गोरखपुर में एक महिला डॉक्टर के साथ हुई नस्लीय टिप्पणी और कथित यौन उत्पीड़न की घटना ने शहर में महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद डॉक्टर पूरी रात दहशत में रहीं और सुबह हिम्मत जुटाकर अपने साथियों को आपबीती सुनाई। मामला सामने आते ही नेशनल एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स फेडरेशन (नाफोर्ड) सक्रिय हुआ और सोशल मीडिया पर आवाज उठाई। इसके बाद पुलिस हरकत में आई और महज तीन घंटे के भीतर आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया।

बताया जा रहा है कि घटना देर रात की है, जब महिला डॉक्टर के साथ कुछ युवकों ने अभद्र व्यवहार किया और नस्लीय टिप्पणी की। इस घटना से डॉक्टर बुरी तरह सहम गईं और पूरी रात तनाव में रहीं। सुबह होते ही उन्होंने अपने सहकर्मियों को पूरी बात बताई। डॉक्टरों के संगठन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कदम उठाने का फैसला किया।
सोमवार सुबह ठीक 9:54 बजे नाफोर्ड के आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से घटना की जानकारी सार्वजनिक की गई। पोस्ट में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, स्वास्थ्य मंत्री, यूपी पुलिस, एडीजी जोन, डीआईजी रेंज गोरखपुर और गोरखपुर पुलिस को टैग करते हुए त्वरित कार्रवाई की मांग की गई। सोशल मीडिया पर मामला आते ही प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई।
जैसे ही पोस्ट वायरल हुई, पुलिस महकमा सक्रिय हो गया। डीआईजी डॉ. एस. चनप्पा और एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने तत्काल जांच के निर्देश दिए। शुरुआती पड़ताल में जब पुलिस ने एम्स थाने से जानकारी ली तो वहां ऐसी किसी शिकायत के दर्ज होने की पुष्टि नहीं हुई। एम्स प्रशासन ने भी पहले घटना की जानकारी होने से इनकार किया, जिससे स्थिति और उलझ गई।
हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस टीम सीधे एम्स परिसर पहुंची और पीड़ित डॉक्टर से विस्तार से बातचीत की। बातचीत के दौरान डॉक्टर ने पूरी घटना क्रमवार बताया, जिसके बाद पुलिस ने तुरंत मुकदमा दर्ज किया। केस दर्ज होते ही एम्स थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम आरोपितों की तलाश में जुट गई।
जांच के दौरान पुलिस ने डॉक्टर से घटना का सटीक समय और स्थान की जानकारी ली। इसके बाद ओरियन मॉल से लेकर एम्स गेट नंबर दो तक लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। तकनीकी विश्लेषण और फुटेज की मदद से संदिग्ध युवकों की पहचान कर ली गई। पुलिस ने तेजी दिखाते हुए आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए चार अलग-अलग टीमें गठित कीं।
इन टीमों ने संभावित ठिकानों पर दबिश देना शुरू किया। पुलिस की सतर्कता और तकनीकी जांच के चलते महज तीन घंटे के भीतर गोरखपुर और देवरिया में छापेमारी कर तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया। इतनी त्वरित कार्रवाई के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली और मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई।
शाम के समय डीआईजी रेंज और एसएसपी स्वयं एम्स पहुंचे। उन्होंने संस्थान के निदेशक से मुलाकात की और पीड़ित डॉक्टर से भी बात कर उनका हाल जाना। अधिकारियों ने डॉक्टर को सुरक्षा का भरोसा दिलाते हुए कहा कि आरोपितों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
इस घटना ने एक बार फिर शहर में महिला सुरक्षा, खासकर मेडिकल संस्थानों में पढ़ने और काम करने वाली छात्राओं व डॉक्टरों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एम्स जैसे प्रतिष्ठित और संवेदनशील संस्थान के गेट के बाहर इस तरह की घटना होना चिंता का विषय माना जा रहा है। स्थानीय लोगों और मेडिकल समुदाय में भी इसको लेकर नाराजगी देखी गई।
डॉक्टरों के संगठनों का कहना है कि अस्पताल और मेडिकल कॉलेजों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की जानी चाहिए, क्योंकि यहां देर रात तक ड्यूटी करने वाली महिला डॉक्टरों और छात्राओं की आवाजाही रहती है। उन्होंने परिसर के बाहर पुलिस गश्त बढ़ाने, बेहतर लाइटिंग और सीसीटीवी कवरेज मजबूत करने की मांग उठाई है।
पुलिस अधिकारियों ने दावा किया है कि घटना के बाद एम्स और आसपास के क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है। नियमित पेट्रोलिंग के निर्देश दिए गए हैं और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जा रहा है। साथ ही, आरोपितों के आपराधिक इतिहास की भी जांच की जा रही है ताकि आगे की कार्रवाई मजबूत आधार पर की जा सके।
फिलहाल, आरोपित पुलिस हिरासत में हैं और उनसे पूछताछ जारी है। पुलिस का कहना है कि मामले में सभी पहलुओं की गहन जांच की जाएगी और पीड़िता को न्याय दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। वहीं, इस घटना ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि महिला सुरक्षा को लेकर सतर्कता और मजबूत व्यवस्थाओं की कितनी जरूरत है, खासकर उन जगहों पर जहां महिलाएं देर रात तक काम करती हैं।
स्वर्णिम टाईम्स : Swarnim Times आपका अपना इंटरनेट अख़बार !