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पहाड़ों में सियासी ‘कैंप’, हरियाणा कांग्रेस की बाड़ेबंदी पर लाखों खर्च

हरियाणा राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए जिस रणनीति का सहारा लिया, उसने सियासी गलियारों में खूब चर्चा बटोरी। चुनावी हलचल के बीच पार्टी ने अपने विधायकों को हिमाचल प्रदेश के हिल स्टेशनों में शिफ्ट कर दिया, जहां उनके लिए खास इंतजाम किए गए। इस पूरी व्यवस्था पर करीब 30 लाख रुपये खर्च होने की बात सामने आई है, जिससे यह बाड़ेबंदी “लग्ज़री पॉलिटिक्स” का उदाहरण बन गई।

चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक दबाव से बचने के लिए पार्टियां अक्सर अपने विधायकों को सुरक्षित स्थानों पर रखती हैं। इसी कड़ी में हरियाणा कांग्रेस ने भी अपने विधायकों को राज्य से बाहर भेजने का फैसला किया। इसके लिए हिमाचल प्रदेश के शांत और सुरक्षित इलाकों को चुना गया, जहां बाहरी दखल कम हो और विधायकों पर किसी तरह का दबाव न बन सके।

विधायकों को मुख्य रूप से Kufri, Galu और Chail जैसे पर्यटन स्थलों पर ठहराया गया। ये स्थान अपनी खूबसूरती के साथ-साथ हाई-प्रोफाइल होटलों के लिए भी जाने जाते हैं, जहां सुरक्षा और गोपनीयता दोनों सुनिश्चित की जा सकती हैं।

रहने की व्यवस्था के लिए Radisson Kufri और Twin Towers Galu जैसे प्रीमियम होटलों का चयन किया गया। यहां विधायकों के ठहरने के साथ-साथ उनके खानपान और आराम का विशेष ध्यान रखा गया। इसके अलावा, खाने की व्यवस्था भी अलग-अलग शानदार होटलों में की गई। शनिवार को दोपहर का भोजन ITC Tavleen Chail में आयोजित किया गया, जबकि रविवार को लंच Wildflower Hall में रखा गया।

इस पूरी बाड़ेबंदी में केवल विधायक ही नहीं, बल्कि सांसद, प्रदेश प्रभारी, पार्टी अध्यक्ष, सहयोगी स्टाफ और सुरक्षा कर्मी भी शामिल रहे। कुल मिलाकर करीब 60 लोगों का यह पूरा समूह इन होटलों में ठहरा हुआ था। इतने बड़े स्तर पर व्यवस्था करने के लिए होटल बुकिंग, सुरक्षा, ट्रांसपोर्ट और अन्य सुविधाओं पर भारी खर्च हुआ, जो लगभग 30 लाख रुपये तक पहुंच गया।

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, इस तरह की बाड़ेबंदी का मकसद केवल विधायकों को सुरक्षित रखना नहीं होता, बल्कि उन्हें एकजुट बनाए रखना भी होता है। जब सभी विधायक एक साथ रहते हैं, तो पार्टी नेतृत्व के लिए संवाद आसान हो जाता है और किसी भी तरह की असहमति को तुरंत सुलझाया जा सकता है।

हालांकि, इस पूरे मामले ने एक बार फिर “रिसॉर्ट पॉलिटिक्स” को लेकर बहस छेड़ दी है। विपक्षी दल और आलोचक इसे फिजूलखर्ची और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हैं। उनका कहना है कि जनता के प्रतिनिधियों को इस तरह होटलों में बंद करके रखना सही परंपरा नहीं है। वहीं, कांग्रेस और उसके समर्थक इसे मौजूदा राजनीतिक हालात में जरूरी रणनीति बता रहे हैं, जहां हर एक वोट का महत्व होता है।

हिमाचल प्रदेश को चुनने के पीछे भी कई व्यावहारिक कारण रहे। यह हरियाणा के नजदीक है, जिससे यात्रा आसान हो जाती है। साथ ही, यहां के हिल स्टेशन शांत और भीड़भाड़ से दूर होते हैं, जहां विधायकों को आराम के साथ सुरक्षित माहौल मिल सकता है। इसके अलावा, यहां के होटल उच्च स्तर की सेवाएं और गोपनीयता प्रदान करते हैं, जो इस तरह की रणनीति के लिए जरूरी मानी जाती है।

कुल मिलाकर, हरियाणा कांग्रेस की यह बाड़ेबंदी सिर्फ एक चुनावी कदम नहीं, बल्कि आज की राजनीति की बदलती तस्वीर को भी दर्शाती है। चुनाव जीतने के लिए अब केवल जनसमर्थन ही नहीं, बल्कि रणनीति, प्रबंधन और संसाधनों का सही इस्तेमाल भी उतना ही जरूरी हो गया है। हिमाचल की वादियों में बना यह सियासी ‘कैंप’ आने वाले समय में भी चर्चा का विषय बना रहेगा।

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