गुरुग्राम के फर्रुखनगर-डाबौदा मुख्य मार्ग को चौड़ा करने के लिए प्रशासन ने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। पांच दिनों तक लगातार चली इस कार्रवाई में करीब 100 अवैध मकान और दुकानें ढहा दी गईं। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम लंबे समय से जाम और अव्यवस्था झेल रही इस सड़क को उसके मूल स्वरूप में लाने के लिए उठाया गया।

यह अभियान नोडल अधिकारी आरएस बाठ की अगुवाई में चलाया गया। फर्रुखनगर नगरपालिका के साथ राजस्व विभाग, पुलिस, अग्निशमन विभाग और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई को अंजाम दिया। पूरे अभियान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई ताकि किसी प्रकार का विरोध या कानून-व्यवस्था की समस्या न हो।
प्रशासन के अनुसार, फर्रुखनगर-डाबौदा मार्ग कागजों में 60 से 65 फीट चौड़ा दर्ज है, लेकिन वर्षों से हुए अवैध कब्जों के कारण सड़क कई स्थानों पर सिमटकर लगभग 30 फीट रह गई थी। कुछ जगहों पर तो 30 से 35 फीट तक अतिक्रमण पाया गया। सड़क की चौड़ाई कम होने से यहां अक्सर भारी जाम लग जाता था और स्थानीय लोगों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ती थी।
करीब डेढ़ किलोमीटर लंबे इस मार्ग के दोनों ओर लोगों ने मकान और दुकानें बनाकर कब्जा जमा लिया था। अधिकारियों का कहना है कि यह अतिक्रमण धीरे-धीरे बढ़ता गया और कई वर्षों से बना हुआ था। स्थिति गंभीर होने पर नगरपालिका ने सड़क की पैमाइश करवाई और अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किए।
नोटिस मिलने के बाद कब्जाधारियों से जमीन के वैध दस्तावेज मांगे गए, लेकिन अधिकांश लोग कागजात पेश नहीं कर सके। इसके बाद प्रशासन ने उन्हें स्वयं निर्माण हटाने का समय दिया। तय समय सीमा पूरी होने पर जब अवैध निर्माण नहीं हटाए गए, तब बुलडोजर की मदद से तोड़फोड़ शुरू की गई।
अभियान के दौरान रोजाना आठ से नौ घंटे तक कार्रवाई चली। तीन बुलडोजरों की मदद से लगातार पांच दिनों तक अवैध ढांचों को गिराया गया। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई गई, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।
कार्रवाई में कुल लगभग 100 अवैध निर्माण ध्वस्त किए गए। इनमें नौ मकान तीन से चार मंजिला थे, जबकि करीब 30 मकान दो मंजिला पाए गए। इसके अलावा कई छोटी-बड़ी दुकानों को भी हटाया गया। अधिकारियों के मुताबिक, सड़क को उसकी मूल चौड़ाई में लाने के लिए यह कार्रवाई अनिवार्य थी।
अभियान के समय फर्रुखनगर नगर पालिका के सचिव राजेश शर्मा, उपमंडल अभियंता योगेश राठी, कनिष्ठ अभियंता प्रदीप और पटवारी योगेश सैनी समेत कई अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। पुलिस बल की तैनाती भी पर्याप्त संख्या में की गई थी, जिससे अभियान बिना किसी बड़े विरोध के पूरा हो सका।
प्रशासन ने बताया कि इस सड़क के चौड़ीकरण और पुनर्निर्माण के लिए लगभग सात करोड़ रुपये का अनुमान तैयार किया गया है। योजना के तहत सड़क को आधुनिक रूप दिया जाएगा। दोनों ओर फुटपाथ बनाए जाएंगे, ताकि पैदल यात्रियों को सुरक्षित मार्ग मिल सके। साथ ही ग्रीन बेल्ट विकसित करने की भी योजना है, जिससे क्षेत्र का सौंदर्य और पर्यावरणीय संतुलन बेहतर होगा।
स्थानीय निवासियों का मानना है कि सड़क चौड़ी होने से इलाके की सबसे बड़ी समस्या—ट्रैफिक जाम—से राहत मिलेगी। रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को भी सुविधा होगी। हालांकि, जिन लोगों के निर्माण टूटे हैं, उनमें से कुछ ने कार्रवाई पर नाराजगी जताई, लेकिन प्रशासन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया कानूनी नियमों के तहत और पूर्व सूचना देकर ही पूरी की गई है।
अधिकारियों ने बताया कि सड़क के पुनर्निर्माण का काम जल्द शुरू किया जाएगा और इसे करीब 10 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। काम पूरा होने के बाद फर्रुखनगर-डाबौदा मार्ग पर यातायात सुगम होने के साथ-साथ क्षेत्र के विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि भविष्य में भी सार्वजनिक जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी निर्माण से पहले वैध अनुमति अवश्य लें, ताकि उन्हें नुकसान और कानूनी कार्रवाई का सामना न करना पड़े।
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