पंजाब के लुधियाना में आवारा कुत्तों का खतरा एक बार फिर भयावह रूप में सामने आया है। यहां गली में खेल रही तीन साल की मासूम बच्ची पर आवारा कुत्ते ने इतना क्रूर हमला किया कि उसका सिर और चेहरा बुरी तरह जख्मी हो गया। बच्ची की हालत गंभीर बनी हुई है और डॉक्टर उसे बचाने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं।

🟥 खेलते-खेलते बन गया खौफनाक मंजर
रविवार का दिन था और मोहल्ले के बच्चे रोज की तरह घर के बाहर खेल रहे थे। तीन साल की चांदनी भी उन्हीं में शामिल थी। किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले ही पल खेल का मैदान खून से लाल हो जाएगा।
बताया जा रहा है कि अचानक एक आवारा कुत्ता तेजी से बच्ची की ओर दौड़ा और उसे गिराकर सिर और चेहरे पर हमला कर दिया। कुत्ता इतनी बुरी तरह उस पर टूट पड़ा कि वह खुद को बचाने तक की स्थिति में नहीं थी।
चीखें सुनकर आसपास के लोग दौड़े, शोर मचाया और किसी तरह कुत्ते को भगाया। लेकिन तब तक मासूम गंभीर रूप से घायल हो चुकी थी।
🟥 खून से लथपथ बच्ची, सहमे लोग
घटना के बाद का दृश्य देखकर लोगों के रोंगटे खड़े हो गए। बच्ची का चेहरा खून से सना हुआ था और सिर के बाल तक उखड़ चुके थे। परिवार के लोग उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे।
डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची के सिर और चेहरे पर गहरे घाव हैं। कई जगह से मांस अलग हो चुका था और घाव इतने जटिल थे कि उपचार बेहद मुश्किल था।
करीब 35 टांके लगाए गए हैं, लेकिन बच्ची की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है।
🟥 पिता को फोन पर मिली डरावनी खबर
पीड़ित बच्ची के पिता चंदन उस समय काम पर थे। उन्हें पत्नी का रोता हुआ फोन आया, जिसमें बताया गया कि बेटी पर कुत्ते ने हमला कर दिया है।
चंदन ने बताया कि जब वह अस्पताल पहुंचे तो बेटी की हालत देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने कहा कि वह दृश्य जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे।
परिवार का कहना है कि बच्ची अब भी सदमे में है और किसी को पास आने से डर रही है।
🟥 डॉक्टरों ने बताया बेहद गंभीर मामला
अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, हमला बेहद खतरनाक था। घाव गहरे और कई जगह से त्वचा फट चुकी थी।
डॉक्टरों का कहना है कि इलाज लंबा चल सकता है और भविष्य में प्लास्टिक सर्जरी की जरूरत भी पड़ सकती है।
बच्ची को संक्रमण से बचाने के लिए विशेष निगरानी में रखा गया है।
🟥 प्रशासन के खिलाफ लोगों में गुस्सा
घटना के बाद इलाके के लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। उनका कहना है कि आवारा कुत्तों का आतंक लंबे समय से बना हुआ है, लेकिन प्रशासन ने कभी गंभीरता नहीं दिखाई।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद नगर निगम ने कुत्तों को पकड़ने या सुरक्षित स्थान पर भेजने की कोई कार्रवाई नहीं की।
लोगों का कहना है कि अगर समय रहते कदम उठाए जाते, तो यह हादसा नहीं होता।
🟥 शेल्टर होम भेजने की मांग
परिजनों और मोहल्ले के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इलाके में घूम रहे खतरनाक कुत्तों को तुरंत पकड़ा जाए और शहर में बने शेल्टर होम में भेजा जाए।
लोगों का कहना है कि जब तक ठोस कदम नहीं उठाए जाएंगे, तब तक बच्चों का घर से बाहर निकलना सुरक्षित नहीं रहेगा।
🟥 बढ़ता खतरा, डर में जी रहे लोग
इस घटना के बाद पूरे इलाके में डर का माहौल है। माता-पिता अब बच्चों को बाहर खेलने भेजने से डर रहे हैं।
लोगों का कहना है कि शहर में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है और आए दिन हमले की खबरें सामने आती रहती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते जनसंख्या नियंत्रण, टीकाकरण और पुनर्वास जैसी योजनाएं लागू नहीं की गईं, तो यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
🟥 एक मासूम, कई सवाल
यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि शहरों में बढ़ते आवारा पशु संकट की गंभीर चेतावनी भी है।
सवाल यह है कि क्या हर हादसे के बाद ही प्रशासन जागेगा?
क्या बच्चों की सुरक्षा सिर्फ किस्मत पर छोड़ी जाएगी?
और क्या अगली घटना का इंतजार किया जाएगा?
🟥 जिंदगी की जंग लड़ रही चांदनी
फिलहाल छोटी चांदनी अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी की लड़ाई लड़ रही है। परिवार की दुआएं, डॉक्टरों की मेहनत और लोगों की उम्मीदें उसके साथ हैं।
हर गुजरते पल के साथ सब यही दुआ कर रहे हैं कि यह मासूम इस दर्दनाक हादसे से उबर जाए और फिर से मुस्कुरा सके।
लेकिन यह घटना हमेशा याद दिलाती रहेगी कि लापरवाही कभी-कभी कितनी भारी कीमत वसूलती है।
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