दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में सोमवार रात एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब एक टूरिस्ट बस में अचानक भीषण आग लग गई। यह घटना रात करीब 9:40 बजे की बताई जा रही है। आग की सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विसेज हरकत में आ गई और बिना देरी किए तीन फायर इंजन मौके पर भेजे गए। फायर ब्रिगेड और दिल्ली पुलिस ने तेजी से मोर्चा संभालते हुए आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया। राहत की बात यह रही कि अब तक इस हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है, हालांकि घटना ने एक बार फिर स्लीपर कोच बसों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बस से अचानक धुआं निकलता दिखाई दिया, जिसके कुछ ही पलों बाद आग की लपटें उठने लगीं। इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग सुरक्षित दूरी बनाए रखने लगे। आग लगने के कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल पाया है, लेकिन शुरुआती आशंका शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी की जताई जा रही है। फिलहाल, संबंधित विभाग मामले की गहन जांच में जुटे हुए हैं, ताकि आग लगने के पीछे की असली वजह सामने आ सके।
इस घटना के बाद एक बार फिर देशभर में स्लीपर कोच बसों की सुरक्षा को लेकर चल रही बहस तेज हो गई है। बीते कुछ समय में देश के अलग-अलग हिस्सों से स्लीपर बसों में आग लगने की कई भयावह घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई। इन्हीं घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने हाल ही में स्लीपर कोच बसों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा और सख्त फैसला लिया है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने घोषणा की है कि अब देश में स्लीपर कोच बसों का निर्माण केवल वही कंपनियां कर सकेंगी, जिन्हें केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त होगी। सरकार का मानना है कि बिना उचित मानकों और निगरानी के बनी बसें यात्रियों की जान के लिए खतरा बन रही हैं। इसलिए अब निर्माण से लेकर सड़क पर संचालन तक, हर स्तर पर कड़े नियम लागू किए जाएंगे।
आंकड़े इस फैसले की गंभीरता को साफ तौर पर दिखाते हैं। पिछले छह महीनों में ही स्लीपर कोच बसों में आग लगने की छह बड़ी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें करीब 145 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इन हादसों की जांच रिपोर्ट में यह सामने आया कि कई बसों में न तो पर्याप्त सुरक्षा उपकरण थे और न ही आपात स्थिति से निपटने की कोई ठोस व्यवस्था। बसों की बनावट में भी गंभीर खामियां पाई गईं, जिससे आग लगने की स्थिति में यात्रियों के पास बचने का समय और रास्ता दोनों ही नहीं रह पाते।
इन्हीं कारणों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने न सिर्फ नई स्लीपर बसों के निर्माण पर सख्ती की है, बल्कि सड़कों पर पहले से चल रही मौजूदा स्लीपर बसों के लिए भी सुरक्षा मानकों को अनिवार्य कर दिया है। अब हर स्लीपर बस में आधुनिक सुरक्षा उपकरण लगाए जाना जरूरी होगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में जान-माल का नुकसान कम से कम हो सके।
सरकार द्वारा तय किए गए नए सुरक्षा मानकों के तहत सबसे अहम है आग का पता लगाने वाला सिस्टम (Fire Detection System)। यह सिस्टम बस के अंदर कहीं भी आग लगते ही तुरंत चेतावनी देगा, जिससे ड्राइवर और यात्रियों को समय रहते सतर्क किया जा सके। इसके अलावा हर इमरजेंसी एग्जिट पर हथौड़े के साथ इमरजेंसी गेट होना अनिवार्य किया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर खिड़कियां तोड़कर बाहर निकला जा सके।
इसके साथ ही बसों में इमरजेंसी लाइट्स लगाना भी जरूरी होगा, ताकि अगर आग या हादसे के दौरान बिजली गुल हो जाए, तो अंधेरे में भी यात्रियों को बाहर निकलने का रास्ता साफ दिखाई दे। एक और महत्वपूर्ण प्रावधान है ड्राइवर अलर्ट सिस्टम, जो ड्राइवर को नींद या सुस्ती आने की स्थिति में तुरंत चेतावनी देगा। लंबे रूट्स पर चलने वाली बसों में ड्राइवर की थकान भी कई हादसों की बड़ी वजह मानी जाती रही है।
शालीमार बाग की यह घटना भले ही किसी बड़े नुकसान में न बदली हो, लेकिन इसने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सड़क परिवहन में सुरक्षा को कितनी गंभीरता से लेने की जरूरत है। यात्रियों की जिंदगी सिर्फ किस्मत के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती। जरूरी है कि नियमों का सख्ती से पालन हो और बस ऑपरेटरों को सुरक्षा मानकों से कोई समझौता करने की इजाजत न दी जाए।
फिलहाल, शालीमार बाग में हुई बस आग की घटना की जांच जारी है और प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है। उम्मीद की जा रही है कि जांच के बाद सामने आने वाली सच्चाई भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने में मददगार साबित होगी। साथ ही, सरकार के नए फैसले स्लीपर कोच बसों में सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए एक सुरक्षित भविष्य की ओर बड़ा कदम माने जा रहे हैं।
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