मध्यप्रदेश विधानसभा में गुरुवार को उस वक्त माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के एक बयान पर विपक्ष भड़क उठा। नेता प्रतिपक्ष के लिए बोले गए “औकात में रहो” शब्दों को लेकर कांग्रेस विधायकों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया। स्थिति को संभालने के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद गतिरोध खत्म नहीं हो सका और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

दरअसल, विधानसभा का बजट सत्र चल रहा था और विपक्ष सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की कोशिश कर रहा था। कांग्रेस विधायक भागीरथपुरा मौत कांड और लाड़ली बहना योजना को लेकर सरकार से जवाब मांग रहे थे। विपक्ष के लगातार तीखे सवालों के बीच सदन का माहौल पहले से ही गरम था। इसी दौरान बहस के बीच कैलाश विजयवर्गीय ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार को “औकात में रहो” कह दिया।
मंत्री के इस कथन के साथ ही विपक्षी बेंचों पर बैठे कांग्रेस विधायक भड़क उठे। कई सदस्य अपनी सीटों से उठकर वेल में पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी। उन्होंने इसे विधानसभा की गरिमा के खिलाफ बताते हुए मंत्री से तत्काल माफी की मांग की। करीब 40 मिनट तक सदन में लगातार शोर-शराबा और हंगामा होता रहा, जिससे कार्यवाही प्रभावित हुई।
विवाद बढ़ता देख विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने कई बार सदन को शांत कराने की कोशिश की। उन्होंने विपक्ष से अपनी सीटों पर लौटने और चर्चा जारी रखने की अपील की, लेकिन नाराज विधायक मानने को तैयार नहीं थे। उनका कहना था कि जब तक मंत्री स्पष्ट माफी नहीं मांगते, तब तक विरोध जारी रहेगा।
हंगामे के बीच कैलाश विजयवर्गीय ने अपने बयान पर दुख जताया और कहा कि उनका किसी का अपमान करने का इरादा नहीं था। हालांकि कांग्रेस विधायकों ने इसे अपर्याप्त बताते हुए विरोध जारी रखा। उनका कहना था कि सिर्फ खेद जताना काफी नहीं है, बल्कि सदन में औपचारिक माफी दी जानी चाहिए।
स्थिति को सामान्य करने के लिए उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने भी हस्तक्षेप किया और विपक्ष से शांत रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि सदन की कार्यवाही बाधित करना ठीक नहीं है और सभी को संयम रखना चाहिए। बावजूद इसके, विपक्ष का आक्रोश कम नहीं हुआ।
आखिरकार मुख्यमंत्री मोहन यादव को खुद आगे आना पड़ा। उन्होंने कहा कि यदि मंत्री की ओर से जाने-अनजाने में कोई आपत्तिजनक शब्द निकल गया हो तो वे उसकी तरफ से माफी मांगते हैं। मुख्यमंत्री ने सभी सदस्यों से सदन की गरिमा बनाए रखने और चर्चा को आगे बढ़ाने का आग्रह किया।
इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने भी पूरे घटनाक्रम पर खेद जताया और कहा कि सभी पक्षों को संयमित भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए। लेकिन कांग्रेस विधायक अपने रुख पर कायम रहे और उन्होंने सदन से वॉकआउट कर दिया।
विपक्ष के बाहर जाने और लगातार व्यवधान के चलते अंततः अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर राजनीतिक मर्यादा और विधानसभा की भाषा पर बहस छेड़ दी है।
कांग्रेस का कहना है कि वे इस मुद्दे को यूं ही नहीं छोड़ेंगे और मंत्री से स्पष्ट माफी की मांग जारी रखेंगे। वहीं सत्ता पक्ष का तर्क है कि मंत्री ने खेद जता दिया है और मुख्यमंत्री भी माफी मांग चुके हैं, इसलिए विवाद को अब समाप्त माना जाना चाहिए।
फिलहाल, यह मामला मध्यप्रदेश की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि विपक्ष इस मुद्दे को कितना आगे बढ़ाता है और क्या सदन की कार्यवाही सामान्य ढंग से चल पाती है।
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