राजधानी दिल्ली में शहरी सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपना अब तक का सबसे बड़ा बजट पारित कर दिया है। निगम ने संशोधित अनुमान 2025-26 के साथ नए बजट प्रस्तावों को मंजूरी देते हुए शहर की सफाई व्यवस्था, कचरा प्रबंधन, शिक्षा, कर्मचारियों के कल्याण और सामाजिक योजनाओं पर विशेष जोर दिया है।

निगम के अनुसार आगामी वित्तीय वर्ष में कुल 17,583 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जबकि अनुमानित आय 17,184 करोड़ रुपये रहेगी। मौजूदा वर्ष में लगभग 410 करोड़ रुपये की संभावित बचत से इस अंतर को पूरा किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि यह रणनीति वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए विकास कार्यों को जारी रखने में मदद करेगी।
कचरा प्रबंधन पर सबसे बड़ा फोकस
बजट में सबसे अधिक प्राथमिकता शहर की सफाई और कचरा निस्तारण व्यवस्था को दी गई है। निगम नेतृत्व ने घोषणा की है कि वर्ष के अंत तक भलस्वा लैंडफिल और ओखला लैंडफिल को कचरा मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि अगले वर्ष तक गाजीपुर लैंडफिल को भी समाप्त करने की योजना है।
दिल्ली में रोजाना लगभग 12 हजार मीट्रिक टन ठोस कचरा निकलता है, जिसमें से आधा से अधिक कचरा इन लैंडफिल साइटों तक पहुंचता है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए निगम ने नए टेंडर जारी किए हैं और विभिन्न स्थानों पर आधुनिक कचरा प्रसंस्करण मशीनें लगाने की तैयारी की जा रही है। साथ ही लक्ष्य रखा गया है कि प्रतिदिन निकलने वाले कचरे का उसी दिन निपटान सुनिश्चित किया जाए, ताकि नए कूड़े के पहाड़ न बनें।
सफाई व्यवस्था होगी आधुनिक
सड़कों की सफाई को तकनीकी रूप से मजबूत करने के लिए निगम जल्द ही अपने बेड़े में 70 नई मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनें शामिल करेगा। वार्ड स्तर पर पिकर मशीनें और बड़े क्षमता वाले उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। सफाई कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन योजना शुरू की गई है, जिसके तहत चयनित कर्मचारियों को अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
शिक्षा और स्कूल सुविधाओं का विस्तार
एमसीडी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए सुरक्षा और सुविधाओं को बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। छात्रों की बीमा राशि 50 हजार से बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दी गई है। लंबे समय से चल रही फर्नीचर की कमी दूर करने के लिए बड़ी संख्या में डेस्क-कुर्सियां खरीदी जाएंगी। स्कूलों में सुरक्षा गार्ड तैनात करने और साफ-सफाई व्यवस्था मजबूत करने की योजना भी बजट का हिस्सा है।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
बिजली खर्च कम करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए निगम ने अपने भवनों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने का निर्णय लिया है। इस पहल से आने वाले वर्षों में निगम की बिजली लागत घटेगी और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को राहत
बजट में 49 पूर्णतः ग्रामीण घोषित गांवों के 500 वर्ग मीटर तक के पुश्तैनी मकानों को संपत्ति कर से छूट देने का फैसला लिया गया है। शहरीकृत गांवों में भी सीमित क्षेत्रफल तक के मकानों को कर में राहत दी जाएगी। समय पर टैक्स जमा करने वाले समूह आवासीय सोसायटियों को छूट देने का प्रावधान भी किया गया है।
सामाजिक योजनाओं को बढ़ावा
बजट में महिलाओं, दिव्यांगों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए कई योजनाएं शामिल हैं। प्रत्येक वार्ड में जरूरतमंद परिवारों की बेटियों की शादी के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। गरीब महिलाओं को सिलाई मशीनें और दिव्यांग व्यक्तियों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है।
कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य और वेतन लाभ
निगम कर्मचारियों के लिए पहली बार कैशलेस मेडिकल सुविधा लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसके तहत वे पैनल अस्पतालों में इलाज करवा सकेंगे। साथ ही वेतन समानता और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार से कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
युवाओं को रोजगार के अवसर
नगर निगम ने युवाओं के लिए रोजगार सृजन पर भी ध्यान दिया है। नई पार्किंग सुविधाओं के संचालन का अधिकार टेंडर और लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से युवाओं को दिया जाएगा, जिससे उन्हें स्वरोजगार के अवसर मिल सकेंगे।
आरडब्ल्यूए और पार्कों के रखरखाव को मदद
वार्ड स्तर पर आरडब्ल्यूए को वित्तीय सहायता देने तथा पार्कों के रखरखाव के लिए अनुदान बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। महिला पार्कों के विकास के लिए विशेष राशि उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे स्थानीय स्तर पर हरित क्षेत्र बेहतर बन सकें।
राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज
जहां निगम नेतृत्व ने बजट को ऐतिहासिक और जनहितैषी बताया है, वहीं विपक्ष ने इसे कागजी बताते हुए कई वादों को अधूरा बताया। विपक्ष का कहना है कि कूड़े के पहाड़, आवारा पशु समस्या और कर्मचारियों के नियमितीकरण जैसे मुद्दों पर स्पष्ट रोडमैप नहीं है।
संतुलन और चुनौती दोनों
विशेषज्ञों का मानना है कि बजट का आकार बड़ा जरूर है, लेकिन उसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि योजनाओं का क्रियान्वयन कितना प्रभावी होता है। यदि कचरा प्रबंधन, शिक्षा और ऊर्जा योजनाएं तय समय में लागू हो जाती हैं, तो इससे दिल्ली के शहरी जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है।
कुल मिलाकर यह बजट शहर की बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने, सामाजिक सुरक्षा बढ़ाने और निगम की वित्तीय स्थिति को संतुलित रखने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि घोषणाएं जमीन पर कितनी तेजी से उतरती हैं और नागरिकों को इनका लाभ कब तक मिलना शुरू होता है।
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