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जनकपुरी गड्ढा हादसा—ठेकेदार को अंतरिम राहत, अगली सुनवाई तक गिरफ्तारी पर रोक

दिल्ली के जनकपुरी में खुले गड्ढे में गिरकर 25 वर्षीय युवक की मौत के मामले में अदालत ने आरोपी ठेकेदार को फिलहाल राहत दे दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरलीन सिंह की अदालत ने मंगलवार को सुनवाई के बाद ठेकेदार हिमांशु गुप्ता को अंतरिम जमानत प्रदान करते हुए स्पष्ट किया कि अगली तारीख तक उसके खिलाफ कोई भी दबावपूर्ण या जबरन कार्रवाई नहीं की जाएगी। यह मामला उस दर्दनाक हादसे से जुड़ा है, जिसमें सीवर परियोजना के तहत खोदे गए लगभग 15 फीट गहरे गड्ढे में बाइक गिरने से युवक की जान चली गई थी।

अदालत ने क्या कहा?

अदालत ने अपने आदेश में शर्त रखी कि आरोपी को जांच में पूरा सहयोग करना होगा और तय तारीख व समय पर जांच अधिकारी के समक्ष उपस्थित होना अनिवार्य होगा। न्यायालय ने यह भी कहा कि जब तक अगली सुनवाई नहीं होती, तब तक आरोपी की गिरफ्तारी या किसी भी प्रकार की सख्त कार्रवाई से परहेज किया जाए।

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने सोमवार को हिमांशु गुप्ता के खिलाफ वारंट जारी किया था। इसके बाद उन्होंने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए अंतरिम जमानत की याचिका दायर की थी।

बचाव पक्ष की दलील

सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल को 9 फरवरी को जांच में शामिल होने का नोटिस मिला था, लेकिन खराब स्वास्थ्य के कारण वह उस दिन उपस्थित नहीं हो सके। हालांकि, उन्होंने यह भरोसा दिलाया कि हिमांशु गुप्ता जांच से भाग नहीं रहे हैं और वे पूरी तरह से सहयोग करने के लिए तैयार हैं।

बचाव पक्ष ने अदालत को आश्वस्त किया कि आरोपी 11 फरवरी को सुबह 10 बजे स्वयं जांच अधिकारी के समक्ष पेश होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वे कानून की प्रक्रिया का सम्मान करते हैं।

अभियोजन पक्ष का रुख

अभियोजन पक्ष ने अंतरिम राहत का सीधा विरोध नहीं किया, लेकिन यह जरूर कहा कि मामले की गंभीरता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद संतुलित रुख अपनाते हुए आरोपी को अस्थायी राहत दी और अगली सुनवाई की तारीख 18 फरवरी तय की।

हादसा कैसे हुआ?

यह घटना 5 और 6 फरवरी की दरमियानी रात की है। रोहिणी निवासी 25 वर्षीय कमल ध्यानी, जो एक निजी बैंक में कार्यरत थे, देर रात अपनी ड्यूटी खत्म कर बाइक से घर लौट रहे थे। जनकपुरी इलाके में सीवर परियोजना के तहत सड़क पर एक गहरा गड्ढा खोदा गया था। आरोप है कि गड्ढे के आसपास पर्याप्त बैरिकेडिंग या चेतावनी संकेत नहीं लगाए गए थे।

अंधेरे में बाइक सीधे उस गड्ढे में जा गिरी। कमल को गंभीर चोटें आईं और अगली सुबह तक किसी को हादसे की जानकारी नहीं मिल सकी। जब मामला सामने आया, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। इस घटना ने राजधानी में निर्माण कार्यों के दौरान बरती जाने वाली सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

अब तक की कार्रवाई

इस मामले में अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने उप-ठेकेदार राजेश प्रजापति और 23 वर्षीय मजदूर योगेश को हिरासत में लिया है। दोनों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि उप-ठेकेदार पर हादसे की जानकारी छिपाने और समय पर पुलिस व आपात सेवाओं को सूचना न देने का आरोप है।

वहीं मजदूर योगेश पर न केवल घटना की जानकारी दबाने, बल्कि पीड़ित परिवार को गुमराह करने का भी आरोप लगाया गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि समय पर सूचना दी जाती, तो शायद हालात कुछ अलग हो सकते थे।

इसके अलावा, दिल्ली जल बोर्ड के तीन अधिकारियों को भी निलंबित कर दिया गया है। विभागीय जांच जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि सुरक्षा मानकों में किस स्तर पर लापरवाही हुई।

सुरक्षा मानकों पर सवाल

यह मामला सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि शहरी ढांचे में लापरवाही की बड़ी तस्वीर भी सामने लाता है। राजधानी में अक्सर सड़क खुदाई, सीवर या पाइपलाइन परियोजनाओं के दौरान सुरक्षा इंतजामों की कमी देखने को मिलती है। कई जगहों पर न तो पर्याप्त रोशनी होती है, न ही स्पष्ट चेतावनी संकेत।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी निर्माण या खुदाई कार्य के दौरान बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टिव टेप, चेतावनी बोर्ड और रात में पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था अनिवार्य होनी चाहिए। अगर इन नियमों का सख्ती से पालन हो, तो इस तरह की घटनाओं से बचा जा सकता है।

परिवार की मांग

कमल ध्यानी की मौत के बाद उनके परिवार ने न्याय की मांग की है। परिजनों का कहना है कि यह महज दुर्घटना नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही का परिणाम है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की है।

आगे क्या?

अब सभी की नजर 18 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई पर है। उस दिन अदालत यह देखेगी कि आरोपी ने जांच में कितना सहयोग किया और आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ेगी। वहीं पुलिस भी इस मामले में अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

जनकपुरी हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राजधानी में विकास कार्यों के दौरान आम नागरिकों की सुरक्षा को पर्याप्त महत्व दिया जा रहा है? फिलहाल अदालत से मिली अंतरिम राहत ने आरोपी को कुछ समय के लिए राहत जरूर दी है, लेकिन जांच की दिशा और अंतिम निर्णय आने वाले दिनों में ही साफ होगा।

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