राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान उस समय हड़कंप मच गया जब हाई-सिक्योरिटी जोन से एक स्टार्टअप के महंगे एआई फिटनेस वियरेबल डिवाइस चोरी होने की खबर सामने आई। यह घटना उस वक्त हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मेलन का उद्घाटन करने कार्यक्रम स्थल पहुंचे थे और पूरे परिसर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू थी। सुरक्षा के बीच हुई इस चोरी ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह अंतरराष्ट्रीय स्तर का आयोजन राजधानी के प्रमुख प्रदर्शनी स्थल भारत मंडपम में चल रहा है, जो प्रगति मैदान परिसर में स्थित है। यहां देश-विदेश से आए तकनीकी विशेषज्ञ, स्टार्टअप संस्थापक और निवेशक भाग ले रहे हैं। ऐसे महत्वपूर्ण आयोजन में चोरी की घटना सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और जांच तेज कर दी गई है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार बेंगलुरु स्थित एक टेक स्टार्टअप के संस्थापक ने शिकायत दर्ज कराई है कि उनके स्टॉल से एआई आधारित वियरेबल डिवाइस गायब हो गए। बताया गया कि यह डिवाइस बातचीत को रिकॉर्ड करने, भावनात्मक विश्लेषण करने और फिटनेस पैटर्न ट्रैक करने जैसी उन्नत क्षमताओं से लैस थे, जिनकी बाजार में काफी कीमत है।
स्टार्टअप के सीईओ और सह-संस्थापक धनंजय यादव ने आरोप लगाया कि जिस समय उनके उत्पाद गायब हुए, उस वक्त एक्सपो क्षेत्र में आम लोगों की आवाजाही बंद थी और केवल सुरक्षाकर्मियों को ही प्रवेश की अनुमति थी। उन्होंने कहा कि जब अधिकारियों ने स्टॉल खाली कराने को कहा, तब उन्होंने पूछा था कि क्या उपकरण साथ ले जाएं, लेकिन उन्हें बताया गया कि अन्य प्रदर्शक भी अपने उपकरण वहीं छोड़ रहे हैं और सुरक्षा टीम उनका ध्यान रखेगी। बाद में जब वे लौटे तो डिवाइस गायब मिले।
घटना के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की और कहा कि सम्मेलन का पहला दिन उनके लिए निराशाजनक रहा। उनका मानना है कि सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी के कारण यह घटना संभव हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पूरा क्षेत्र हाई-सिक्योरिटी जोन घोषित था, तब ऐसी चोरी कैसे हो सकती है।
मामले की सूचना मिलने पर दिल्ली पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तिलक मार्ग थाने में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस उपायुक्त देवेश कुमार महला ने बताया कि शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है और घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य तकनीकी साक्ष्य खंगाले जा रहे हैं। पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों की पुष्टि की जा रही है और जल्द ही स्थिति स्पष्ट होगी।
इस घटना के अलावा सम्मेलन के पहले दिन व्यवस्थाओं को लेकर भी कई शिकायतें सामने आईं। प्रतिभागियों ने बताया कि परिसर में इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर थी, यूपीआई भुगतान में समस्या आ रही थी और प्रवेश द्वारों पर लंबी कतारें लग गई थीं। कई लोगों ने यह भी कहा कि दिशा-निर्देशों के लिए लगाए गए संकेतक स्पष्ट नहीं थे, जिससे लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में कठिनाई हुई। वीआईपी मूवमेंट के दौरान आम प्रतिभागियों को अचानक रोकने या हटाने की शिकायतें भी मिलीं।
इन शिकायतों पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आयोजन के पहले दिन हुई अव्यवस्थाओं के लिए खेद व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उम्मीद से कहीं ज्यादा संख्या में लोगों की उपस्थिति दर्ज हुई, जिससे शुरुआती व्यवस्थाओं पर दबाव पड़ा। मंत्री ने आश्वासन दिया कि आने वाले दिनों में व्यवस्थाओं को बेहतर किया जाएगा और प्रतिभागियों को सुगम अनुभव देने के लिए अतिरिक्त कदम उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि एआई क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका को देखते हुए यह सम्मेलन बेहद महत्वपूर्ण है और सरकार चाहती है कि प्रतिभागियों को सकारात्मक अनुभव मिले। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि नेटवर्क, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को प्राथमिकता के आधार पर सुधारा जाए।
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन में सुरक्षा और प्रबंधन दोनों का संतुलन जरूरी होता है। जहां एक ओर वीआईपी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है, वहीं प्रतिभागियों की सुविधाओं और प्रदर्शकों की संपत्ति की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। इस घटना ने आयोजकों को सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा करने के लिए मजबूर कर दिया है।
फिलहाल पुलिस और आयोजक दोनों ही इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। जांच के नतीजे आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि चोरी किस तरह हुई और इसमें लापरवाही किस स्तर पर रही
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