देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर जवानों के परिवारों के सम्मान और पुनर्वास को लेकर बिहार सरकार ने एक अहम और संवेदनशील निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि युद्धकाल में शहीद हुए सैनिकों के आश्रितों को उनके गृह प्रखंड में एक एकड़ सरकारी जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। इस फैसले के साथ ही भूमि आवंटन की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए नए दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, यह कदम शहीद परिवारों को स्थायी सहारा देने और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है। उपमुख्यमंत्री सह भूमि राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राज्य सरकार शहीदों के बलिदान को नमन करती है और उनके परिजनों की देखभाल करना अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी मानती है।
कई सुरक्षा बलों को मिलेगा लाभ
इस योजना का लाभ केवल भारतीय सेना के जवानों तक सीमित नहीं है। सरकार ने इसे व्यापक रूप देते हुए कई अन्य सुरक्षा बलों और सहायक इकाइयों को भी इसमें शामिल किया है। बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF), सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF), बिहार मिलिट्री पुलिस, टेरिटोरियल आर्मी, असम राइफल्स, बॉर्डर स्काउट्स, बीआरएफ, लोक सहायक सेवा, एनसीसी और होमगार्ड्स जैसे बलों के वे जवान, जिन्होंने युद्धकाल में शहादत दी है, उनके परिवार भी इस योजना के पात्र होंगे।
सरकार का मानना है कि देश की सुरक्षा में योगदान देने वाले सभी बल समान रूप से सम्मान के अधिकारी हैं, इसलिए योजना का दायरा बढ़ाया गया है।
पात्रता के लिए निर्धारित शर्तें
भूमि आवंटन के लिए कुछ आवश्यक शर्तें तय की गई हैं। संबंधित जवान ने कम से कम छह माह की सेवा की हो और युद्ध के दौरान शहीद हुआ हो। लाभार्थी परिवार का बिहार का स्थायी निवासी होना जरूरी है।
इसके साथ ही ‘सेलर्स, सोल्जर्स और एयरमेन बोर्ड’ की अनुशंसा अनिवार्य होगी। सेवा संतोषजनक होने का प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत करना होगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि आश्रित के पास पहले से निजी आवासीय भूमि है, तो वह इस योजना का लाभ नहीं ले सकेगा।
पांच साल तक नहीं लगेगा कोई लगान
सरकार ने शहीद परिवारों को अतिरिक्त राहत देते हुए यह व्यवस्था की है कि जमीन आवंटित होने के बाद पांच वर्षों तक उनसे किसी प्रकार का वार्षिक लगान नहीं लिया जाएगा। इससे परिवार को आर्थिक रूप से स्थिर होने का समय मिलेगा और वे बिना अतिरिक्त बोझ के नई शुरुआत कर सकेंगे।
डीएम करेंगे भूमि आवंटन
भूमि आवंटन की जिम्मेदारी संबंधित जिले के जिलाधिकारी (डीएम) को सौंपी गई है। यह सुनिश्चित किया गया है कि केवल ग्रामीण क्षेत्रों की विवादमुक्त सरकारी जमीन ही इस योजना के तहत दी जाएगी।
विभाग ने साफ किया है कि भूदान भूमि, कब्रिस्तान, श्मशान घाट, धार्मिक स्थलों अथवा किसी भी न्यायालय में लंबित विवाद से जुड़ी जमीन का आवंटन नहीं किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि भविष्य में शहीद परिवारों को किसी प्रकार की कानूनी या सामाजिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
सम्मान के साथ पुनर्वास की पहल
यह निर्णय केवल आर्थिक सहायता भर नहीं है, बल्कि शहीदों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का प्रतीक है। गृह प्रखंड में जमीन मिलने से परिवार अपने परिचित सामाजिक परिवेश में रह सकेगा, जिससे उन्हें मानसिक और सामाजिक सहयोग भी मिलेगा।
राज्य सरकार का यह कदम इस बात का संदेश देता है कि देश अपने वीर सपूतों के बलिदान को कभी नहीं भूलता। उनके परिवारों को सुरक्षा, सम्मान और स्थायित्व प्रदान करना शासन की प्राथमिकता है।
इस प्रकार बिहार सरकार की यह पहल शहीद परिवारों के पुनर्वास और सम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक प्रयास के रूप में देखी जा रही है।
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