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ढाई साल बाद शिकंजा: 10 लाख का इनामी ड्रग सप्लायर गुरुग्राम से दबोचा, बिहार से हरियाणा तक फैला था चरस नेटवर्क

हरियाणा में नशा तस्करी के एक पुराने मामले में बड़ी सफलता हाथ लगी है। स्टेट नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की टीम ने करीब ढाई साल से फरार चल रहे 10 लाख रुपये के इनामी आरोपी को आखिरकार गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान बिहार के गोपालगंज निवासी मनोज उर्फ भुटेली के रूप में हुई है, जिसे पुलिस ने गुरुग्राम से दबोचा।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह गिरफ्तारी सिर्फ एक आरोपी की पकड़ नहीं, बल्कि एक ऐसे नेटवर्क की कड़ी है जो बिहार से हरियाणा तक नशे की सप्लाई करता था। मनोज पर आरोप है कि उसने वर्ष 2023 में भारी मात्रा में चरस हरियाणा भेजी थी, जिसका खुलासा उसी समय पकड़े गए दो तस्करों से पूछताछ में हुआ था।

दरअसल मई 2023 में पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि बिहार से आया एक व्यक्ति भारी मात्रा में नशीला पदार्थ लेकर हरियाणा के जींद जिले में सौदा करने वाला है। सूचना मिलते ही पुलिस ने पुराने बस अड्डे के पास जाल बिछाया और दो संदिग्धों को पकड़ लिया।

ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में जब उनके पीठू बैग की तलाशी ली गई तो उसमें से 8 किलो 100 ग्राम चरस बरामद हुई। उस समय इसकी कीमत करीब आठ लाख रुपये आंकी गई थी। पकड़े गए लोगों की पहचान राजबीर सिंह और बिहार के गोपालगंज जिले के धर्मेंद्र के रूप में हुई थी।

पूछताछ में दोनों ने खुलासा किया कि इस चरस की सप्लाई बिहार से मनोज उर्फ भुटेली ने कराई थी। उसी समय से पुलिस उसकी तलाश में जुट गई थी, लेकिन वह लगातार ठिकाने बदलकर गिरफ्तारी से बचता रहा।

जांच आगे बढ़ने पर पता चला कि मनोज न सिर्फ सप्लायर था, बल्कि पूरे नेटवर्क का मुख्य कड़ी भी था। वह अलग-अलग राज्यों में संपर्क बनाकर नशे की खेप भिजवाता था। पुलिस को शक है कि उसका संबंध अन्य तस्करी गिरोहों से भी हो सकता है।

लंबे समय तक फरार रहने के बाद आखिरकार पुलिस को उसके ठिकाने की सूचना मिली। स्टेट नारकोटिक्स टीम ने स्पेशल टास्क फोर्स की मदद से उसे गुरुग्राम से गिरफ्तार कर लिया और आगे की कार्रवाई के लिए रोहतक ले जाया गया।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश कर रिमांड मांगा। जांच एजेंसियों का कहना था कि आरोपी के मोबाइल फोन की बरामदगी बेहद जरूरी है, क्योंकि उसी के जरिए वह अपने साथियों से संपर्क में रहता था और नेटवर्क का संचालन करता था।

हालांकि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फिलहाल पुलिस रिमांड देने से इनकार कर दिया। इससे जांच एजेंसियों के सामने नेटवर्क की गहराई तक पहुंचने में थोड़ी मुश्किल आ सकती है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मनोज की गिरफ्तारी से यह साफ हो गया है कि नशा तस्करी के मामले में लंबे समय तक फरार रहने वाले आरोपी भी आखिरकार कानून के शिकंजे से बच नहीं सकते। जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि आरोपी किन-किन लोगों के संपर्क में था और क्या उसने अन्य राज्यों में भी सप्लाई की थी।

सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियां अब उसके बैंक लेन-देन, कॉल डिटेल और पुराने संपर्कों को खंगाल रही हैं, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।

हरियाणा में बढ़ती नशा तस्करी की घटनाओं के बीच यह गिरफ्तारी अहम मानी जा रही है। पुलिस का कहना है कि आने वाले दिनों में इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।

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