दिल्ली में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पहलगाम आतंकी हमले और मनी लॉन्ड्रिंग से लिंक होने का डर दिखाकर ठगों ने एक बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट कर लिया और उनसे नौ लाख रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस का अधिकारी बताकर इस वारदात को अंजाम दिया।

दिल्ली पुलिस अधिकारी बनकर किया संपर्क
उत्तर-पश्चिम जिले के बवाना इलाके में रहने वाले 70 वर्षीय कृष्णा कुमार, जो डीटीसी से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं, इस साइबर जालसाजी का शिकार बने। 28 दिसंबर को उनके व्हाट्सएप पर एक अज्ञात नंबर से वॉइस कॉल आई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को दिल्ली पुलिस का इंस्पेक्टर आकाश शर्मा बताया और दिल्ली पुलिस मुख्यालय से बात कराने का दावा किया।
इसके बाद कॉल को आगे बढ़ाकर एक अन्य व्यक्ति से बात कराई गई, जिसने खुद को इंस्पेक्टर प्रेम कुमार गौतम बताया।
आतंकी लिंक और मनी लॉन्ड्रिंग का डर
जालसाजों ने बुजुर्ग को बताया कि उनका मोबाइल नंबर मनी लॉन्ड्रिंग केस में सामने आया है और साथ ही वह पहलगाम आतंकी हमले से भी जुड़ा हुआ पाया गया है। ठगों ने डर पैदा करते हुए कहा कि इस मामले में उन्हें सात साल तक की सजा हो सकती है।
वीडियो कॉल के दौरान आरोपियों ने पीड़ित से आधार कार्ड की जानकारी ली और कहा कि उनके पैसों की “मनी ट्रेल” जांच की जाएगी। साथ ही सख्त हिदायत दी गई कि इस बारे में किसी को कुछ न बताएं।
अरेस्ट वारंट भेजकर बढ़ाया दबाव
29 दिसंबर को ठगों ने फिर से वीडियो कॉल किया और दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट से उनके खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी हो चुका है। वारंट की एक फर्जी कॉपी भी व्हाट्सएप पर भेजी गई, जिससे बुजुर्ग और ज्यादा घबरा गए।
ठगों ने भरोसा जीतने के लिए यह भी कहा कि वे लगातार संपर्क में इसलिए हैं ताकि उन पर कोई आतंकी हमला न हो सके।
एफडी तुड़वाकर खाते में ट्रांसफर कराए पैसे
30 दिसंबर को एक बार फिर वीडियो कॉल कर आरोपियों ने बुजुर्ग से बैंक और पोस्ट ऑफिस में जमा रकम की जानकारी ली। जब उन्हें पता चला कि पोस्ट ऑफिस में 9 लाख रुपये की एफडी है, तो उसे तुरंत तुड़वाकर बताए गए बैंक खाते में ट्रांसफर करने को कहा।
डर और दबाव में आकर कृष्णा कुमार ने ठगों के खाते में पूरी रकम ट्रांसफर कर दी।
ठगी का एहसास होने पर दर्ज कराई शिकायत
बाद में जब उन्हें ठगी का एहसास हुआ, तो उन्होंने बाहरी-उत्तरी जिला साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और अज्ञात आरोपियों की पहचान के लिए जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस की अपील
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि
कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती,
न ही बैंक या एफडी से जुड़ी जानकारी मांगती है।
इस तरह की कॉल आने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।
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