के नाम करवा दी गई। इसके बाद एजेंटों ने परिवार से लगभग 20 लाख रुपये और ले लिए।
इतना ही नहीं, उन्होंने परिवार के मकान का भी बयाना लिखवा लिया और बाकी रकम नकद तथा बैंक खातों के माध्यम से ले ली।
अगस्त 2024 में विदेश भेजा गया युवक
जगीर सिंह के मुताबिक एजेंटों ने उनके बेटे के लिए 2 अगस्त 2024 को पिहोवा स्थित अपने कार्यालय में बुलाकर कुछ कागजी प्रक्रिया पूरी करवाई।
इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर सूर्यनेम नामक देश का वीजा मंगवाया और 21 अगस्त को गुरजिंद्र सिंह को विदेश भेज दिया।
परिवार को उम्मीद थी कि कुछ ही समय में उनका बेटा अमेरिका पहुंच जाएगा, लेकिन आगे जो हुआ वह बेहद परेशान करने वाला था।
एयरपोर्ट पर ही रुकवाया गया
युवक को सबसे पहले नीदरलैंड भेजा गया, जहां उसे दो दिन तक एयरपोर्ट पर ही रोके रखा गया। इसी दौरान एजेंटों ने परिवार पर जमीन की रजिस्ट्री करवाने का दबाव बनाया।
परिवार का आरोप है कि उन्होंने मजबूरी में रजिस्ट्री करवाई, क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं उनके बेटे को रास्ते में छोड़ न दिया जाए।
24 देशों में घुमाया गया
शिकायत के अनुसार इसके बाद युवक को अलग-अलग रास्तों से कई देशों में घुमाया गया।
बताया जाता है कि कभी उसे छोटी नावों में बैठाकर समुद्री रास्तों से ले जाया गया, तो कभी टैक्सी या अन्य वाहनों से सीमा पार कराई गई।
इस तरह एजेंटों ने उसे लगभग 24 देशों में घुमाया। पूरा सफर बेहद खतरनाक और कष्टदायक था।
विरोध करने पर की जाती थी मारपीट
पीड़ित परिवार का आरोप है कि जब गुरजिंद्र सिंह ने इस खतरनाक यात्रा का विरोध किया तो एजेंटों के साथियों ने उसके साथ मारपीट भी की।
उसे कई बार धमकाया गया और कहा गया कि अगर वह सहयोग नहीं करेगा तो उसे बीच रास्ते में छोड़ दिया जाएगा।
इस दौरान युवक करीब छह महीने तक अलग-अलग देशों में भटकता रहा।
आखिरकार मैक्सिको पहुंचाया गया
करीब छह महीने की इस खतरनाक यात्रा के बाद युवक को मैक्सिको पहुंचाया गया।
यहां भी उसकी परेशानी खत्म नहीं हुई। आरोप है कि वहां भी उसके साथ मारपीट की गई और उसे एक कैंप में रहने के लिए मजबूर किया गया।
गुरजिंद्र सिंह करीब नौ महीने तक उसी कैंप में रहा।
अमेरिका में प्रवेश की कोशिश और गिरफ्तारी
बाद में युवक ने अमेरिका में प्रवेश करने की कोशिश की, लेकिन वहां की एजेंसियों ने उसे पकड़ लिया।
अमेरिकी अधिकारियों ने जांच के बाद उसे अवैध तरीके से प्रवेश करने के आरोप में हिरासत में ले लिया।
इसके बाद 28 अगस्त 2025 को उसे भारत डिपोर्ट कर दिया गया।
परिवार को हुआ भारी नुकसान
जब गुरजिंद्र सिंह भारत वापस लौटा तो परिवार को पूरी सच्चाई का पता चला।
परिवार ने बताया कि बेटे को विदेश भेजने के चक्कर में उनकी जमीन और मकान तक बिक गए।
करीब 57 लाख रुपये खर्च होने के बावजूद उनका सपना टूट गया और बेटा भी परेशानियों से गुजरकर खाली हाथ लौट आया।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
पीड़ित जगीर सिंह की शिकायत पर नग्गल थाना पुलिस ने दो आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
पुलिस ने पिहोवा निवासी जसविंदर सिंह और जनसूआ गांव निवासी मनदीप सिंह पर इमीग्रेशन एक्ट के साथ-साथ आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।
जांच में जुटी पुलिस
पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। आरोपियों की भूमिका और पैसे के लेन-देन की भी जांच की जा रही है।
साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
अवैध तरीके से विदेश भेजने का बढ़ता जाल
यह घटना उन लोगों के लिए भी चेतावनी है जो अवैध तरीकों से विदेश जाने का सपना देखते हैं।
डंकी रूट के जरिए विदेश भेजने वाले एजेंट अक्सर लोगों से भारी रकम वसूलते हैं और उन्हें खतरनाक रास्तों से ले जाते हैं।
कई बार ऐसे मामलों में लोग रास्ते में ही फंस जाते हैं या फिर उन्हें विदेशों से वापस भेज दिया जाता है।
अंबाला का यह मामला दिखाता है कि कैसे बेहतर भविष्य की उम्मीद में एक परिवार ने अपनी सारी संपत्ति दांव पर लगा दी, लेकिन अंत में उन्हें धोखाधड़ी और निराशा ही हाथ लगी।
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