गोरखपुर के सिंघड़िया चौराहे पर हुई फायरिंग की घटना के बाद गिरफ्तार की गई युवती अंशिका को लेकर रोज नए-नए खुलासे हो रहे हैं। सोशल मीडिया की चकाचौंध, महंगे शौक और दिखावे की जिंदगी ने उसे ऐसे रास्ते पर ला खड़ा किया, जहां से वापस लौटना आसान नहीं था। पहली नजर में ग्लैमरस और बेफिक्र दिखने वाली अंशिका दरअसल एक शातिर खेल खेल रही थी, जिसमें उसने आम लोगों के साथ-साथ खाकी वर्दी पहनने वालों को भी अपने जाल में फंसा लिया था।

पुलिस सूत्रों के अनुसार अंशिका की गतिविधियों पर लंबे समय से नजर रखी जा रही थी। वह सोशल मीडिया के जरिए पहले दोस्ती का दायरा बढ़ाती, फिर व्यक्तिगत मुलाकातों और नजदीकियों के सहारे लोगों को अपने प्रभाव में ले लेती थी। इसके बाद झूठे आरोप, भावनात्मक दबाव और ब्लैकमेलिंग जैसे हथकंडे अपनाकर उनसे पैसे वसूलती थी। चौंकाने वाली बात यह है कि उसके इस जाल में एक थाना प्रभारी समेत आठ पुलिसकर्मी भी फंस चुके थे। मामला उजागर होने के डर से कुछ पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर उसे रुपये देकर अपनी गर्दन बचाई।
अंशिका मूल रूप से हरपुर-बुदहट क्षेत्र की रहने वाली बताई जा रही है। शुरुआती दिनों में उसका परिवार उसके साथ था, लेकिन जैसे-जैसे उसका रहन-सहन बदला, महंगे कपड़े, नए-नए मोबाइल और दोस्तों के साथ घूमने-फिरने का शौक बढ़ा, वैसे-वैसे परिवार ने उससे दूरी बना ली। वह घर से अलग रहने लगी और सोशल मीडिया की दुनिया में पूरी तरह रम गई। इंस्टाग्राम पर उसके करीब साढ़े सात हजार फॉलोअर्स हैं और उसने 700 से अधिक रील्स पोस्ट की हैं। इन्हीं रील्स और पोस्ट्स के जरिए उसने खुद की एक ऐसी छवि बनाई, जिसने कई लोगों को आकर्षित किया।
पुलिस के मुताबिक अंशिका ने कुछ पुलिसकर्मियों के साथ फोटो भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किए थे, जिन्हें वह “भाई” बताकर प्रचारित करती थी। इन तस्वीरों और रील्स ने उसके प्रभाव को और बढ़ाया। लोग उसे प्रभावशाली संपर्कों वाली युवती समझने लगे। इसी भरोसे और भ्रम का फायदा उठाकर वह अपने शिकार चुनती थी।
हालांकि अंशिका का आपराधिक इतिहास यहीं तक सीमित नहीं है। उसके और उसके साथियों के खिलाफ 12 अक्तूबर 2025 को थार जीप चोरी का मामला दर्ज हुआ था। आरोप था कि दिल्ली से किराए पर ली गई थार गाड़ी को वापस न करके आरोपी उसे लेकर फरार हो गए और पकड़े जाने के डर से उस पर फर्जी नंबर प्लेट लगा दी। जांच के दौरान गाड़ी से चार फर्जी नंबर प्लेट बरामद की गईं, जिनमें हरियाणा, बिहार और गोरखपुर की प्लेट शामिल थीं। इस मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अंशिका अंडरग्राउंड हो गई थी और पुलिस उसकी तलाश में जुटी थी।
मंगलवार की देर शाम सिंघड़िया चौराहे पर हुई फायरिंग की घटना ने आखिरकार पुलिस को अंशिका तक पहुंचा दिया। बताया जा रहा है कि वह अपने साथियों के साथ एक मॉडल शॉप पर शराब खरीदने के लिए रुकी थी, जहां किसी बात को लेकर विवाद हो गया। इसी दौरान गोली चलने से अमिताभ नामक युवक घायल हो गया। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया और पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए अंशिका को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद जब उससे पूछताछ शुरू हुई तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पुलिस को उसके पास से आपराधिक गतिविधियों से जुड़े अहम साक्ष्य मिले हैं। यह भी जांच की जा रही है कि उसके पास पिस्टल कहां से आई और फायरिंग की पूरी साजिश क्या थी। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि उसने अब तक किन-किन लोगों को ब्लैकमेल किया और कितनी रकम वसूली।
इस पूरे मामले ने पुलिस महकमे को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कैसे कुछ पुलिसकर्मी एक युवती के दबाव में आ गए और उन्होंने कानून के बजाय अपने हितों को प्राथमिकता दी। सूत्रों की मानें तो अंशिका के संपर्क में रहे कई पुलिसकर्मियों को पहले ही लाइन हाजिर किया जा चुका है और विभागीय जांच चल रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अंशिका की गिरफ्तारी के बाद उसके पुराने संपर्कों, सोशल मीडिया गतिविधियों और आर्थिक लेन-देन की गहन जांच की जा रही है। यह भी देखा जा रहा है कि उसके साथ और कौन-कौन लोग इस नेटवर्क का हिस्सा थे। अंशिका समेत चार आरोपियों पर हत्या की कोशिश का मुकदमा दर्ज किया गया है और मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है।
यह कहानी सिर्फ एक युवती के अपराध की नहीं, बल्कि सोशल मीडिया की उस चमकदार दुनिया की भी है, जहां दिखावे और लाइक्स की दौड़ में कई बार हकीकत पीछे छूट जाती है। अंशिका की कहानी एक चेतावनी है कि रील्स की चकाचौंध और महंगे शौक जब नियंत्रण से बाहर हो जाते हैं, तो उनका अंजाम कितना खतरनाक हो सकता है।
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