उत्तर भारत की राजधानी दिल्ली में एक शादी समारोह उस समय खौफनाक वारदात में बदल गया जब ट्रैफिक पुलिस के एक हवलदार ने शक के चलते युवक को गोली मार दी। मृतक की पहचान बागपत निवासी आशीष (25) के रूप में हुई है, जो प्रवर्तन निदेशालय में एमटीएस के पद पर कार्यरत था।

घटना सोमवार तड़के वजीराबाद इलाके की एक वाटिका में हुई, जहां गांव से आई बरात में रातभर जश्न चला। पुलिस के अनुसार आरोपी प्रवेश, जो दिल्ली पुलिस में हवलदार है और फिलहाल भजनपुरा ट्रैफिक सर्किल में तैनात था, अपने भाई संदीप और रिश्तेदारों के साथ समारोह में शामिल हुआ था।
बताया जा रहा है कि आरोपी को लंबे समय से शक था कि मृतक आशीष की उसकी पत्नी से नजदीकियां हैं। इसी शक के चलते दोनों के बीच पहले भी कई बार विवाद हो चुका था। करीब तीन-चार महीने पहले भी मामला इतना बढ़ गया था कि दोनों परिवारों को बीच-बचाव करना पड़ा।
बरात खत्म होने के बाद जब लोग वापसी की तैयारी कर रहे थे, तभी आरोपी प्रवेश ने आशीष से गाली-गलौज शुरू कर दी। चश्मदीदों के मुताबिक पहले उसने पिस्टल की बट से युवक को पीटा, फिर सीने में गोली मार दी। गोली चलते ही समारोह में भगदड़ मच गई और लोग जान बचाकर भागने लगे।
आशीष को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां से ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पुलिस ने मृतक के भाई के बयान पर हत्या का केस दर्ज कर आरोपी प्रवेश, उसके भाई संदीप और रिश्तेदार विपिन को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक आरोपी अभी फरार बताया जा रहा है। वारदात में इस्तेमाल लाइसेंसी पिस्टल भी बरामद कर ली गई है।
मृतक का परिवार मूल रूप से बागपत के काठा गांव का रहने वाला है। उसके पिता यूपी पुलिस से रिटायर्ड हैं। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। परिजनों का आरोप है कि झूठे शक ने एक बेटे की जान ले ली और दो परिवारों की जिंदगी बर्बाद कर दी।
पुलिस अब मौके के सीसीटीवी फुटेज और वीडियो खंगाल रही है। अधिकारियों का कहना है कि घटना में शामिल सभी लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
यह वारदात एक बार फिर दिखाती है कि शक और गुस्सा जब हथियार से जुड़ जाते हैं तो एक पल में खुशियां खून में बदल जाती हैं।
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