हरियाणा में सरकारी खातों से जुड़े करीब 590 करोड़ रुपये के कथित बैंक घोटाले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने इस मामले के मुख्य आरोपित रिभव ऋषि और अभय को आमने-सामने बैठाकर लंबी पूछताछ की है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे पूरे नेटवर्क की गुत्थी सुलझाने में मदद मिल सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, एसीबी के डीएसपी शुक्रपाल की निगरानी में दोनों आरोपियों से कई चरणों में पूछताछ की गई। कुछ सवालों पर दोनों के बयान एक-दूसरे से मेल खाते पाए गए, लेकिन कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विरोधाभास भी सामने आया। जांच एजेंसी अब इन्हीं विरोधाभासों को आधार बनाकर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ रही है। अधिकारियों को शक है कि घोटाला बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया।
नौकरी छोड़ने से पहले बनाई गई रणनीति
जांच में यह संकेत मिले हैं कि आरोपियों ने कथित तौर पर घोटाले से महीनों पहले ही अपनी नौकरी छोड़ दी थी। एसीबी को संदेह है कि यह कदम पहले से बनाई गई रणनीति का हिस्सा था। इसी दौरान ‘स्वास्तिक देश’ नाम की कंपनी खड़ी की गई, जिसे बाद में संदिग्ध लेन-देन के लिए इस्तेमाल किया गया।
दस्तावेजों के अनुसार, कंपनी की डायरेक्टर अभय की पत्नी स्वाति को बनाया गया, जबकि अभिषेक को इसमें 25 प्रतिशत हिस्सेदारी दी गई। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि कंपनी की संरचना इस तरह क्यों तैयार की गई और क्या इसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर धन ट्रांसफर को छिपाना था।
सरकारी खातों में संदिग्ध गतिविधियां
प्रारंभिक जांच के दौरान हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम, पंचकूला से जुड़े खातों में कई संदिग्ध ट्रांजैक्शन पाए गए हैं। कई भुगतान ऐसे मिले हैं जिनका पूरा ब्योरा उपलब्ध नहीं है। इससे एजेंसियों को शक है कि सरकारी धन को योजनाबद्ध तरीके से दूसरी जगह भेजा गया।
जांच में सामने आया है कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32, चंडीगढ़ शाखा और एयू स्माल फाइनेंस बैंक के माध्यम से बड़ी रकम ‘स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट’ नाम की फर्म में ट्रांसफर की गई। एसीबी ने यह भी कहा है कि कुछ मामलों में बैंकों की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला, जिससे जांच प्रभावित हुई है।
बैंक अधिकारियों पर भी शिकंजा
जांच एजेंसियों को शुरुआती स्तर पर बैंक अधिकारियों की कथित लापरवाही या संभावित मिलीभगत के संकेत मिले हैं। इसी आधार पर पुलिस ने दोनों बैंकों के अज्ञात अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि नियमों में चूक कैसे हुई और क्या इसमें किसी की जानबूझकर भूमिका थी।
एसीबी ने बैंकों को नोटिस जारी कर सभी संबंधित रिकॉर्ड और ट्रांजैक्शन विवरण उपलब्ध कराने को कहा है। बताया जा रहा है कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से कुछ दस्तावेज मिल चुके हैं, जबकि एयू स्माल फाइनेंस बैंक से पूरा सहयोग अभी तक नहीं मिला है।
‘स्वास्तिक देश’ फर्म पर फोकस
पूरे घोटाले की जांच का केंद्र ‘स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट’ फर्म बन गई है। उपलब्ध दस्तावेजों से संकेत मिलते हैं कि सरकारी खातों से निकली बड़ी राशि इसी फर्म में पहुंची। एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पैसे का अंतिम उपयोग कहां-कहां हुआ।
सूत्रों के अनुसार, इसी फर्म के जरिए करीब 300 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ। यह रकम ज्वेलर्स, बिल्डर्स, शेयर बाजार और शराब कारोबार से जुड़े लोगों तक पहुंचाई गई बताई जा रही है। जांच एजेंसियां इन सभी कड़ियों की पड़ताल कर रही हैं और जरूरत पड़ने पर संबंधित कारोबारियों से पूछताछ भी हो सकती है।
रियल एस्टेट में निवेश का खुलासा
एसीबी सूत्रों का दावा है कि पूछताछ के दौरान आरोपियों ने माना है कि घोटाले की रकम का एक हिस्सा रियल एस्टेट में लगाया गया। माना जा रहा है कि संपत्ति के बढ़ते दामों से फायदा उठाकर कथित अवैध धन को वैध बनाने की कोशिश की गई।
अब एजेंसियां उन संपत्तियों की पहचान कर रही हैं, जहां यह पैसा लगाया गया हो सकता है। जमीन, फ्लैट और अन्य निवेश से जुड़े दस्तावेज जुटाए जा रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि जांच आगे बढ़ने पर कुछ संपत्तियों को अटैच या जब्त भी किया जा सकता है।
नगर निगम चंडीगढ़ में भी गड़बड़ी की आशंका
इस मामले में नगर निगम चंडीगढ़ का नाम भी सामने आने लगा है। जानकारी के अनुसार, स्मार्ट सिटी मिशन के तहत मिलने वाली ग्रांट पहले आईडीएफसी और एयू स्माल फाइनेंस बैंक में जमा होती थी और बाद में नगर निगम को ट्रांसफर की गई।
जब बैंक घोटाले की जांच शुरू हुई तो नगर निगम अधिकारियों ने अपने खातों का मिलान किया। इस प्रक्रिया में करीब 116 करोड़ रुपये के फंड में गड़बड़ी की आशंका सामने आई है। हालांकि, इस हिस्से की जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।
अकाउंटेंट के लापता होने से बढ़ा संदेह
नगर निगम की वित्तीय शाखा में कार्यरत एक अकाउंटेंट के संपर्क से बाहर होने की खबर ने मामले को और गंभीर बना दिया है। बताया जा रहा है कि उसका फोन भी बंद है। इस बीच निगम के अधिकारी खुलकर कुछ भी कहने से बच रहे हैं और अकाउंट शाखा के कर्मचारियों को मीडिया से दूरी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
जांच जारी, और खुलासों की उम्मीद
फिलहाल एसीबी, पुलिस और सतर्कता एजेंसियां बैंक खातों, ट्रांजैक्शन पैटर्न और जुड़े लोगों की भूमिका की बारीकी से जांच कर रही हैं। जिस तरह से नए तथ्य सामने आ रहे हैं, उससे माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस घोटाले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
यह मामला सरकारी धन की सुरक्षा, बैंकिंग निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही—तीनों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जांच एजेंसियों का कहना है कि दोषियों की भूमिका स्पष्ट होते ही कड़ी कार्रवाई की जाएगी और कथित तौर पर हेरफेर की गई रकम की रिकवरी भी प्राथमिकता में रहेगी।
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