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क्रिकेटर रिंकू सिंह पर टूटा दुखों का पहाड़: पिता खानचंद सिंह का निधन, संघर्षों से भरी कहानी फिर आई याद

भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे रिंकू सिंह के परिवार में गहरा शोक छा गया है। उनके पिता खानचंद सिंह का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे पिछले कई दिनों से ग्रेटर नोएडा स्थित यथार्थ अस्पताल में भर्ती थे, जहां उनका इलाज चल रहा था। डॉक्टरों के अनुसार वे स्टेज-4 लिवर कैंसर से जूझ रहे थे और उनकी हालत लगातार गंभीर बनी हुई थी। देर रात उन्होंने अस्पताल में अंतिम सांस ली, जिसके बाद परिवार और क्रिकेट जगत में शोक की लहर दौड़ गई।

बीमारी से लंबी जंग के बाद हुआ निधन

परिजनों के अनुसार खानचंद सिंह को कुछ समय पहले ही गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच में सामने आया कि उन्हें लिवर कैंसर का अंतिम चरण है। डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन बीमारी बहुत आगे बढ़ चुकी थी। पिछले तीन दिनों से उनकी स्थिति अत्यंत नाजुक बनी हुई थी और अंततः उन्होंने दम तोड़ दिया।

पिता की हालत की खबर मिलते ही रिंकू सिंह टूर्नामेंट के बीच ही उनसे मिलने भारत लौट आए थे। हालांकि टीम की जिम्मेदारी को देखते हुए वे बाद में फिर से टीम के साथ जुड़ गए थे। अब पिता के निधन की सूचना मिलने के बाद वे दोबारा घर लौट रहे हैं। उनके आगे टूर्नामेंट में खेलने को लेकर फिलहाल अनिश्चितता बनी हुई है।

संघर्षों से भरा रहा परिवार का जीवन

रिंकू सिंह की सफलता के पीछे उनके पिता का संघर्ष और त्याग अहम भूमिका निभाता है। खानचंद सिंह उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक गैस एजेंसी में सिलेंडर वितरण का काम करते थे। सीमित आय और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने कभी अपने बेटे के क्रिकेट के सपनों को छोटा नहीं होने दिया।

बताया जाता है कि रिंकू के शुरुआती दिनों में परिवार की हालत बेहद कमजोर थी। कई बार घर चलाना भी मुश्किल हो जाता था। ऐसे में रिंकू ने भी अपने पिता के साथ सिलेंडर ढोने और वितरण करने में हाथ बंटाया। मैदान पर पसीना बहाने के साथ-साथ वे जीवन की कठोर सच्चाइयों से भी जूझते रहे।

रिंकू सिंह ने कई इंटरव्यू में यह स्वीकार किया है कि अगर उनके पिता का समर्थन नहीं होता, तो शायद वे क्रिकेट में इतनी दूर तक नहीं पहुंच पाते। पिता ने हमेशा उन्हें मेहनत करने, अनुशासन में रहने और हार न मानने की सीख दी।

सफलता के बाद भी नहीं छोड़ा काम

रिंकू के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने के बाद भी खानचंद सिंह ने अपना काम नहीं छोड़ा। वे पहले की तरह ही गैस एजेंसी में काम करते रहे। परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि वे सादगी पसंद इंसान थे और बेटे की सफलता के बावजूद जमीन से जुड़े रहे।

वे अक्सर कहा करते थे कि मेहनत करने वाला इंसान ही असली जीत हासिल करता है। यही सोच उन्होंने अपने बेटे में भी डाली। शायद यही वजह है कि रिंकू सिंह आज भी अपनी जड़ों को नहीं भूले और अपने संघर्षों को अपनी ताकत मानते हैं।

क्रिकेट करियर में पिता का योगदान

रिंकू सिंह का क्रिकेट सफर आसान नहीं रहा। छोटे शहर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। उनके पिता ने आर्थिक तंगी के बावजूद उन्हें क्रिकेट किट दिलाई, टूर्नामेंट खेलने भेजा और हर मोड़ पर हौसला बढ़ाया।

जब रिंकू चयन में असफल होते थे, तो पिता ही उन्हें फिर से मैदान पर लौटने के लिए प्रेरित करते थे। उन्होंने कभी बेटे को हार मानने नहीं दी। यही कारण है कि जब रिंकू ने भारतीय टीम में जगह बनाई, तो सबसे ज्यादा खुशी उनके पिता को ही हुई थी।

रिंकू की विस्फोटक बल्लेबाजी और दबाव में मैच जिताने की क्षमता ने उन्हें भारतीय क्रिकेट में अलग पहचान दिलाई। उनकी सफलता की कहानी अक्सर युवाओं के लिए प्रेरणा के रूप में सुनाई जाती है।

क्रिकेट जगत में शोक की लहर

पिता के निधन की खबर सामने आते ही क्रिकेट जगत के कई खिलाड़ियों और प्रशंसकों ने शोक व्यक्त किया है। सोशल मीडिया पर लोग रिंकू सिंह के प्रति संवेदना जता रहे हैं और उनके परिवार के प्रति सहानुभूति प्रकट कर रहे हैं।

खेल विशेषज्ञों का कहना है कि यह समय रिंकू के लिए बेहद कठिन है, क्योंकि वे अपने करियर के अहम दौर में हैं और निजी जीवन में इस तरह का बड़ा आघात झेलना आसान नहीं होता। फिर भी उन्हें उम्मीद है कि वे इस दुख से उबरकर और मजबूत होकर वापसी करेंगे।

परिवार के लिए बड़ा सदमा

परिवार के सदस्यों का कहना है कि खानचंद सिंह घर के स्तंभ थे। उनके जाने से परिवार को गहरा सदमा लगा है। रिश्तेदार और स्थानीय लोग लगातार घर पहुंचकर श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

बताया जा रहा है कि अंतिम संस्कार अलीगढ़ में ही किया जाएगा, जहां परिवार के सदस्य और रिश्तेदार मौजूद रहेंगे। क्रिकेट प्रशंसकों को भी उम्मीद है कि रिंकू सिंह अपने पिता को अंतिम विदाई देने के बाद जल्द ही मजबूत होकर मैदान पर लौटेंगे।

प्रेरणा बन गई एक पिता की कहानी

रिंकू सिंह की कहानी केवल एक क्रिकेटर की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि एक पिता के त्याग और संघर्ष की भी कहानी है। खानचंद सिंह ने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने बेटे को सपने देखने और उन्हें पूरा करने की ताकत दी।

आज जब वे इस दुनिया में नहीं हैं, तब भी उनका संघर्ष और सीख रिंकू सिंह के साथ हमेशा रहेगी। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि किसी खिलाड़ी की सफलता के पीछे परिवार की मेहनत और बलिदान कितना बड़ा होता है।

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