वाराणसी के मलदहिया स्थित फूलमंडी में बृहस्पतिवार रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब नगर निगम की टीम अवैध वसूली की शिकायतों की जांच करने मौके पर पहुंची। किसानों द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद निगम प्रशासन ने अचानक छापामार कार्रवाई की। जांच के दौरान कथित तौर पर वसूली की पुष्टि होने पर टीम ने मंडी के बाहर लगे बोर्ड और होर्डिंग्स को हटाना शुरू कर दिया। इस कार्रवाई का कुछ दुकानदारों और कथित संचालक के समर्थकों ने विरोध किया, जिससे मौके पर हंगामे की स्थिति बन गई। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

किसानों की शिकायत से खुला मामला
मलदहिया फूलमंडी में आसपास के जिलों और गांवों से किसान अपनी उपज बेचने आते हैं। बीते कुछ समय से किसानों की ओर से शिकायत मिल रही थी कि मंडी में प्रवेश, दुकान लगाने और व्यापार करने के नाम पर उनसे धन वसूला जा रहा है। किसानों का आरोप था कि यह वसूली किसी अधिकृत शुल्क के तहत नहीं, बल्कि निजी तौर पर की जा रही है।
इन्हीं शिकायतों के आधार पर नगर निगम प्रशासन ने जांच का निर्णय लिया। बृहस्पतिवार देर शाम निगम की टीम मंडी परिसर में पहुंची और मौके पर स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने किसानों और व्यापारियों से पूछताछ की, दस्तावेजों की जांच की और वसूली से संबंधित तथ्यों को परखा।
जांच में वसूली की पुष्टि
प्राथमिक जांच में सामने आया कि फूलमंडी के कथित संचालक विशाल दुबे की ओर से किसानों से पैसे की मांग की जा रही थी। हालांकि, निगम अधिकारियों के अनुसार, सार्वजनिक स्थल पर लगने वाली इस मंडी में किसी निजी व्यक्ति को शुल्क वसूलने का अधिकार नहीं है। जांच में जब यह स्पष्ट हुआ कि किसानों से बिना किसी वैधानिक अनुमति के धन लिया जा रहा है, तो टीम ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी।
कार्रवाई के तहत मंडी के मुख्य द्वार पर लगे बोर्ड और होर्डिंग्स को हटाया गया, जिन पर कथित संचालक का नाम अंकित था। निगम कर्मचारियों ने हथौड़े और अन्य उपकरणों की मदद से इन बोर्डों को उखाड़ दिया। जैसे ही यह कार्रवाई शुरू हुई, वहां मौजूद कुछ दुकानदारों और समर्थकों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया।
हंगामा और पुलिस की दखल
बोर्ड हटाए जाने के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया। कथित संचालक और उसके सहयोगियों ने निगम टीम को रोकने की कोशिश की। कुछ देर के लिए तीखी नोकझोंक भी हुई। स्थिति बिगड़ती देख पहले से मौजूद पुलिस बल ने मोर्चा संभाला और विरोध कर रहे लोगों को पीछे हटाया।
पुलिस की मौजूदगी के कारण कोई बड़ा टकराव नहीं हुआ, लेकिन मंडी परिसर में काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। कई दुकानदारों ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई और कहा कि उन्हें बिना पूर्व सूचना के कार्रवाई की गई। वहीं किसानों के एक वर्ग ने निगम की कार्रवाई का समर्थन किया और इसे राहत भरा कदम बताया।
निगम प्रशासन का सख्त रुख
नगर निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मलदहिया फूलमंडी सार्वजनिक स्थान पर संचालित होती है। ऐसे में किसी भी निजी व्यक्ति को किसानों से प्रवेश शुल्क या व्यापार शुल्क के नाम पर धन लेने का अधिकार नहीं है। यदि कोई व्यक्ति ऐसा करता है तो वह अवैध वसूली की श्रेणी में आता है।
अधिकारियों ने कहा कि जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। यदि भविष्य में दोबारा इस प्रकार की शिकायत मिली, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। निगम प्रशासन ने यह भी संकेत दिया कि मंडी संचालन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे, ताकि किसानों और व्यापारियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
किसानों को राहत की उम्मीद
फूलमंडी में रोजाना बड़ी संख्या में किसान अपनी उपज लेकर पहुंचते हैं। ऐसे में यदि उनसे अतिरिक्त और अवैध शुल्क वसूला जाता है, तो इसका सीधा असर उनकी आमदनी पर पड़ता है। किसानों का कहना है कि पहले ही लागत बढ़ने से मुनाफा कम हो गया है, ऐसे में अनधिकृत वसूली से उनकी परेशानी और बढ़ जाती है।
कई किसानों ने बताया कि उन्हें हर बार मंडी में प्रवेश के समय कुछ न कुछ राशि देनी पड़ती थी। हालांकि, वे खुलकर शिकायत करने से हिचकिचाते थे। निगम की कार्रवाई के बाद अब उन्हें उम्मीद है कि आगे ऐसी स्थिति नहीं बनेगी।
आगे की रणनीति
नगर निगम ने संकेत दिया है कि शहर के अन्य बाजारों और अस्थायी मंडियों की भी जांच की जाएगी। जहां भी अवैध वसूली की शिकायत मिलेगी, वहां सख्त कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन का कहना है कि शहर में व्यापार और बाजार व्यवस्था पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
फिलहाल मलदहिया फूलमंडी में स्थिति सामान्य है, लेकिन घटना ने मंडी संचालन की व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। निगम की इस कार्रवाई को अवैध वसूली के खिलाफ सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है और क्या कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाती है।
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