उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले के अमांपुर क्षेत्र में एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत ने पूरे इलाके को सन्न कर दिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि परिवार के मुखिया ने पहले अपनी पत्नी और तीन बच्चों की जान ली और फिर खुद फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। रविवार को जब पोस्टमार्टम के बाद शव गांव पहुंचे तो माहौल चीख-पुकार और मातम से भर गया। अंतिम संस्कार के दौरान ग्रामीणों की आंखें नम थीं और हर कोई इस दर्दनाक घटना से स्तब्ध दिखाई दिया।
कई दिनों तक बंद रहा घर
घटना अमांपुर कस्बे के गुप्ता पेट्रोल पंप के पास स्थित एक मकान की है, जहां 50 वर्षीय सत्यवीर अपने परिवार के साथ रहता था। वह गैस वेल्डिंग का काम करता था और इसी से परिवार का गुजारा चलता था। पड़ोसियों के अनुसार, बीते कुछ दिनों से घर के दरवाजे बंद थे और परिवार के लोग बाहर दिखाई नहीं दे रहे थे। पहले तो लोगों ने इसे सामान्य बात समझा, लेकिन जब काफी समय तक कोई हलचल नहीं हुई तो शक गहराने लगा।
शनिवार शाम करीब साढ़े छह बजे पुलिस को सूचना दी गई कि घर के अंदर कुछ गड़बड़ हो सकती है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। मकान अंदर से बंद था, इसलिए पुलिस को दरवाजा कटवाना पड़ा। फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड की मौजूदगी में जब पुलिस अंदर दाखिल हुई तो वहां का दृश्य बेहद भयावह था।
घर के अंदर बिखरी मिली लाशें
पुलिस को घर के अलग-अलग हिस्सों से पांच शव बरामद हुए। सत्यवीर का शव छत के कुंदे से साड़ी के फंदे पर लटका मिला। उसकी पत्नी रामश्री (40) का शव कमरे में पड़ा था और गले पर धारदार हथियार से वार के निशान मिले। वहीं उनकी तीनों संतानों—प्राची (14), आकांक्षा (13) और गिरीश (10)—के मुंह से झाग निकल रहा था, जिससे जहरीला पदार्थ दिए जाने की आशंका मजबूत हुई।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, बच्चों को पहले विषाक्त पदार्थ खिलाया गया, जिससे उनकी मौत हुई। इसके बाद पत्नी की हत्या की गई और अंत में सत्यवीर ने आत्महत्या कर ली। पुलिस इस पूरे घटनाक्रम को क्रमवार जोड़कर जांच आगे बढ़ा रही है।
आर्थिक दबाव में टूट चुका था परिवार
पुलिस अधिकारियों और स्थानीय लोगों की बातचीत से जो जानकारी सामने आई, उसके मुताबिक सत्यवीर लंबे समय से आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। उसका वेल्डिंग का काम मंदा चल रहा था और घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया था। घर की हालत भी बेहद खराब बताई जा रही है—चूल्हा ठंडा पड़ा था और जरूरी सामान भी कम नजर आया।
कुछ ग्रामीणों ने यह भी बताया कि सत्यवीर का बेटा गिरीश काफी समय से बीमार था। इलाज के खर्च और कमाई में गिरावट ने परिवार की आर्थिक हालत और बिगाड़ दी थी। पुलिस प्रथम दृष्टया आर्थिक तंगी को इस भयावह कदम की मुख्य वजह मान रही है, हालांकि अन्य पहलुओं को भी खंगाला जा रहा है।
तीन दिन पहले हुई थीं मौतें
जांच में यह भी सामने आया है कि परिवार की मौतें पुलिस को सूचना मिलने से करीब तीन दिन पहले हो चुकी थीं। घटना से पहले सत्यवीर ने घर के दरवाजे अंदर से बंद कर लिए थे और एक दरवाजे पर ताला भी लगाया था, जिससे किसी को तुरंत शक न हो। घर बंद रहने और बदबू आने के बाद मामला खुला।
गांव पहुंचते ही फूट पड़ा दर्द
पोस्टमार्टम के बाद रविवार को पांचों शव अमांपुर क्षेत्र के नगला भोजराज गांव लाए गए। शवों के गांव पहुंचते ही माहौल गमगीन हो गया और परिजनों के साथ ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी। शवों को फकौता कंपोजिट विद्यालय के पास आम के बाग में रखा गया, जहां आसपास के कई गांवों से लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे।
मासूम बच्चों के शव देखकर हर कोई भावुक हो उठा। महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल था और पुरुष भी अपनी आंखों के आंसू नहीं रोक सके। पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
बच्चों को दफनाया, दंपति का हुआ अंतिम संस्कार
स्थानीय रीति-रिवाज के अनुसार तीनों बच्चों के शवों को खेत के पास तालाब किनारे जेसीबी से गड्ढा खोदकर दफनाया गया। वहीं सत्यवीर और उसकी पत्नी रामश्री का अंतिम संस्कार विधि-विधान से किया गया। अंतिम यात्रा के दौरान माहौल बेहद शांत और भारी था।
पुलिस हर एंगल से कर रही जांच
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल आर्थिक तंगी मुख्य कारण के रूप में सामने आ रही है, लेकिन अन्य संभावनाओं को भी नजरअंदाज नहीं किया जा रहा। फॉरेंसिक रिपोर्ट और पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी।
यह घटना पूरे क्षेत्र के लिए गहरा सदमा बन गई है। लोग अब भी इस बात पर विश्वास नहीं कर पा रहे कि एक पिता ने ऐसा खौफनाक कदम उठा लिया। फिलहाल गांव में मातमी सन्नाटा पसरा है और हर कोई इस त्रासदी की चर्चा कर रहा है।
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