दरभंगा। सावन का महीना आते ही एक ओर पावन प्रेम में पगे लोगों का मन-मयूर नाच उठता है. दूसरी ओर भक्ति रस में डूबे श्रद्धालु बाबा भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए व्याकुल हो उठते हैं.वैसे तो पूरे सावन मास में बाबा बैद्यनाथ की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है, पर सावन की पहली सोमवारी पर मंदिरों में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है. इस बार भी भोलेनाथ के कई धाम भक्तों के लिए सजकर तैयार हैं. सावन के शुरू होते ही शिव मंदिरों में कांवड़ियों का तांता लगने लगा है. ज्योतिर्लिंगों पर भक्तों की लंबी-लंबी कतारें देखी जा रही हैं. मंदिरों में भजन-कीर्तन और विशेष पूजा-अर्चना भी शुरू हो चुकी है. कई शहरों में इस मौके पर आने वाले श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या के मद्देनजर मंदिरों में व्यापक तैयारियां की गई।
सावन की पहली सोमवारी को लेकर शहर के तमाम छोटे-बड़े शिवालय सज-धज कर तैयार हैं। मंदिरों की फूलों और बिजली के झालरों से आकर्षक सज्जा की गई। शहर के प्रमुख शिवालयों में भगवान भोले भंडारी का रुद्राभिषेक, पंचामृत स्नान, भव्य श्रृंगार सहित अन्य धार्मिक अनुष्ठान हुए। अनेक मंदिरों ने तो शाम को भजन-कीर्तन का भी प्रबंध किया। पहली सोमवारी को मंदिरों में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के मद्देनजर मंदिर समितियों ने खास तैयारी की ताकि भक्त बिना किसी परेशानी के भगवान शंकर को पूज कर उनकी कृपा के पात्र बन सकें।
शास्त्रों और पुराणों का कहना है कि श्रावण मास भगवान शंकर को अत्यंत प्रिय है। इस माह में शिवार्चना के लिए प्रमुख सामग्री बेलपत्र और धतूरा सहज सुलभ हो जाता है। सच पूछा जाए तो भगवान शिव ही ऐसे देवता हैं, जिनकी पूजा-अर्चना के लिए सामग्री को लेकर किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती। अगर कोई सामग्री उपलब्ध न हो तो जल ही काफी है। भक्ति भाव के साथ जल अर्पित कीजिए और भगवान शिव प्रसन्न। इस मास में आशुतोष भगवान शंकर की पूजा का विशेष महत्व है। सोमवार शंकर का प्रिय दिन है। इसलिए श्रावण सोमवार का और भी विशेष महत्व है। भगवान शंकर का यह व्रत सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला है। इस मास में लघुरुद्र, महारुद्र अथवा अतिरुद्र पाठ करके प्रत्येक सोमवार को शिवजी का व्रत किया जाता है। प्रात: काल गंगा या किसी पवित्र नदी सरोवर या घर पर ही विधिपूर्वक स्नान करने का विधान है। इसके बाद शिव मंदिर जाकर या घर में पार्थिव मूर्ति बना कर यथा विधि से रुद्राभिषेक करना अत्यंत ही फलदायी है। इस व्रत में श्रावण महात्म्य और विष्णु पुराण कथा सुनने का विशेष महत्व है।
यही कारण है कि शहर के के.एम.टैंक,चट्टी चौक, बेंता, अल्लपट्टी, मदारपुर, मि
प्रमुख पूजन सामग्री जैसे बेलपत्र, अकवन का फूल, मदार का फूल, धतूरा का फल व फूल, भांग, गाय का दूध, गंगा जल, शहद, दही, शुद्ध घी, प्रसाद के लिए मिष्ठान,सफेद या पीला चंदन आदि से श्रद्धालुओं ने देवों के देव महादेव की पूजा अर्चना की।शहर से सटे ग्रामीण क्षेत्रों के प्रसिद्ध शिवालयों कुशेश्वरस्थान,विदेश्वरस्थान,
ऐसे करें भगवान शिव को प्रसन्न:-
स्कंदपुराण के अनुसार भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सावन सोमवार के दिन एक समय भोजन करने का प्रण लेना चाहिए। भगवान भोलेनाथ के साथ पार्वती जी की पुष्प, धूप, दीप और गंगा जल से पूजा करें। इसके बाद भगवान शिव को तरह-तरह के नैवेद्य अर्पित करें जैसे दूध, जल, कंद-मूल आदि। सावन के प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव को गंगा जल अवश्य अर्पित करें। रात के समय जमीन पर सोएं।