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उत्तम नगर हत्याकांड पर सियासी घमासान: आरोपियों के घरों पर बुलडोजर कार्रवाई को लेकर उठे सवाल

दिल्ली के उत्तम नगर में हुए तरुण बुटोलिया हत्याकांड ने राजधानी में तनाव के साथ-साथ राजनीतिक हलचल भी बढ़ा दी है। इस मामले में आरोपियों के घरों पर नगर निगम द्वारा की गई बुलडोजर कार्रवाई के बाद सियासत तेज हो गई है। जहां एक ओर पीड़ित परिवार और स्थानीय लोग दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ राजनीतिक नेताओं ने इस कार्रवाई को लेकर प्रशासन पर सवाल खड़े किए हैं। एआईएमआईएम नेता शोएब जमई ने इस मामले में दिल्ली सरकार और नगर निगम की कार्रवाई को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

दरअसल, हाल ही में दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में एक हिंसक घटना के दौरान तरुण बुटोलिया नाम के युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था और लोगों में काफी आक्रोश देखने को मिला था। घटना के बाद से ही स्थानीय लोग आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे थे।

इसी बीच रविवार को नगर निगम (एमसीडी) की टीम ने पुलिस की मौजूदगी में आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माण को गिरा दिया। प्रशासन का कहना है कि जिन मकानों को गिराया गया, वे सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से बनाए गए थे और उन्हें अतिक्रमण की श्रेणी में रखा गया था। इसलिए नियमों के अनुसार कार्रवाई करते हुए इन निर्माणों को हटाया गया।

हालांकि इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। एआईएमआईएम नेता शोएब जमई ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति का घर तोड़ना इतना आसान नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में न्यायालय मौजूद हैं और किसी भी मामले में सजा देने का अधिकार अदालतों को है, न कि प्रशासन को इस तरह से कार्रवाई करने का।

जमई ने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाई से समाज में भेदभाव का संदेश जाता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार इस मामले में निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रही है और कार्रवाई में पक्षपात दिखाई दे रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह की बुलडोजर कार्रवाई पहले कुछ राज्यों में देखने को मिलती थी, अब वैसी ही स्थिति दिल्ली में भी दिखाई देने लगी है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वोट बैंक की राजनीति के चलते इस तरह की कार्रवाइयों को अंजाम दिया जा रहा है। जमई के अनुसार प्रशासन को किसी भी मामले में कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए और जल्दबाजी में ऐसे कदम नहीं उठाने चाहिए जिससे समाज में तनाव बढ़े।

एआईएमआईएम नेता ने यह भी कहा कि यह मामला मूल रूप से दो परिवारों के बीच का विवाद था, लेकिन इसे बेवजह सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि समाज में सौहार्द बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।

यदि पूरे मामले की शुरुआत की बात करें तो यह विवाद होली के दिन हुई एक छोटी सी घटना से शुरू हुआ था। जानकारी के मुताबिक होली की शाम उत्तम नगर की जेजे कॉलोनी में रहने वाले एक परिवार की बच्ची खेलते समय पानी से भरा गुब्बारा नीचे फेंक रही थी। इसी दौरान वह गुब्बारा वहां से गुजर रही एक महिला को लग गया।

परिवार के लोगों का कहना है कि इस घटना के बाद उन्होंने तुरंत महिला से माफी मांग ली थी, लेकिन इसके बावजूद विवाद बढ़ गया। आरोप है कि महिला ने अपने रिश्तेदारों को बुला लिया और कुछ ही देर में कई लोग वहां पहुंच गए।

इसके बाद गली में काफी हंगामा हुआ और दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया। आरोप है कि भीड़ ने गली में मौजूद लोगों के साथ मारपीट शुरू कर दी और कई घरों के शीशे भी तोड़ दिए। इसी दौरान तरुण बुटोलिया को भी भीड़ ने घेर लिया।

परिवार का आरोप है कि भीड़ ने तरुण पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया और उसे बेरहमी से पीटा। गंभीर चोटों के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया और लोगों ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग शुरू कर दी।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। पुलिस ने इस मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में छह वयस्क और एक नाबालिग शामिल बताया जा रहा है।

पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और अन्य संभावित आरोपियों की तलाश भी की जा रही है। साथ ही पुलिस यह भी जांच कर रही है कि घटना के दौरान और कौन-कौन लोग मौजूद थे।

दूसरी ओर नगर निगम द्वारा की गई बुलडोजर कार्रवाई ने इस पूरे मामले को और अधिक चर्चा में ला दिया है। प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह से अवैध निर्माण हटाने के लिए की गई है और इसका उद्देश्य कानून का पालन सुनिश्चित करना है।

फिलहाल यह मामला दिल्ली में चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक बयानबाजी के कारण मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है। पुलिस और प्रशासन का कहना है कि मामले में कानून के अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

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